
Ardhnarishwar Bhagwan Shiv
शास्त्रों में सोमवती अमावस्या का बड़ा ही महत्व बताया गया है। यदि सोमवती अमावस्या श्राद्ध पक्ष में आती हो तो यह जीवन के सबसे उत्तम क्षणों में होता है जब व्यक्ति अपने आप पर आने वाली बड़ी से बड़ी समस्या का स्वयं ही समाधान कर सकता है। सोमवार चन्द्रमा को समर्पित है, जिन्हें ज्योतिष में मन का कारक माना जाता है।
निर्णय सिंधु व्यास के वचनानुसार इस दिन मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है। हिन्दु धर्म शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गई है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन पीपल की सेवा, पूजा, परिक्रमा का अति विशेष महत्व है। इस बार सोमवती अमावस्या 12 अक्टूबर को है जोकि श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन भी है, आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ उपाय जिन्हें इस दिन करके हम अपने भाग्य को बदल सकते हैं।
(1) श्राद्ध में आने वाली सोमवती अमावस्या के दिन अपने पितरों के नाम पर दान-पुण्य करना चाहिए। विशेष रूप से गाय, भिखारी तथा छोटे बच्चों को खाना खिलाने से पितृ दोष दूर होते हैं। आने वाले सभी संकट टलते हैं। यदि संभव हो तो उन्हें दक्षिणा भी दान करें।

Published on:
06 Oct 2015 03:03 pm
बड़ी खबरें
View Allधर्म
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
