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Ekadashi Vrat : एक दिन का एकादशी व्रत आपको 10,000 साल की तपस्या का फल दे सकता है

Ekadashi Vrat : 13 अप्रैल 2026 की वरुथिनी एकादशी बेहद खास मानी जाती है। जानें सही व्रत समय, पारण, नियम, क्या करें और क्या न करें, साथ ही इस दिन मिलने वाले 10,000 साल की तपस्या के बराबर पुण्य और आध्यात्मिक लाभ।

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भारत

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Manoj Vashisth

Apr 12, 2026

Varuthini Ekadashi 2026

Varuthini Ekadashi 2026 : कहते हैं इस एकादशी का व्रत करने से पाप खत्म और भाग्य मजबूत होता है (फोटो सोर्स: Gemini AI)

Varuthini Ekadashi 2026 : आने वाला समय आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। 13 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सुनहरा अवसर है। मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा सा नियम और त्याग भी कई गुना फल देता है जितना साधारण दिनों में संभव नहीं।

कब है वरुथिनी एकादशी? सही समय जानें | Varuthini Ekadashi Date and Time

वरुथिनी एकादशी की शुरुआत 12 अप्रैल रात 1:16 बजे से हो रही है और इसका प्रभाव 14 अप्रैल रात 1:08 बजे तक रहेगा।
व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा और पारण (व्रत खोलना) 14 अप्रैल को सुबह सूर्योदय से 8:31 बजे तक करना शुभ माना गया है।

ध्यान रखें: सही समय पर व्रत और पारण करना ही पूरे पुण्य का आधार माना गया है।

क्यों खास है वरुथिनी एकादशी?

‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ होता है रक्षा कवच। यानी यह एकादशी हमें पापों, कष्टों और नकारात्मकता से बचाने वाली ढाल है।

शास्त्रों में कहा गया है कि:

  • इस व्रत से पापों का नाश होता है
  • सौभाग्य, सुख और समृद्धि बढ़ती है
  • जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का मार्ग खुलता है

भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस व्रत का फल 10,000 वर्षों की तपस्या और सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्वर्ण दान के बराबर होता है।

व्रत से पहले क्या करें? (12 अप्रैल के नियम)

एकादशी से पहले ही तैयारी शुरू हो जाती है:

  • चावल का सेवन बिल्कुल न करें
  • सात्विक भोजन लें
  • मन को शांत और संयमित रखें

मान्यता है कि चावल त्यागने से मन की तामसिक प्रवृत्तियां कम होती हैं और व्यक्ति सात्विकता की ओर बढ़ता है।

व्रत के दिन क्या करें?

  • भगवान विष्णु का पूजन करें
  • व्रत रखें (फलाहार या निर्जल, अपनी क्षमता अनुसार)
  • भजन-कीर्तन और नाम जप करें
  • दान-पुण्य करें (विशेषकर अन्न और वस्त्र)

एक खास बात: विद्या दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है आज के समय में बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना भी बड़ा पुण्य माना जाता है।

द्वादशी के दिन बड़ी सावधानी!

14 अप्रैल को व्रत खोलते समय ध्यान रखें:

  • दूसरे (पराये) का भोजन न करें
  • समय पर पारण करें

शास्त्रों में कहा गया है कि द्वादशी पर पराया अन्न खाने से व्रत का पूरा पुण्य नष्ट हो सकता है।

अगर समय पर भोजन संभव न हो:

  • हाथ में जल लेकर संकल्प करें और पी लें
  • या जल को सूंघकर भी पारण किया जा सकता है

पुराणों में वर्णन मिलता है कि राजा धुंधुमार को श्राप के कारण भयंकर रोग हो गया था। उन्होंने वरुथिनी एकादशी का व्रत पूरे नियम से किया और उसी के प्रभाव से वे श्राप से मुक्त हो गए।

यह कथा बताती है कि सच्चे मन से किया गया व्रत जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या को भी हल कर सकता है।

गजेंद्र मोक्ष से सीख

एक और प्रसिद्ध कथा गजेंद्र मोक्ष हमें सिखाती है कि जब जीवन में कोई सहारा नहीं बचता, तब भगवान का स्मरण ही अंतिम शक्ति बनता है।
गजेंद्र ने संकट में भगवान को पुकारा और उन्हें मुक्ति मिली। यही इस एकादशी का सार है: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण।

विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय-समय पर उपवास शरीर के लिए फायदेमंद होता है। यह पाचन तंत्र को आराम देता है और ऊर्जा संतुलन बनाए रखता है।