
Patrika Changemaker campaign, Rewa people thought in the discussion
रीवा। राजनीति की स्वच्छता जरूरी है। अब केवल कहने से काम नहीं चलेगा। बदलाव के लिए कुछ करना भी होगा। पत्रिका समूह ने चेंजमेकर अभियान की शुरुआत कर राजनीति पर टिप्पणी करने वालों को आगे बढक़र बदलाव की दिशा में कार्य करने का मौका दिया है। पत्रिका कार्यालय में आयोजित परिचर्चा के दौरान युवाओं के साथ समाजसेवियों ने कहा कि ....
बदलाव के युग की शुरुआत
राजनीति की गंदगी का सफाया होकर रहेगा। पत्रिका समूह की ओर से की गई चेंजमेकर अभियान की शुरुआत को मैं एक बदलाव के युग की शुरुआत के रूप में देख रहा हूं। अभी तक केवल बातों तक सीमित रही कवायद अब मैदानी हकीकत में बदलेगी।
जानकी प्रसाद पाण्डेय, समाजसेवी।
लोगों को साहस जुटाना होगा
अच्छाई का समर्थन और बुराई का विरोध करने के लिए लोगों को साहस जुटाना होगा। मैं संगठन के जरिए इस कार्य में लग गया हूं। लेकिन अब पत्रिका का साथ मिलेगा तो हौसला और बुलंद होगा। अपने सहयोगियों के साथ बदलाव के लिए बड़ा प्रयास करेंगे।
देवेंद्र सिंह, संगठन पदाधिकारी।
सबको अपने घर से शुरुआत करनी होगी
लोगों में नैतिकता व कर्तव्यपरायणता का संचार करना होगा। जब तक लोगों को अपने कर्तव्यों का बोध नहीं होगा। राजनीति में ही नहीं कहीं भी स्वच्छता नहीं रहेगी। हम सबको अपने घर से शुरुआत करनी होगी। शुरुआत हुई तो धीरे-धीरे ही सही बदलाव जरूर होगा।
नम्रता सिंह, छात्रा।
युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना होगा
राजनीति में युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना होगा। पत्रिका के चेंजमेकर अभियान के जरिए यह संभव है। चेंजमेकर के रूप में जिनकी ओर से आवेदन किया गया है। उनमें से युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। क्योंकि युवाओं के जरिए ही बदलाव संभव है।
सरोजनी साकेत, छात्रा।
मेधावी छात्र राजनीति में नहीं आते
युवाओं में जो मेधावी होते हैं। वह इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस व पीसीएस बनना चाहते हैं। राजनीति में गंदगी के चलते मेधावी छात्र राजनीति में नहीं आते हैं। जो आना भी चाहते हैं, उनके घर वाले इस नापसंद कर देते हैं। राजनीति युवाओं के आने के बाद ही स्वच्छ होगी।
गंगा चौधरी, छात्रा।
छात्रों के लिए राजनीति में जगह नहीं
राजनीति की पूरी दिशा ही बदल गई है। जो कुछ हम लोगों ने किताबों में पढ़ा है। स्थिति उससे बिल्कुल विपरीत है। छात्राओं की बात छोडि़ए छात्रों के लिए राजनीति में जगह नहीं है। पूरी की पूरी प्रक्रिया ही बदलना पड़ेगा। मौका मिला तो जरूर ही कुछ करना चाहूंगी।
रोशनी सिंह, छात्रा।
राजनेताओं का चयन भी परीक्षा के जरिए हो
राजनीति से धनबल व बाहुबल का हटाना होगा। इसके लिए सबसे बेहतर तरीका शैक्षणिक योग्यता व चयन प्रणाली में परिवर्तन करना होगा। प्रशासकीय सेवाओं की तरह की राजनेताओं का चयन भी परीक्षा के जरिए होना चाहिए। पत्रिका की शुरुआत बड़े बदलाव का संकेत है।
संजय सिंह, समाजसेवी।
Published on:
12 Apr 2018 12:24 pm
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