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Sandhi Puja: 48 मिनट का संधि पूजा मुहूर्त, इस पूजा से मिलता है अष्टमी और नवमी पूजा का लाभ

नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के संधि काल में ही माता दुर्गा ने चंड मुंड का वध किया था। इसलिए संधिकाल पूजा का विशेष महत्व है और यह समय हवन के लिए सबसे शुभ समय होता है आइये जानते हैं संधि पूजा मुहूर्त और पूजा विधि..
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Pravin Pandey

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Updated: 23 Oct 2023, 2:30 PM IST

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संधि पूजा का मुहूर्त महत्व

संधि पूजा का महत्व
नवरात्रि पूजा में संधि पूजा का विशेष महत्व होता है। संधि पूजा उस समय की जाती है, जब अष्टमी तिथि समाप्त होती है और नवमी तिथि शुरू होती है। मान्यता है कि देवी चामुंडा इसी समय राक्षस चंड और मुंड के वध के लिए प्रकट हुईं थीं। संधि पूजा का समय दो घटी यानी लगभग 48 मिनट का होता है। इस तरह संधि पूजा मुहूर्त दिन में किसी भी समय आ सकता है और संधि पूजा उसी समय के दौरान की जाती है। यह भी मान्यता है कि संधि पूजा से माता चामुंडा भक्त को हर संकट से छुटकारा दिलाती हैं और उसकी मनोकामना पूरी करती हैं।

संधि पूजा का मुहूर्त
पंचांग के अनुसार अश्विन शुक्ल अष्टमी की शुरुआत 21 अक्टूबर को रात 9.53 बजे हो रही है और इस तिथि का समापन 22 अक्टूबर रविवार रात 7.58 बजे हो रहा है। इस तरह संधि पूजा का मुहूर्त रात 7.34 बजे से 8.22 बजे के बीच होगा।

दुर्गा अष्टमी पर दो विशेष योग
इस साल की दुर्गा अष्टमी बेहद खास है। इस दिन दो विशेष योग सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग 22 अक्टूबर को सुबह 6.20 से शाम 6.44 बजे तक है। इसके बाद अगले दिन 23 अक्टूबर को सुबह 6.21 बजे तक रवि योग बनेगा।

ये भी पढ़ेंः Kanya Pujan : कब है महाष्टमी, कन्या पूजन में बालक की क्यों होती है पूजा, जानें पूजा विधि और मुहूर्त

संधि पूजा का महत्व
संधि पूजा का खास महत्व है। मान्यता है कि इस समय पूजा अष्टमी और नवमी दोनों दिन की अधिष्ठात्री देवियों की पूजा हो जाता है। मान्यता है कि अष्टमी के मुहूर्त में देवी दुर्गा ने असुर चंड-मुंड और दूसरे दिन महिषासुर का वध किया था। यह समय दुर्गा पूजा और हवन के लिए सबसे शुभ माना जाता है और तुरंत फल देने वाला होता है। इस समय केला, ककड़ी कद्दू आदि सब्जियों की बलि देने की परंपरा है। संधि काल में 108 दीपक जलाकर माता महागौरी की आराधना की जाती है। इससे प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूरी करती हैं, उन्हें अभय, रूप, सौंदर्य प्रदान करती हैं। विष व्याधियों का अंत कर आरोग्य और सुख समृद्धि प्रदान करती हैं।

संधि पूजा की विधि
1. संधि काल में मां दुर्गा के के सामने 108 दीपक जलाएं।
2. मां दुर्गा को 108 कमल के फूल, 108 बिल्वपत्र, आभूषण, पारंपरिक वस्त्र, गुड़हल के फूल, कच्चे चावल अनाज, एक लाल रंग का फल और माला अर्पित करें।
3. मां के मंत्रों का जाप कर कद्दू, ककड़ी की बलि चढ़ाएं।
4. हवन कर मां की आरती करें।