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जसवंत कौर की आंखों से दो महिलाएं देखेंगी दुनिया

जीएमएच में मरणोपरांत हुआ नेत्रदान, नेत्र विभाग के डॉक्टरों ने किया जरूरतमंदों को नेत्र प्रत्यारोपण

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रीवा

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Dilip Patel

Feb 18, 2018

rewa

jaswant kaur

रीवा। नेत्रदान महादान का कारवां बढ़ रहा है। जिससे जरूरतमंदों को रोशनी नसीब हो रही है। इसी कड़ी में जीएमएच के डॉक्टरों ने शुक्रवार को नेत्रदान के पश्चात दो महिलाओं को नेत्र प्रत्यारोपित किए। यह महिलाएं अब नेत्रदाता जसवंत कौर की आंखों से दुनिया देख सकेंगी।


बोदाबाग निवासी जसवंत कौर का निधन 85 साल की आयु में हुआ। उनके पुत्र जसवीर उप्पल और देवेंद्र उप्पल ने खुशी फाउंडेशन को यह जानकारी दी। जीएमएच के नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों की टीम उनके निवास पहुंची। नेत्र प्रत्यारोपण के लिए भोती गढ़ की रहने वाली लीला सिंह और वीणा निवासी सरस्वती सिंह को पात्र पाया गया। परिजनों की सहमति पर नेत्र विशेषज्ञों ने नेत्र प्रत्यारोपण किया। लीला सिंह का दांयी और सरस्वती सिंह को बांया नेत्र प्रत्यारोपण किया गया। नेत्र प्रत्यारोपण के बाद से दोनों पीडि़तों के परिजनों में खुशी है। दोनों जरूरत मंद 45 साल के ऊपर हैं। इनको लंबे समय से रोशनी की समस्या थी। नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शशि जैन ने कहा कि नेत्रदान होने से राष्ट्रीय अंधतत्व निवारण कार्यक्रम को गति मिल रही है लेकिन नेत्रदान में अभी और भागीदारी की जरूरत है।


इन्होंने भी किए नेत्रदान
उधर गल्ला मंडी निवासी सूरज बाई जैन पत्नी स्व. कोमलचंद जैन की मृत्यु 84 वर्ष की आयु में हो गई। जिन्होंने मरणोपरांत नेत्रदान किया। डॉ. शशि जैन ने बताया कि दो और जरूरतमंदों को बुलाया गया है। नेत्र परीक्षण के बाद रविवार को नेत्र प्रत्यारोपण किया जाएगा। जैन अपने पीछे दो बेटे क ल्याण मल जैन और निर्मल कुमार जैन को छोड़ गए हैं।


दो साल पहले शुरू हुआ सिलसिला
रीवा में 1998 के बाद से नेत्रदान नहीं हो रहे थे दो साल पहले आई बैंक खुलने के बाद खुशी फाउंडेशन ने नेत्रदान के लिए लोगों को प्रेरित करने का जिम्मा उठाया। नेत्रदान का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर थमा नहीं। अभी तक जीएमएच में 30 नेत्रदान हो चुके हैं। 58 लोगों को नेत्र ज्योति प्रदान की जा चुकी है।