
बुध प्रदोष व्रत
भोपाल. त्रयोदशी यानी तेरस की पूजा भगवान शिव को समर्पित है। सप्ताह के सातों दिन में से जिस दिन यह त्रयोदशी पड़ती है, उसे के नाम से यह प्रदोष व्रत जाना जाता है। जैसे बुधवार को यह तिथि पड़ रही है तो यह व्रत बुध प्रदोष व्रत कहा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन सायंकाल व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्त को संकट से बचाते हैं। इसके साथ ही इस व्रत को करने से व्यक्ति सुखी और संतोषी बनता है। इसका व्रत करने से सौ गाय के दान के बराबर फल मिलता है।
बुधवार प्रदोष व्रत तिथिः पंचांग के अनुसार 20 दिसंबर को रात 12 बजे के बाद यानी अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 21 दिसंबर को बुधवार को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी लग रही है। पंचांग के अनुसार पौष माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात 12 बजकर 45 मिनट से शुरू हो रही है और यह तिथि इसी दिन बुधवार रात 10 बजकर 16 मिनट पर संपन्न होगी।
त्रयोदशी के दिन व्रत रखकर शाम को भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दिन बुधवार पड़ रहा है, इसलिए इस तिथि को किए जाने वाले व्रत को बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है।
प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्तः प्रदोष व्रत पूजा शाम को ही की जाती है। पंचांग के अनुसार 21 दिसंबर 2022 को बुध प्रदोष पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 28 मिनट से रात 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा।
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बुध प्रदोष व्रत पूजन विधिः प्रयागराज के आचार्य प्रदीप पाण्डेय बुधवार प्रदोष व्रत के पूजन के लिए यह विधि बताते हैं।
1. प्रदोष व्रत के लिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान का ध्यान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
2. इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।
3. पूजा के समय पूजा स्थल पर मुंह, उत्तर या पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
4. भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें और पुष्प, अक्षत, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, गाय का दूध, धूप अर्पित करें
5. ऊं नमः शिवाय पंचाक्षरीय मंत्र का जाप करना चाहिए।
6. शिव चालीसा का भी पाठ करें
7. इसके बाद आरती करें और पूजा में गलती के लिए क्षमा मांगें।
8. पूजा संपूर्ण होने के बाद सभी को प्रसाद बांटना चाहिए।
व्रत की मान्यताः शिव प्रदोष व्रत के संबंध में मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इस व्रत के प्रभाव से सभी दुखों से छुटकारा मिलता है।
Updated on:
17 Dec 2022 04:27 pm
Published on:
17 Dec 2022 04:22 pm
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