17 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Ashtami 2026: अष्टमी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ 48 मिनट का यह मुहूर्त, शीघ्र फल दे सकती हैं मां भगवती

Ashtami 2026: महा अष्टमी और नवमी के संधि समय पर पूजा का महत्व, संधि पूजा क्यों होती है? जानें पौराणिक कथा
2 min read
Google source verification

भारत

•

image

deepak deewan

•

Oct 17, 2026

durgaji

माता दुर्गा - Image AI Grok

Ashtami 2026: शारदीय नवरात्रि की अष्‍टमी तिथि पर संधि पूजा का विशेष महत्व है। यह पूजा भगवती द्वारा चंड और मुंड नामक राक्षसों के संहार से संबंधित है। अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के प्रारंभिक 24 मिनट में संधि पूजा की जाती है। इस प्रकार यह करीब 48 मिनट की अवधि की पूजा होती है। दो तिथियों के संधि काल में होने से इसे संधि पूजा कहा जाता है।

संस्कृत में संधि का अर्थ होता है "मिलन" या "संयोग"। संधि पूजा छोटी सी अवधि में की जाती है पर यह शीघ्र फलदायी होती है। मान्यता है कि अष्टमी व नवमी के इस संधि काल में आराधना करने से भगवती बहुत प्रसन्न होती हैं। वे अपने साधकों की मनोकामनाएं पूर्ण कर देती हैं। संधि पूजा के बहुत शुभ फल प्राप्त होते हैं। भगवती उन्हें अपने आशीर्वाद के रूप में आरोग्य, सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि संधि पूजा विशेष फलदाई मानी गई है। दुर्गा अष्टमी पर शीघ्र फल प्राप्ति के लिए संधि काल में हवन पूजा करना चाहिए। इससे माता भगवती की कृपा प्राप्त होती है और वे साधक की मनोकामना शीघ्र पूर्ण करती हैं। महिषासुर राक्षस के साथ जब युद्ध का निर्णायक क्षण आया तो भगवती ने देवी चामुंडा के रूप में अपना सबसे विकराल रूप धारण कर लिया। उन्होंने महिषासुर के शक्तिशाली सेनापतियों- चंड और मुंड का वध कर दिया। इसी समय को संधि काल कहा गया है। चामुंडा देवी को माता दुर्गा के क्रूर रूप में खोपड़ियों की माला पहने दर्शाया जाता है।

108 दीपक का भी विधान

इस दिन माता के सम्मुख 108 दीपक प्रज्जवलित करने का भी विधान है। संधि पूजा में कद्दू काटकर सांकेतिक बलि भी दी जाती है। केला, ककड़ी की बलि का भी विधान है।

धार्मिक के साथ आध्यात्मिक महत्व भी

संधि पूजा का धार्मिक के साथ आध्यात्मिक महत्व भी है। यह दो ऊर्जाओं: शांतिपूर्ण और उग्र, पोषक व विनाशक के मिलन पर केंद्रित है। संधि पूजा बताती है कि दुनिया के पोषण और सुरक्षा के लिए दोनों ऊर्जाएं भी आवश्यक हैं। मां दुर्गा राक्षसों का नाश करने के लिए चामुंडा का रूप धारण करती हैं। इसका तथ्य है कि जीवन की चुनौतियों पर विजय पाने के लिए कभी-कभी अपनी आंतरिक शक्ति का आह्वान भी आवश्यक है।