
नई दिल्ली। लोग कहते है कि कलियुग के बाद प्रलय आएगा जिससे कि पूरी दुनिया में तबाही मच जाएगी और इस प्रलय से ही दुनिया का अंत हो जाएगा। इस अंत के बाद ये दुनिया वीरान हो जाएगी क्योंकि इस धरती पर कोई भी नहीं बचेगा। लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में एक ऐसा पेड़ है जो कि प्रलय के आने के बद भी जिंदा रहेगी? जी, हां बिल्कूल सही सुना आपने,धरती पर एक ऐसा वृक्ष है जो कि अगर दुनिया तबाह हो गई फिर भी जिंदा रहेगी।
ये 250 साल पुराना पेड़ कोलकाता के आचार्य जगदीशचंद्र बोस बोटेनिकल गार्डेन में स्थित है। ये पेड़ करीब 14,500 वर्गमीटर में फैला हुआ है। सुनने में भले ही अचरज लगे लेकिन ये पेड़ वास्तव में इतने बड़े क्षेत्रफल में फल-फूल रहा है। पौराणिक कथाओं में इस वृक्ष का जिक्र है। इस वृक्ष को वट वृक्ष का नाम दिया गया है। कथा में इस पेड़ के बारे में ये बोला गया है कि ये वृक्ष परमात्मा का प्रतीक है और प्रलय के बाद भी ये जिंदा रहेगी।
कथाओं मे कहा गया है कि प्रलय में ये पूरी दुनिया पानी के अंदर समा जरएगी लेकिन इसके बाद भी ये वृक्ष जीवित रहेगी। कथा में ये भी कहा गया है कि इस वृक्ष में रहकर ही भगवान संसार का अवलोकन करते है। इस पेड़ के पत्ते पर भगवान का निवास है। ईश्वर बाल गोपाल की कृपा इस पेड़ के साथ है। रामकथा में भी इस पेड़ का जिक्र है।
कहा जाता है कि राम सीता और लक्ष्मण वनवास के समय जब यमुना नदी को पार कर रहे थे तो दूसरे तट पर पहुंचकर उन्होंने वट वृक्ष को ही प्रणाम किया था। सावित्री ने भी वटवृक्ष के नीचे ही अपने पति को पुर्नजीवित किया था जिस कारण इस पेड़ को वट सावित्री भी कहा जाता है।
बात यदि पर्यावरण के दृष्टिकोण से किया जाए तो ये पेड़ एक दिन में 20 घंटे से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन तैयार करती हैं। इस पेड़ की जड़ो में एंटीऑक्सीडेंट काफी भारी मात्रा में पाया जाता है।
वटवृक्ष के पत्ते कफ-पित्त नाशक, गर्भाशय शोधक और रक्त शोधक होते हैं। इतना ही नहीं त्वचा संबंधी रोगों सेे भी ये पत्ते निज़ात दिलाते हैं।
Published on:
30 Dec 2017 04:09 pm
बड़ी खबरें
View Allधर्म और अध्यात्म
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
