22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मानसून अलर्ट: धोलावाड़ डेम 43 प्रतिशत भरा, इस माह उम्मीद, नहीं तो संकट

रतलाम-मंदसौर-नीमच में मानसून ने अब तक नहीं भरी झोली, खेतों में नमी से खरीफ संभली लेकिन जलाशयों का खाली पेट रबी की चिंता बढ़ा रहा, तीन जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रतलाम

•

image

Gourishankar singh Jodha

•

Updated: 1 Sep 2026, 11:00 PM IST

Dholawad Dam news ratlam

रतलाम-मंदसौर-नीमच में मानसून ने अब तक नहीं भरी झोली, खेतों में नमी से खरीफ संभली लेकिन जलाशयों का खाली पेट रबी की चिंता बढ़ा रहा, तीन जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे।

रतलाम। सावन बीत गया और भादो शुरू हो गया। मालवा के रतलाम, मंदसौर और नीमच में कभी सावन में झड़ी लगती थी और भादों में गरज के साथ बारिश होती थी।, लेकिन मालवा की धरती अब भी उस बारिश का इंतजार कर रही है, जो खेतों के साथ जलाशयों और भूजल को भी भर सके। किसानों-आमजन को सितंबर माह में अच्छी बारिश की उम्मीद हैंं। धोलावाड़ डेम 100 में से 43 प्रतिशत ही भरा हैं।

रतलाम, मंदसौर और नीमच में मानसून ने अब तक औसत के मुकाबले कम पानी दिया है। खेतों में मौजूद नमी ने फिलहाल खरीफ फसलों को संभाल रखा है, लेकिन आसमान की बेरुखी का असर अब जलस्रोतों में साफ दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ के बाद शुरू होने वाला रबी सीजन पानी के संकट में फंस सकता है।

16 इंच की कमी, धोलावाड़ भी 22.28 एमसीएम भरा
रतलाम जिले में अब तक 19.6 इंच औसत बारिश दर्ज हुई है, जबकि मानसून सत्र में सामान्य औसत करीब 36 इंच माना जाता है। यानी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए करीब 16 इंच बारिश और चाहिए। आठ विकासखंडों में बाजना में सबसे कम 343 मिमी और रतलाम में सर्वाधिक 654 मिमी बारिश दर्ज हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में भी इस बार करीब 16 इंच बारिश कम है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खेतों में फिलहाल नमी होने से खरीफ फसल ठीक है, लेकिन जलस्तर की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। धोलावाड़ जलाशय में 49.95 एमसीएम भराव की जरूरत के मुकाबले अभी सिर्फ 22.28 एमसीएम पानी है।

इनका कहना है
धोलावाड़ डेम 100 में से 43 प्रतिशत ही भरा हैं। साढ़े पांच मीटर अब भी खाली हैं। 22.28 एमसीएस पानी भरा है और वाटर सप्लाय के लिए 18 एमसीएम पानी की आवश्यकता होती है। बहुत स्थिति खराब हैं। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा अगर यही स्थिति रही तो।
रतनसिंह मीना, एसडीओ

मंदसौर सितंबर से उम्मीद, खेतों में बढ़ रहा संकट
मंदसौर में अब तक 23.52 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य औसत से करीब 10 इंच कम है। गांधीसागर बांध की क्षमता 6607.42 एमसीएम है, वर्तमान भराव 4528.42 एमसीएम पहुंचा हैं। मौसम विभाग ने सितंबर के पहले सप्ताह में मानसून के सक्रिय होने की संभावना जताई है। पिछले वर्षों में सितंबर की बारिश ने जिले का कोटा पूरा करने के साथ जलस्रोतों को भी भरने में अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल खरीफ फसलों पर पीलामोजेक, अफलन और इल्लियों का प्रकोप बढ़ रहा है। खेतों में नमी घटने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में सितंबर की बारिश किसानों के लिए बड़ी राहत बन सकती है।

नीमच: 240 मिमी कम, अब भी आसमान की ओर नजर
नीमच में अब तक 572.6 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से करीब 240 मिमी कम है। जिले में बारिश की कमी का असर साफ महसूस किया जा रहा है। सीताराम जाजू सागर बांध की क्षमता 6607.42 एमसीएम है, वर्तमान भराव 4420.71 एमसीएम पहुंचा हैं। खरीफ फसल फिलहाल सामान्य है, लेकिन जलस्रोतों की स्थिति चिंता पैदा कर रही है। सितंबर को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट राहत का संकेत नहीं है।