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आठ घंटे तक करना होता है इंतजार, क्योंकि रेलवे अधिकारी नहीं चला रहे ट्रेन

दावा कोरोना के पूर्व की व्यवस्था शुरू करने का, मनमर्जी अब तक जारी

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RAILWAY--कोरोना की तीसरी लहर की आशंका, रेलवे ने 6 माह और बढ़ाई मास्क की सख्ती

RAILWAY--कोरोना की तीसरी लहर की आशंका, रेलवे ने 6 माह और बढ़ाई मास्क की सख्ती

रतलाम. रेलवे का दावा है कि उसने कोरोना के पूर्व की व्यवस्थाओं को लागू कर दिया है। अब यात्रियों को 99 प्रतिशत यात्री ट्रेन की सुविधाएं मिल गई है। इसके उलट हकीकत यह है कि अब भी रतलाम से चित्तौडग़ढ़ के बीच 8 घंटे के दरमियान मंदसौर, नीमच चित्तौडग़ढ़ के बीच एक भी डेमू ट्रेन नहीं चल रहा है, जबकि कोरोना के पूर्व यह सुविधा बरकरार थी। इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ रतलाम रेल मंडल के अधिकारी है, जो जारी सुविधाओं को बरकरार नहीं रख पा रहे है। ऐसे में यात्रियों को बस व जीप में अधिक दाम देकर यात्रा करने की मजबूरी बन रही है।

कोरोना काल के बाद अब यात्री ट्रेन बहाल हो गई है व किराया भी अधिकांश ट्रेन में सामान्य हो गया है। अधिकांश ट्रेन पटरी पर दौडने लगी है, लेकिन रतलाम से मंदसौर - नीमच - चित्तौडग़ढ़ के बीच अब भी कोरोना काल में बंद की गई डेमू ट्रेन को शुरू नहीं किया गया है। डॉ. अंबेडकर नगर से आकर रतलाम में डेमू ट्रेन का रैक करीब 9 घंटे खड़ा रहता है, लेकिन इसको आगे की यात्रा के लिए नहीं चलाया जा रहा है।

यह है डेमू की स्थिति


इंदौर से सुबह 6.20 बजे डेमू ट्रेन चलकर सुबह 9.20 बजे रतलाम आती है। शाम को 6.30 बजे यह ट्रेन चित्तौडग़ढ़ के लिए चलती है। ऐसे में करीब 9 घंटे तक रैक को खड़ा रखा जाता है। जबकि पूर्व में यही ट्रेन सुबह 9.20 बजे आकर 9.50 बजे मंदसौर - नीमच - चित्तौडग़ढ़ के लिए चलती थी। इसी प्रकार वापसी में दोपहर 2.10 बजे चलकर शाम 6.20 बजे रतलाम आती थी व इसके आगे की यात्रा होती थी। अब सुबह 8.45 बजे हल्दीघाटी पैसेंजर ट्रेन के बाद मंदसौर - नीमच - चित्तौडग़ढ़ के लिए शाम 6.30 बजे कोई ट्रेन की सुविधा ही नहीं है। ऐसे में यात्रियों को बस व जीप में यात्रा करने की मजबूरी है।

जल्दी होगा निर्णय


रतलाम से चित्तौडग़ढ़ के बीच पूर्व की तरह डेमू चलाने के बारे में मंथन जारी है। जल्दी इस पर निर्णय होगा।


- खेमराज मीणा, मंडल रेल प्रवक्ता