
सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां|Freepik
Surya Dev Puja Tips: रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी पूजा और अर्घ्य का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में उगते सूर्य को जल अर्पित करने की परंपरा न केवल धार्मिक बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जा के दृष्टिकोण से भी लाभकारी मानी गई है। मान्यता है कि सही विधि से अर्घ्य देने पर सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सफलता, यश और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं। लेकिन शास्त्रों में अर्घ्य देते समय कुछ जरूरी नियम भी बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद आवश्यक है।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद ही सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इसके लिए तांबे के लोटे का उपयोग सबसे उत्तम माना गया है। जल में लाल फूल, कुमकुम और अक्षत (चावल) मिलाना शुभ होता है। जब आप अर्घ्य दें, तो जल की पतली धारा बहाते हुए सूर्य की किरणों को देखें। यह न केवल आध्यात्मिक अनुभव देता है बल्कि मन को भी शांति प्रदान करता है। इस दौरान आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि यही दिशा सूर्य उदय की होती है।
अक्सर लोग छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो पूजा के प्रभाव को कम कर सकती हैं।जल अर्पित करते समय जूते-चप्पल पहनकर न खड़े हों, हमेशा नंगे पैर रहें।ध्यान रखें कि अर्पित किया गया जल आपके पैरों तक न पहुंचे।देर से या सूर्योदय के काफी बाद जल चढ़ाना उचित नहीं माना जाता। ये छोटी सावधानियां आपकी पूजा को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें नियमित रूप से अर्घ्य देना चाहिए। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में सम्मान मिलता है।सूर्य को आत्मा का प्रतीक माना गया है, इसलिए उनकी उपासना से आत्मशुद्धि और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही, नियमित रूप से सूर्य को जल अर्पित करने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और सकारात्मकता का संचार होता है।
जल अर्पित करते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का कम से कम 11 बार जाप करना चाहिए। इससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है और मन एकाग्र होता है।
Published on:
18 Apr 2026 02:50 pm
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