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Sheetala Ashtami Vrat Katha 2026: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें यह कथा, तभी मिलता है व्रत और पूजा का पूर्ण फल

Sheetala Ashtami Vrat Katha 2026: चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी का व्रत और पूजा की जाती है। इस वर्ष यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा और इस दिन को कई जगह बसौड़ा भी कहा जाता है।मान्यता है कि माता शीतला की व्रत कथा श्रद्धा से सुनी या पढ़ी जाती है।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 10, 2026

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Sheetala Mata Story in Hindi|फोटो सोर्स- Chatgpt

Sheetala Ashtami Vrat Katha 2026: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का व्रत माता शीतला की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष यह व्रत 11 मार्च को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने के साथ शीतला माता की व्रत कथा सुनना या पढ़ना जरूरी होता है। कहा जाता है कि कथा के बिना व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और माता की कृपा अधूरी मानी जाती है।

शीतला अष्टमी कब है?

पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी का पर्व हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व हर साल चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 06:11 बजे से अगले दिन 06:05 बजे तक माना गया है, इसी दौरान माता शीतला की पूजा और व्रत करना शुभ फलदायी माना जाता है।

शीतला अष्टमी व्रत कथा (Sheetala Ashtami Vrat Katha in Hindi)

प्राचीन समय की बात है, एक गांव में एक ब्राह्मण परिवार रहता था। परिवार में बुजुर्ग दंपत्ति, उनके दो पुत्र और दो बहुएं थीं। दोनों बहुओं के दो-दो बेटे थे और पूरा परिवार प्रेम और सौहार्द के साथ जीवन बिताता था। एक बार शीतला अष्टमी का पावन पर्व आया। उस दिन सास ने दोनों बहुओं को व्रत के नियम समझाते हुए कहा कि शीतला अष्टमी के दिन ताजा भोजन नहीं बनाया जाता, बल्कि एक दिन पहले बनाया गया बासी भोजन ही ग्रहण किया जाता है।

बहुओं को चिंता हुई कि उनके छोटे-छोटे बच्चे बासी भोजन कैसे खाएंगे। इसी सोच में उन्होंने सास से छिपाकर अपने बच्चों के लिए ताजा भोजन बना दिया और उन्हें खिला दिया। इसके बाद वे शीतला माता की पूजा करने मंदिर चली गईं। पूजा करके जब वे घर लौटीं, तो देखा कि उनके दोनों बच्चे मृत पड़े हैं। यह दृश्य देखकर दोनों बहुएं विलाप करने लगीं।

सास ने दुख और क्रोध के साथ कहा कि तुमने व्रत का नियम तोड़ा है, इसलिए माता शीतला नाराज हो गईं। जब तक अपने बच्चों को जीवित नहीं कर लेतीं, तब तक घर वापस मत आना। यह सुनकर दोनों बहुएं अपने बच्चों को गोद में लेकर घर से निकल पड़ीं और भटकते-भटकते एक खेजड़ी के पेड़ के पास पहुंचीं।

वहां उन्हें दो बहनें मिलीं, जो सिर में जूं और गंदगी के कारण बहुत परेशान थीं। बहुओं ने अपने दुख को भूलकर उनकी मदद करने का निश्चय किया और उनके सिर से जूं साफ करने लगीं। थोड़ी ही देर में उन्होंने पूरी लगन से उनका सिर साफ कर दिया। बहनों ने प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद दिया कि तुम्हें शीघ्र ही पुत्र सुख प्राप्त होगा।

यह सुनकर बहुएं अपने दुख को याद कर रोने लगीं और सारी बात बता दी। तभी वहां शीतला माता प्रकट हुईं। माता ने कहा कि तुमने निस्वार्थ भाव से इन बहनों की सेवा की है और इनके सच्चे आशीर्वाद से प्रसन्न होकर मैं अपने क्रोध को त्याग रही हूं। इतना कहकर माता ने उनके दोनों बच्चों को पुनः जीवित कर दिया।

माता के आशीर्वाद से दोनों बहुएं अत्यंत प्रसन्न हुईं और अपने बच्चों को लेकर घर लौट आईं। इसके बाद उन्होंने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से शीतला माता का व्रत और पूजा करना शुरू किया। तभी से यह मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन व्रत के नियमों का पालन और माता की कथा सुनना अत्यंत आवश्यक माना जाता है। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य का आशीर्वाद बना रहता है।

Sheetala Ashtami Ki Aarti: शीतला मां की आरती

जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता,
आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता…

रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता,
ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता…

विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता,
वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता । जय शीतला माता…

इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा,
सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता…

घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता,
करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता…

ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,
भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता…

जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता,
सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता…

रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता,
कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता…

बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता,
ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता। जय शीतला माता…

शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता,
उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता…

दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता,
भक्ति आपनी दीजे और न कुछ भाता।
जय शीतला माता…।