
relationship
किसी भी रिश्ते में झगड़े और तर्क-वितर्क की संभावना हमेशा ही बनी रहती है। ऐसे में हमारा यह सोचना लाजमी है कि क्या वाकई ऐसी कोई नीति है, जो हमारे और हमारे पार्टनर के बीच झगड़े को हमेशा के लिए खत्म कर सके? विशेषज्ञ कहते हैं कि हां है।
रिश्ते की शुरुआत में एक जोड़ा बहुत खुश और सकारात्मक दिखाई देता है लेकिन कुछ समय गुजरने के साथ ही ज्यादातर रिश्तों में से प्यार और भरोसा खत्म होने लगता है और उसकी जगह ले लेते हैं रोज-रोज के झगड़े और तू-तू मैं-मैं। ऐसे में दोनों ही पार्टनर्स के लिए इस रिश्ते को निभाना एक बोझ बन जाता है और नतीजा अलगाव तक पहुंच जाता है। अगर आप चाहती हैं कि आपका रिश्ता हमेशा मजबूत और खुशनुमा बना रहे तो यह ज्यादा मुश्किल नहीं है। आपकी तरफ से की गई थोड़ी सी कोशिश ही इसे सालो-साल बनाए रखेगी। जानिए क्या कर सकती हैं...
पार्टनर को बदलने की न सोचें
किसी भी रिश्ते में झगड़े की सबसे आम वजह होती है कि हम हमेशा यही सोचते हैं कि अगर किसी को बदलने की जरूरत है तो वह हमारे पार्टनर को है। हालांकि रिश्ते की मुश्किलों का पूरा दोष अपने पार्टनर को देना बहुत ही आसान होता है लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि बहस को खत्म करने का सबसे अच्छा तरीका है पार्टनर से बदलने की उम्मीद छोड़ देना। अपने पार्टनर को अपना प्रोजेक्ट बनाने के बोझ से मुक्त होकर अपने प्रिय को उसकी कमियों के साथ स्वीकार करें।
नियंत्रण करने की कोशिश न करें
श्रेष्ठ रिश्ता वही होता है, जिसमें दोनों व्यक्ति एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर कार्य करने की आजादी महसूस कर सकते हों। जब एक पार्टनर दूसरे को नियंत्रित करने की कोशिश करता है तो नतीजा दोनों के लिए ही नुकसानदायक हो सकता है। एक स्वस्थ रिश्ते में भरोसा होता है, जहां आपका साथी अपने मन की करने के लिए आजाद होता है। आपको यह समझना होगा कि जोड़ों में पार्टनर को कंट्रोल करना सबसे बुरी आदत होती है। आपका अहम आपको ऐसा करने के लिए मजबूर करता है।
परखने का नहीं सहानुभूति का भाव रखें
पूरी तरह से सुरक्षित और जजमेंट से मुक्त रिश्ते की चाहत सभी की होती है। कमजोर फैसलों और कार्यों के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने वाले जोड़ों के बीच प्यार कम होने लगता है। आपका पार्टनर छोटे-छोटे काम कैसे कर रहा है, इसे परखने का भाव मन से निकालकर सहयोग के लिए शुक्रिया अदा करना सीखें।
पार्टनर को उसके मूल रूप में स्वीकारें
एक समर्पित रिश्ते में होने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप खुद को पूरी तरह बदल दें और अपने असल व्यक्तित्व को भूल जाएं। जहां व्यक्तिगत ग्रोथ और सुधार आपके रिश्ते के लिए अच्छा है, वहीं दोनों पार्टनर्स को यह महसूस होना भी जरूरी है कि उन्हें बिना किसी शर्त के अपनाया गया है।
अपने पार्टनर की बात सुनें
नियमित रूप से समय निकालकर अपने पार्टनर की बात ध्यान से सुनें और उन्हें महत्व दें। ऐसा आप कितनी बार करती हैं? अगर नहीं तो अगली बार जब आपका पार्टनर आपसे बात कर रहा हो तो उसे ध्यान से सुनें और इस दौरान पार्टनर की ओर देखें। बीच में कोई दूसरा काम करने या बातचीत को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश न करें। आप सहमत न हों तो भी साथी की बात को ध्यान से सुनना रिश्ते को मजबूत बनाता है।
Published on:
08 Jan 2018 10:19 am
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