इस दिन पितृ श्राद्ध करने का भी विधान है, इस दिन जौ, गेहूं, चना, सत्तू, दही चावल, दूध से बनी सामग्री का दान पितरों के नाम से करना चाहिए और ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए। तीर्थ स्थल पर पितरों का श्राद्ध और तर्पण बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है इस दिन सोना खरीदने से घर में समृद्धि आती है। इसी दिन सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। इस दिन पूजा से देवताओं से अनंत शुभ फल की भी प्राप्ति होती है।