
रतलाम मेडिकल कॉलेज
रतलाम. नवजात शिशुओं को जन्म से ही होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) और पीआईसीयू के पास ही मदर मिल्क बैंक भी लगभग तैयार हो चुका है। जुलाई में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की टीम यहां दौरा करके इसका जायजा ले चुकी है। टीम ने इसमें कुछ संशोधन करने और मापदंडों के हिसाब से बदलाव करने के निर्देश दिए थे। इन निर्देशों के अनुसार मिल्क बैंक में काम शुरू हो चुका है और अगले माह तक यह पूरा हो जाएगा। इसके लिए जरुरी मशीनों और मानव संसाधनों की पूर्ति भी जल्द होने वाली है। मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार एनएचएम के बजट से तैयार हुई इस यूनिट का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है।
मेडिकल कॉलेज में तैयार हो रही मिल्क बैंक केवल उन बच्चों को दूध देने के लिए ही नहीं है जिनकी माताओं को उनके जन्म के बाद दूध नहीं आ रहा है। वरन यह बहुत संवेदनशील मामला होने से जिन माताओं का दूध यहां रखा जाएगा उसकी जांच ब्लड बैंक में होने वाले ब्लड की तरह करने के बाद ही किसी को दिया जा सकेगा। इसमें एचआइवी सहित अन्य तरह की बीमारियों जांचें की के बाद ही उसका उपयोग हो सकेगा। इसकी वजह है कि कोई महिला एचआइवी या किसी दूसरी गंभीर बीमारी से पीडि़त है तो उसका दूध किसी दूसरे बच्चे को देना खतरनाक साबित हो सकता है।
मिल्क बैंक में पाश्चुराइजेशन, माइक्रो स्कोप, बे्रस्टे पंप, फ्रीजर, डीप फ्रीजर, इचआइवी, इंफेक्शन जांच की मशीनें लगाई जाएगी। इस काम के लिए टेक्नीशियन भी लगेंगे जो जांच करेंगे।
मदर मिल्क बैंक की शुरुआत मेडिकल कॉलेज में होती है तो उन बच्चों और अभिभावकों के लिए यह एक सौगात होगी जिन माताओं को डिलीवरी के बाद दूध नहीं उतरता है।
मिल्क बैंक में हर किसी के महिला के लिए अनिवार्य नहीं होगा। स्वैच्छिक रूप से महिला यहां आकर अपना दूध डोनेट कर सकेगी। यह दूध उन्हें देंगे जिन्हें इसकी जरुरत है।
एनएचएम की टीम ने निरीक्षण के दौरान कुछ संशोधन सुझाए थे। उनके अनुसार मिल्क बैंक में काम करवाया जा रहा है। मशीनों के लिए आर्डर दिए जा चुके हैं। हमारा प्रयास होगा कि इसे जल्द शुरू कर दें जिससे बच्चों को लाभ मिले।
डॉ. अनिता मुथा, डीन मेडिकल कॉलेज
Updated on:
22 Aug 2026 05:04 pm
Published on:
22 Aug 2026 05:03 pm
