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Ashadha Month 2026: 30 जून से आषाढ़ मास शुरू: जानिए सूर्य पूजा का महत्व, वामन अवतार की कथा और चतुर्मास की शुरुआत

Chaturmas 2026: आषाढ़ मास 2026 की शुरुआत 30 जून से हो रही है। जानें सूर्य पूजा का महत्व, भगवान वामन अवतार की कथा, जगन्नाथ रथयात्रा, देवशयनी एकादशी और चतुर्मास से जुड़े धार्मिक नियम व मान्यताएं।

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भारत

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Manoj Vashisth

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टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा

Jun 21, 2026

Surya Puja, Vamana Avatar, Chaturmas

Ashadha Month 2026 : 30 जून से 29 जुलाई तक आषाढ़ महीना रहेगा। धार्मिक और सेहत के हिसाब से महत्वपूर्ण इस आषाढ़ मास में गुरु, श्री हरि विष्णु और जल देव की उपासना का विशेष महत्व है। (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Vamana Avatar Story, Surya Puja Significance: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ मास 30 जून से शुरू होकर 29 जुलाई तक रहेगा। यह महीना सूर्य उपासना, भगवान विष्णु के वामन अवतार और देवशयनी एकादशी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों के लिए विशेष माना जाता है। सनातन परंपरा में आषाढ़ मास को आध्यात्मिक साधना, संयम और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष काल माना जाता है। इस महीने में सूर्य उपासना, भगवान विष्णु के वामन स्वरूप (Vamana Avatar Story) की आराधना और जगन्नाथ रथयात्रा जैसे महत्वपूर्ण पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं।

मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा-पाठ से सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाला चतुर्मास (Chaturmas 2026) भी इसी माह का प्रमुख धार्मिक चरण है, जो भक्तों को भक्ति, अनुशासन और आत्मचिंतन का संदेश देता है।

सूर्य पूजा से जीत और आत्मविश्वास

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार, ऊर्जा के स्तर को संयमित रखने के लिए आषाढ़ के महीने में सूर्य की उपासना की जाती है। स्कंद और पद्म पुराण के अनुसार सूर्य को देवताओं की श्रेणी में रखा गया है और उन्हें भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन देने वाला भी कहा जाता है। भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताते हुए कहा है कि सूर्य ही एक प्रत्यक्ष देवता हैं।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार युद्ध के लिए लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने भी सूर्य को जल चढ़ाकर पूजा की थी, जिससे उन्हें रावण पर जीत हासिल करने में मदद मिली। भविष्य पुराण में कहा गया है कि सूर्य को जल चढ़ाने से दुश्मनों पर जीत मिलती है और आत्मविश्वास व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। आषाढ़ में रविवार और सप्तमी तिथि का व्रत रखने से मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं।

अर्घ्य देने की विधि और दान का महत्व

ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार, सुबह सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर नहाएं। इसके बाद तांबे के लोटे में जल भरें और चावल, फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। जल चढ़ाते समय सूर्य के वरूण रूप को प्रणाम करते हुए 'ऊं रवये नम:' मंत्र का जाप करें। इसके बाद धूप, दीप से सूर्य देव का पूजन करें और तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन आदि का दान करें। इस दिन सूर्यदेव की पूजा के बाद एक समय फलाहार करें।

भगवान वामन की पूजा और पौराणिक कथा

स्कंद पुराण के मुताबिक आषाढ़ महीने में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इस महीने के देवता भगवान वामन ही हैं। वामन पुराण के मुताबिक इनकी पूजा से संतान सुख मिलता है और पाप व शारीरिक परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

वामन अवतार की कथा:

सतयुग में असुर बलि ने देवताओं को पराजित करके स्वर्गलोक पर अधिकार कर लिया था। तब विष्णुजी ने देवमाता अदिति के गर्भ से वामन रूप में अवतार लिया। जब राजा बलि यज्ञ कर रहा था, तब वामनदेव ने उससे तीन पग धरती दान में मांगी। शुक्राचार्य के मना करने के बाद भी बलि ने वचन दे दिया। इसके बाद वामनदेव ने विशाल रूप धारण किया और एक पग में धरती और दूसरे पग में स्वर्गलोक नाप लिया।

तीसरा पैर रखने के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा तो बलि ने वामन को खुद सिर पर पग रखने को कहा। वामनदेव ने जैसे ही बलि के सिर पर पैर रखा, वह पाताल लोक पहुंच गया। बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान ने उसे पाताललोक का स्वामी बना दिया और सभी देवताओं को उनका स्वर्ग लौटा दिया।

आषाढ़ महीने के गुरुवार को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा के बाद छोटे बच्चे को भगवान वामन का रूप मानकर भोजन करवाया जाता है और दान दिया जाता है।

रथयात्रा और चतुर्मास का आरंभ

आषाढ़ मास के प्रमुख व्रत-त्योहारों में जगन्नाथ रथयात्रा है। इसी महीने देवशयनी एकादशी के दिन से श्री हरि विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं जिसके कारण अगले चार माह तक शुभ कार्यों को करने की मनाही है। इसे चतुर्मास के नाम से भी जाना जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।