
Poisoned in front of the collector office
रीवा. न्याय के लिए कई दिनों से भटक रहा युवक मायूस होकर कलेक्टर की चौखट पर सोमवार दोपहर जहरीला पदार्थ गटक लिया। मजूदर भानू प्रताप आदिवासी द्वारा उठाए गए इस कदम की सूचना से कलेक्ट्रेट में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान कलेक्टर प्रीति मैथिल टीएल बैठक में थीं। कलेक्टर ने फैरन पीडि़त को अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उसे संजय गांधी अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है। पूरे मामले में कलेक्टर ने जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट तलब की है।
20 मार्च को दबंगों ने ढहा दिया मकान
जिले के जवा तहसील के महिलो-447 गांव निवासी भानू प्रताप आदिवासी का परिवार लंबे समय से सरकारी जमीन पर कच्चा मकान बनाकर रह रहा है। 20 मार्च को दबंगों ने मकान ढहा दिया। भानू ने अधिकारियों को आवेदन देकर गांव के ही राकेश प्रसाद त्रिपाठी, सुशील सोनी, संदीप सोनी आदि पर मकान ढहाए जाने और जमीन खाली करने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया है। भानू के अनुसार सीएम हेल्पलाइन, तहसील, थाना और दो बार कलेक्टर से मिलकर न्याय की गुहार लगाया। इसके बाद भी आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होने के बाद सोमवार 11 बजे वह कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। इस दौरार कलेक्टर टीएल बैठक में थीं।
दो बार गेट पर कलेक्टर से मिलने के लिए पहुंचा
दो बार गेट पर कलेक्टर से मिलने के लिए पहुंचा। लेकिन चपरासी ने यह कह कर लौटा दिया कि मैडम अभी मीटिंग में हैं, कुछ देर बाद आओ। तीसरी बार आवेदन लेकर गया तो चापरासी ने कहा आवेदन देकर जाओ हम मैडम को दे देंगे। कलेक्टर से नहीं मिल पाने पर मायूस भानू परिसर में ही कोई जरीला पदार्थ गटक गया। कुछ ही देर में भानू खांसी के साथ उल्टियां करने लगा। इसकी सूचना से परिसर में अफसरा-तफरी मच गई। कुछ कर्मचारियों ने इसकी जानकारी फौरन कलेक्टर को दी। कलेक्टर ने एसडीएम हुजूर को भेज कर पीडि़त को अस्पाल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल ने संजय गांधी में रेफर कर दिया। जहां आईसीयू में इलाज चल रहा है। हालांकि चिकित्सों ने बताया कि भानू खतरे से बाहर है।
15 दिन से अफसरों से लगा रहा न्याय की गुहार
पीडि़त पिछले 15 दिनों से अफसरों से न्याय की गुहार लगा रहा है। बीते 20 मार्च को मकान ढहाए जाने के बाद तहसीलदार से लेकर जिला मुख्यालय पर कार्रवाई के लिए आवेदन दिया, लेकिन कुछ नहीं हुआ, जिससे मायूस होकर उसने यह घातक कदम उठा लिया।
खुले आसमान के नीचे परिवार
मकान ढहाए जाने के बाद पीडि़त परिवार खुले आसमान के नीचे रह रहा है। बार-बार आवेदन के बाद भी जिम्मेदार लापरवाह बने हैं। पीडि़त के अनुसार पट्टे की भूमि पर करीब 70 साल से उसके पूर्वज मकान बनाकर रह रहे हैं। भानू मजदूरी कर तीन बच्चों और पत्नी को पाल रहा है। पीडि़त ने बताया कि सरकारी जमीन पर पट्टा दिए जाने का आवेदन किया है। लेकिन आज तक पट्टा नहीं दिया गया।
एसडीएम कोर्ट के आदेश पर ढहाया गया आवास
जवा तहसीलदार सीएल सोनी का कहना है कि भानू आदिवासी के भूमि के विवाद का मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा था। वर्ष 2014 में तत्कालीन तहसीलदार में केस का दायरा हुआ था। जिसका 2018 में निर्णय आया। एसडीएम कोर्ट के द्वारा हटाए जाने का आदेश दिया गया था। बारिश और ठंड के कारण अतिक्रमण नहीं हटाया गया। तहसीलदार ने बताया कि भानू के पास 4 डिसमिल भूमि है। अतिक्रमण यह कह कर हटाया गया था कि निजी भूमि पर मकान बना लो, जनपद कार्यालय से आवास योजना का लाभ मिल जाएगा।
आधी शीशी पी लिया चूहामार दवा
संजय गांधी अस्पताल के चिक्तिसकों के अनुसार युवक ने करीब आधी शीशी चूहामार दवा पी लिया है। इलाज के बाद पीडि़त की हालत में सुधार है। सूत्रों के अनुसार १२ बजे की घटना लेकिन है, लेकिन पीडि़त को करीब 3 बजे अस्पताल लाया गया।
वर्जन...
टीएल बैठक में थी, सूचना मिलने पर पीडि़त को अस्पताल भेजा गया। प्रथम दृष्ट्या किसी निजी व्यक्ति के भूमि पर अतिक्रमण का मामला समाने आया है। पीडि़त पात्रता श्रेणी में आता है तो आवास का लाभ दिया जाएगा।
प्रीति मैथिल, कलेक्टर
Published on:
10 Apr 2018 12:59 pm
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