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योग: हरतालिका तीज-श्रीगणेश चतुर्थी एक दिन

जन्माष्टमी से पितृपक्ष आरंभ तक बनेंगे विशेष संयोग। एक साथ पूजे जाएंगे माता-पिता शिव-पार्वती ओर पुत्र श्रीगणेश, इस माह दिखेंगे जन्माष्टमी से पितृपक्ष तक आस्था के रंग, 25 को गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी महीनेभर मंदिरों में गूंजेंगे भजन-कीर्तन।
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ganeshji becomes happy by reciting ganesh atharva shirsha

"गणेश अथर्व शीर्ष" के पाठ से प्रसन्न होते हैं गणेशजी फोटो सोर्स : AI Grok

रतलाम। भादौ का महीना भी श्रद्धा और आस्था से सराबोर रहने वाला है। कृष्ण जन्माष्टमी से लेकर गणेश उत्सव, राधा अष्टमी, अनंत चतुर्दशी और पितृपक्ष तक कई बड़े व्रत-त्योहार की झड़ी लगेगी। इसमें कई ऐसे विशिष्ठ संयोग बनने वाले हैं, जिसका धर्मालुओं को कई लाभ मिलेगा। घर-घर पूजा-अर्चना होगी तो मंदिरों में विशेष आयोजन और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रहेगी।

इस माह 4 सितंबर जन्माष्टमी से पर्वो की शुरुआत हो जाएगी, लेकिन खास बात यह है कि 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ पड़ रही हैं। यानी एक ओर महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखकर भगवान शिव-पार्वती की पूजा करेंगी। दूसरी ओर गणपति बप्पा की स्थापना के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव भी शुरू होंगे।

जन्माष्टमी से शुरू होगा पर्वों का सिलसिला
4 सितंबर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। श्रद्धालु दिनभर व्रत रखेंगे और रात में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय पूजा-अर्चना करेंगे। मंदिरों में झांकियां सजेंगी और मध्यरात्रि में नंदलाल के जन्मोत्सव के साथ उत्सव का माहौल बनेगा। 7 सितंबर को अजा एकादशी, 8 सितंबर को भौम प्रदोष और 9 सितंबर को मासिक शिवरात्रि रहेगी। लगातार तीन दिनों तक धार्मिक आयोजनों का सिलसिला बना रहेगा।

दस दिवसीय उत्सव शहर में रहेगी रौनक
14 सितंबर के दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व होंगे। हरतालिका तीज पर महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। वहीं गणेश चतुर्थी पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति प्रतिमाओं की स्थापना होगी। शहर में अगले दस दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की रौनक देखने को मिलेगी।

राधा अष्टमी के साथ महालक्ष्मी व्रत
19 सितंबर को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। राधा-कृष्ण मंदिरों में विशेष श्रृंगार, पूजा और भजन-कीर्तन होंगे। इसी दिन महालक्ष्मी व्रत की शुरुआत भी होगा। श्रद्धालु मां लक्ष्मी की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। 22 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी का व्रत रहेगा।

25 को विदाई लेंगे गणपति
अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश उत्सव का समापन होगा। कई स्थानों पर गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए चल समारोह निकाले जाएंगे। भक्त ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति को विदाई देंगे और अगले बरस जल्दी आने की प्रार्थना करेंगे।

27 से पितरों की आराधना
धार्मिक दृष्टि से महीने का अंतिम बड़ा पड़ाव 27 सितंबर से शुरू होगा। इस दिन से पितृपक्ष शुरू होगा और प्रतिपदा श्राद्ध किया जाएगा। इसके साथ ही लोग अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक कर्मकांड करेंगे।

सितंबर के बड़े व्रत-त्योहार
4 सितंबर — कृष्ण जन्माष्टमी
7 सितंबर — अजा एकादशी
8 सितंबर — भौम प्रदोष व्रत
9 सितंबर — मासिक शिवरात्रि
14 सितंबर — हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी
15 सितंबर — ऋषि पंचमी
17 सितंबर — विश्वकर्मा पूजा
19 सितंबर — राधा अष्टमी, महालक्ष्मी व्रत आरंभ
22 सितंबर — परिवर्तनी एकादशी
25 सितंबर — अनंत चतुर्दशी, गणेश विसर्जन
27 सितंबर — पितृपक्ष आरंभ, प्रतिपदा श्राद्ध