14 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Vat Savitri Vrat 2026: सोमवती अमावस्या और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग, पति की लंबी उम्र के लिए 16 मई को रखें व्रत

Vat Savitri Vrat 2026 इस बार 16 मई को सोमवती अमावस्या, शनिश्चरी अमावस्या और शनि जयंती के विशेष संयोग में रखा जाएगा। जानें पूजा विधि, शुभ योग और पूजन सामग्री।

3 min read
Google source verification

भारत

image

Manoj Vashisth

May 14, 2026

Vat Savitri Vrat puja vidhi

Vat Savitri Vrat puja vidhi : सुहागिनें भी बरगद के पेड़ की उम्र के बराबर अपने पति की उम्र मांगती हैं (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Vat Savitri Vrat 2026: इस बार वट सावित्री व्रत और सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) का खास संयोग बन रहा है। वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat) 16 मई को है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले सारे व्रतों में वट सावित्री व्रत को बहुत प्रभावी माना जाता है। जिसमें सौभाग्यवती महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सभी प्रकार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिकाशर्मा ने बताया कि वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से अमावस्या तक उत्तर भारत में और ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में इन्हीं तिथियों में दक्षिण भारत में मनाया जाता है।

पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2026)

ऐसी मान्यता है कि जितनी उम्र बरगद के पेड़ की होती है, सुहागिनें भी बरगद के पेड़ की उम्र के बराबर अपने पति की उम्र मांगती हैं। हिंदू धर्म में बरगद का वृक्ष पूजनीय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस वृक्ष में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इस वृक्ष की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

इस दिन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष के पास जाकर धूप, दीप नैवेद्य आदि से पूजा करती हैं। साथ ही रोली और अक्षत चढ़ाकर वट वृक्ष पर कलावा बांधती हैं और हाथ जोड़कर वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। जिससे उनके पति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। वहीं सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान, पितरों की पूजा और धन प्राप्ति के खास उपाय भी किए जाते हैं।

अमावस्या तिथि के दिन महिलाएं बांस की टोकरी में सप्त धान्य के ऊपर ब्रह्मा और वट सावित्री और दूसरी टोकरी में सत्यवान एवं सावित्री की प्रतिमा स्थापित करके वट के समीप जाकर पूजन करती हैं। साथ ही इस दिन यम का भी पूजन करती हैं और वट की परिक्रमा करते समय 108 बार वट वृक्ष में कलावा लपेटा जाता है। मंत्र का जाप करते हुए सावित्री को अर्घ्य दिया जाता है। वहीं सौभाग्य पिटारी और पूजा सामग्री किसी योग्य साधक को दी जाती है। इस व्रत में सत्यवान और सावित्री की कथा का श्रवण किया जाता है।

वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2026 Date and Timing)

पंचांग के मुताबिक वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई को प्रातः 05:11 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 17 मई को देर रात 01:30 मिनट पर होगी। ऐसे में 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत का व्रत रखा जाएगा।

शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सफलता, सेहत और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं। इसके प्रभाव से रिश्तों में प्रेम-विश्वास और खुशियां वास करती हैं।

वट सावित्री व्रत शुभ योग (Vat Savitri Vrat 2026 Shubh Yog)

पंचांग के अनुसार 16 मई को शनि जयंती के साथ शनिश्चरी अमावस्या का भी योग बन रहा है, जिससे यह दिन दोगुना फलदायी हो गया है। शनि अमावस्या पर व्रत और शनि देव की पूजा का विशेष महत्व होता है, इसलिए इस बार का संयोग भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग भी बन रहे हैं।

सौभाग्य योग 15 मई दोपहर 2:21 बजे से 16 मई सुबह 10:26 बजे तक रहेगा, जिसके बाद शोभन योग शुरू होगा और यह 17 मई सुबह 6:15 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन दोनों योगों को शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

शनि जयंती के दिन भरणी नक्षत्र प्रातःकाल से लेकर शाम 5:30 बजे तक रहेगा, इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र और देवता यमराज माने जाते हैं, जबकि कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं। इन सभी संयोगों के कारण इस वर्ष शनि जयंती का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री लिस्ट (Vat Savitri Vrat 2026 List)

  • सावित्री-सत्यवान की मूर्तियां
  • धूप, दीप, घी
  • बांस का पंखा
  • लाल कलावा
  • सुहाग का सामान
  • कच्चा सूत
  • भिगोया हुआ चना
  • बरगद का फल
  • जल से भरा कलश
  • रोली, अक्षत (चावल), फूल
  • नैवेद्य / प्रसाद
  • पूजा की थाली
  • अगरबत्ती
  • फल और मिठाई
  • व्रत कथा पुस्तक
  • पूजा के लिए दीपक और रूई की बाती

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।