
Varuthini Ekadashi 2026 : कहते हैं इस एकादशी का व्रत करने से पाप खत्म और भाग्य मजबूत होता है (फोटो सोर्स: Gemini AI)
Varuthini Ekadashi 2026 : आने वाला समय आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। 13 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली वरुथिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का सुनहरा अवसर है। मान्यता है कि इस दिन किया गया छोटा सा नियम और त्याग भी कई गुना फल देता है जितना साधारण दिनों में संभव नहीं।
वरुथिनी एकादशी की शुरुआत 12 अप्रैल रात 1:16 बजे से हो रही है और इसका प्रभाव 14 अप्रैल रात 1:08 बजे तक रहेगा।
व्रत 13 अप्रैल को रखा जाएगा और पारण (व्रत खोलना) 14 अप्रैल को सुबह सूर्योदय से 8:31 बजे तक करना शुभ माना गया है।
ध्यान रखें: सही समय पर व्रत और पारण करना ही पूरे पुण्य का आधार माना गया है।
‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ होता है रक्षा कवच। यानी यह एकादशी हमें पापों, कष्टों और नकारात्मकता से बचाने वाली ढाल है।
भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस व्रत का फल 10,000 वर्षों की तपस्या और सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्वर्ण दान के बराबर होता है।
एकादशी से पहले ही तैयारी शुरू हो जाती है:
मान्यता है कि चावल त्यागने से मन की तामसिक प्रवृत्तियां कम होती हैं और व्यक्ति सात्विकता की ओर बढ़ता है।
एक खास बात: विद्या दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है आज के समय में बच्चों की शिक्षा में सहयोग करना भी बड़ा पुण्य माना जाता है।
14 अप्रैल को व्रत खोलते समय ध्यान रखें:
शास्त्रों में कहा गया है कि द्वादशी पर पराया अन्न खाने से व्रत का पूरा पुण्य नष्ट हो सकता है।
पुराणों में वर्णन मिलता है कि राजा धुंधुमार को श्राप के कारण भयंकर रोग हो गया था। उन्होंने वरुथिनी एकादशी का व्रत पूरे नियम से किया और उसी के प्रभाव से वे श्राप से मुक्त हो गए।
यह कथा बताती है कि सच्चे मन से किया गया व्रत जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या को भी हल कर सकता है।
एक और प्रसिद्ध कथा गजेंद्र मोक्ष हमें सिखाती है कि जब जीवन में कोई सहारा नहीं बचता, तब भगवान का स्मरण ही अंतिम शक्ति बनता है।
गजेंद्र ने संकट में भगवान को पुकारा और उन्हें मुक्ति मिली। यही इस एकादशी का सार है: पूर्ण श्रद्धा और समर्पण।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय-समय पर उपवास शरीर के लिए फायदेमंद होता है। यह पाचन तंत्र को आराम देता है और ऊर्जा संतुलन बनाए रखता है।
Published on:
12 Apr 2026 04:29 pm
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