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वृषभ संक्रांतिः सूर्य देव की यह पूजा दिलाएगी हर काम में सफलता, इस मंत्र का जाप दिलाएगा धन, यश और वैभव

वृषभ संक्रांति (Vrishabh Sankranti ) 15 मई को है, इस दिन भगवान सूर्य, विष्णु और शिव की पूजा (Vrishabh Sankranti puja) की जाती है। इस दिन कुछ आसान उपायों से सभी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन वृषभ संक्रांति पूजा विधि और इस दिन क्या करें और क्या न करें की भी जानकारी जरूरी है।
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Pravin Pandey

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Updated: 13 May 2023, 10:08 PM IST

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वृषभ संक्रांति के दिन भगवान सूर्य, शिव और विष्णु की पूजा की जाती है।

क्या है वृषभ संक्रांति
धार्मिक और ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार जब सूर्यदेव एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो इस प्रक्रिया को संक्राति कहा जाता है। इसलिए 15 मई को जब सूर्यदेव अपनी उच्च राशि मेष से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे तो इसे वृषभ संक्रांति कहा जाएगा। इस राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी राशियों पर सकारात्मक और नकारात्मक रूप से पड़ेगा।
पंचांग के अनुसार साल 2023 में वृषभ संक्रांति 15 मई सोमवार को है। इसका पुण्यकाल सुबह 05 बजकर 31 मिनट से सुबह 11 बजकर 58 मिनट के बीच और महापुण्यकाल सुबह 09 बजकर 42 मिनट से सुबह 11 बजकर 58 मिनट के बीच रहेगा।

वृषभ संक्रांति का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार वृषभ संक्रांति के दिन पूजा-पाठ दान, जप-तप, पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन दोनों समय मनुष्य को पूजा पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य प्रबल होते हैं । इससे धन, वैभव, यश और सुख समृद्धि मिलती है। वृषभ संक्रांति के दिन भगवान शिव के ऋषभ रुद्र स्वरूप और भगवान सूर्य की पूजा का विधान है। इस दिन सूर्योदय के समय भगवान सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य नारायण की कृपा बनी रहती है, सूर्य संबंधित दोषों का भी निवारण होता है। कुंडली में सूर्य के अनुकूल होने से सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।

वृषभ संक्रांति के दिन ऐसे करें पूजा (Vrishabh sankranti puja vidhi)
1. वृषभ संक्रांति के दिन सुबह जरूदी उठकर घर की साफ-सफाई करें।
2. इसके बाद स्नान ध्यान कर सूर्यदेव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें।
3. अर्घ्य देते समय सूर्य देव के मंत्रों का उच्चारण करें।


4. इसके बाद पितरों का तर्पण करें और भगवान विष्णु और भोलेनाथ की पूजा करें।
5. इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप विशेष फलदायी है।
6. घर के मंदिर में घी का दीया जलाएं और व्रत का संकल्प लें।


7. दिन भर व्रत रहें और शाम के समय सूर्यदेव की पूजा कर आरती करें। इसके बाद ही फलाहार करें।
8. वृषभ संक्रांति के दिन जरूरतमंदों को जल, वस्त्र का दान करें।

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वृषभ संक्रांति के दिन क्या करें (vrishabh sankranti par kya karen)
1. वृषभ संक्रांति के दिन व्यक्ति को सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देना चाहिए और जमीन पर सोना चाहिए।
2. वृषभ संक्रांति के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।


3. इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करने से विशेष लाभ मिलता है।
4. वृषभ संक्रांति के दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितर आशीर्वाद देते हैं।
5. वृषभ संक्रांति से नौ दिन तक नौतपा रहता है, इस समय भीषण गर्मी रहती है, जिसके कारण इस समय जल दान, प्याऊ लगवाना विशेष लाभकारी माना जाता है।


इसका रखें ध्यान (vrishabh sankranti par kya na karen)


1. सूर्य संक्रांति के दिन गुड़ खाकर जल पीकर कार्यों का आरंभ करना चाहिए।
2. पिता के समान व्यक्ति को परेशान करने से परहेज करना चाहिए।
3. आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करना चाहिए और भगवान विष्णु की उपासना करना चाहिए।
4. इस दिन बंदर, पहाड़ी गाय, कपिला गाय को भोजन दें, गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्र ऊं रं रवये नमः या ऊं घृणि सूर्याय नमः का रोज एक माला जाप करें।
5. सूर्य गोचर के समय जल में खसखस या लाल फूल डालकर स्नान करें।
6. सुबह जल्दी उठकर धूप लें।