5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Parashuram Jayanti 2023: ये हैं भगवान परशुराम से जुड़ी कथाएं, जानें अपने किन-किन अवतारों से मिले

वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया (Akshay Tritiya) के दिन भगवान विष्णु के छठें अवतार परशुराम (Parashuram Jayanti 2023) का जन्म हुआ था। उनके स्वभाव और गुणों के बारे में कथाओं से जानकारी मिलती है। आइये जानते हैं भगवान परशुराम से जुड़ी कहानियां...
less than 1 minute read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Pravin Pandey

•

Updated: 22 Apr 2023, 1:34 PM IST

parashuram.jpg

parashuram jayanti

ऐसे राम बने परशुरामः भगवान परशुराम का प्रारंभिक नाम राम और ऋषि जमदग्नि का पुत्र होने से जामदग्न्य भी कहा जाता है। भगवान राम आदिदेव भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उन्होंने भगवान शिव की तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था। इससे भगवान शिव ने उन्हें अपना परशु दिया, जो राम हमेशा धारण किए रहते थे। इसीलिए इनका नाम परशुराम पड़ गया।


गणेशजी को बना दिया एकदंतः एक कथा के अनुसार भगवान परशुराम एक बार अपने आराध्य शिव से मिलने कैलाश पहुंचे। यहां माता शिव और पार्वती ने गणेशजी को किसी को उधर न आने देने के लिए नियुक्त किया था। इससे गणेशजी ने उनका रास्ता रोक लिया। यह बात परशुरामजी को नागवार गुजरी और दोनों में युद्ध शुरू हो गया। क्रोध में आकर परशुरामजी ने गणेशजी के दांत पर वार कर दिया,जिससे उनका एक दांत टूट गया और वो एकदंत कहे जाने लगे।

ये भी पढ़ेंः Parashuram Jayanti 2023: परशुराम जयंती पर जानें कौन थे पहले 'राम', ऐसे करें पूजा

जब भगवान राम को ललकाराः सीता स्वयंवर के समय जब भगवान राम ने शिवजी का धनुष तोड़ा तो कुपित परशुराम वहां पहुंच गए थे। यहां उन्होंने भगवान राम को युद्ध के लिए ललकारा, इस बीच उनका लक्ष्मणजी से रोचक संवाद भी हुआ। लेकिन परशुराम का क्रोध शांत नहीं हो रहा था, इस पर भगवान राम ने परशुराम को खुद के विष्णुजी का अवतार होने का आभास कराया। इस पर परशुराम का गुस्सा शांत हुआ।

कृष्ण को दिया सुदर्शनः भगवान परशुराम की मुलाकात द्वापर में भगवान विष्णु के एक अन्य अवतार से हुई थी। कथा के अनुसार भगवान कृष्ण सांदीपनि ऋषि के आश्रम में जब शिक्षा पूरी कर चुके, तब परशुराम वहां आए और सुदर्शन चक्र भगवान कृष्ण को सौंपा। कहा यह युग आपका है, अपना युग संभालिए, यहां पाप बहुत बढ़ गया है। इसका भार कम कीजिए।