6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

motivational story: इस छात्र ने पैरों से लिख दी किस्मत, IAS बनने के लिए निकल पड़ा

कलेक्टर बनने का सपना लिए इस छात्र के बुलंद हैं इरादे...। कलेक्टर सहित कई लोग मदद के लिए आगे आने लगे...।

3 min read
Google source verification

रीवा

image

Manish Geete

Sep 12, 2023

rewa-01.jpg

रीवा का कृष्णकुमार केवट, जो पैरों से लिख रहा है अपनी किस्मत।

एक बच्चे के जन्म से ही दोनों हाथ नहीं है, लेकिन होश संभालने के बाद उसने अपने पैरों को ही हाथ समझकर लिखना शुरू किया। 12वीं में 82 प्रतिशत के साथ उसने टॉप किया। इस होनहार छात्र की जब चर्चा होने लगी तो मदद के लिए भी लोग आगे आने लगे। कलेक्टर ने इस छात्र को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लैपटॉप और यूपीएससी के लिए कई किताबें तक दे दी। इस छात्र का सपना है कि वो एक दिन कलेक्टर बने।

अपने पैरों से लिखकर सफलता प्राप्त करने वाले दिव्यांग छात्र कृष्ण कुमार साकेत अब घर बैठे upsc की ऑनलाइन तैयारी कर सकेगा। मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने छात्र के घर पहुंचकर उसे लैपटॉप दिया और यूपीएससी की तैयारी के लिए किताबें भी दीं। पढ़ाई का सामान मिलने पर अब यह दिव्यांग बेहद खुश है। उसके हौंसले इतने बुलंद है कि उसने भी कहा है कि वो यूपीएससी में जरूर सफल होगा।

मऊगंज में कलेक्टर ने ने कहा था कि ऑनलाइन पढ़ने के लिए जल्द ही वह व्यवस्था करेंगे। साथ ही आश्वासन दिया कि कृष्ण कुमार के जो सपने हैं वह साकार होंगे। कृष्ण कुमार की चाहत कलेक्टर बनने की है। कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि कृष्ण कुमार कलेक्टर बने यह मेरी इच्छा है। मैं समय-समय पर उसकी मदद करता रहूंगा। मऊगंज शहर से तकरीबन 6 किमी दूर हरजई मुड़हान कस्बे के रहने वाले कृष्ण कुमार के दोनों हाथ बचपन से ही नहीं है। मां के कोख में ही दोनों हाथ गल गए थे।

यह भी पढ़ेंः

पैर से अपनी किस्मत लिखने वाले कृष्ण कुमार ने कहा, सपने देखने के साथ आत्मबल मजबूत हो तो सफलता जरूर मिलती है

पैरों से लिखकर दी थी परीक्षा

दिव्यांग छात्र कृष्ण कुमार साकेत के बचपन से दोनों हाथ नहीं हैं। कृष्ण कुमार ने हायर सेकंडरी स्कूल की परीक्षा में पैरों से लिखकर 82 प्रतिशत अंक अर्जित कर सबको चौंका दिया था। इसके बाद कम्प्यूटर के साथ बीए की पढ़ाई की, लेकिन आगे की पढ़ाई गरीबी के चलते प्रभावित हो रही थी। इसकी जानकारी मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव को मिली तो एक सप्ताह पहले छात्र से मिलने उसके घर पहुंचे थे।

कलेक्टर बनने का सपना

दिव्यांग कृष्ण कुमार केवट ने बताया था कि वह कलेक्टर बनना चाहता है लेकिन उसके पास पढ़ने के लिए ना तो किताबें थीं और न ही अन्य पढ़ाई संसाधन है। छात्र की प्रतिभा देखकर कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने आस्वस्त किया था कि वह जल्द ही पढऩे एवं रोजगार की व्यवस्था करेंगे। वादे के मुताबिक 11 सितंबर को कलेक्टर लैपटॉप और गाइड्स एवं किताबें लेकर भाठी सेंगरान पहुंचे।

दिव्यांग की मदद के लिए जुटे हाथ

कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि जैसे ही यह समाचार सुर्खियों में आया कि दिव्यांग कुछ करना चाहता है लेकिन उसके पास संसाधन नहीं है तो इंदौर से हरमीत कौर का उन्हें फोन आया कि वह कृष्ण कुमार को लैपटॉप देकर मदद करना चाहती हैं। जिस पर कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने लैपटॉप देने की सहमति प्रदान की और दो दिन पूर्व ही लैपटॉप कलेक्टर के पास आ गया।

कलेक्टर कार्यालय में नौकरी मिलेगी

कलेक्टर ने कहा कि कृष्ण को आर्थिक सहयोग के लिए उसे कलेक्टर कार्यालय में कंप्यूटर आपरेटर का कार्य दिया जाएगा और उसके परिवार की माली हालत ठीक रहे इसके लिए उन्होंने आजीविका मिशन के अधिकारियों को निर्देश किया कि समूह बनाकर ऋण देने की व्यवस्था करें, जिससे कृष्ण कुमार का छोटा भाई एवं परिवार के अन्य सदस्य अगरबत्ती उद्योग डाल सकें। गौरतलब है कि रीवा में बगैर हाथों के अपने पैरों से लिखकर पढ़ाई करने वाले कृष्ण कुमार के कलेक्टर बनने का सपना कलेक्टर अजय श्रीवास्तव पूरा करना चाहते हैं। मऊ गंज के नवागत कलेक्टर पिछले सप्ताह ही कृष्णकुमार के घर पहुंचे और उसके हौंसले की सराहना की थी और कृष्ण कुमार को जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था।