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एमपी का यह फल है लाजवाब, देश में ही नहीं विदेशों में भी लोग हैं इसके दीवाने, स्वाद चखने बस कुछ दिन हैं आपके पास, बढ़ाता है सैक्स पॉवर

मैंगो डे पर विशेष...

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रीवा

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Ajit Shukla

Jul 21, 2018

Sundarja mango is produced in Rewa of MP, it increases sex power

Sundarja mango is produced in Rewa of MP, it increases sex power

रीवा। बात फलों के राजा आम की हो और गोंविदगढ़ के सुंदरजा आम की चर्चा न आए तो समझो बात अभी अधूरी है। आखिर आम की सुंदरजा किस्म की गुणवत्ता ही ऐसी है। सुगंध व स्वाद के लिए सुंदरजा की पहचान गोविंदगढ़ के बाग से बनी है। यह पहचान आगे भी बनी रहे, इसके लिए उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से लेकर कृषि वैज्ञानिकों तक की टीम कोशिश में लगी है लेकिन सफलता मिलना मुश्किल पड़ रहा है। सुंदरजा सैक्स पॉवर बढ़ाने के लिए जाना जाता है। पूर्व में राजघराने के महाराजा इसे खासतौर पर पसंद किया करते थे।

स्वाद व सुगंध में नायाब है सुंदरजा
देश-विदेश में मशहूर हो चुके सुंदरजा की उपज दिन ब दिन कम होती जा रही है। वजह लगातार पेड़ों की घटती संख्या और नए पेड़ों का तैयार नहीं हो पाना है। पूर्व पेड़ों की तुलना में अब के पेड़ों में लगने वाले आम के फलों की सुगंध व स्वाद में अंतर आना भी अधिकारियों की समझ से परे साबित हो रहा है। वैज्ञानिक इसे गोविंदगढ़ की मिट्टी का कमाल मान रहे हैं।

केवल गोविंदगढ़ के आम में रहता स्वाद
सुगंध और स्वाद के दम पर सुंदरजा आम की पहचान गोविंदगढ़ के किला परिसर में स्थित बागान से बनी। किस्म के प्रसार के उद्देश्य से कुठुलिया के बाग में भी सुंदरजा के कलम लगाए गए। कुछ पौधे तैयार तो हुए लेकिन उनमें वह सुगंध व स्वाद नहीं, जो गोविंदगढ़ बाग के पेड़ों के फल में होते हैं। देखने मात्र से दोनों जगह के आम की पहचान हो जाती है। गोविंदगढ़ के बाग का सुंदरजा हल्की सफेदी लिए होता है, जबकि कुठुलिया बाग के सुंदरजा आम में हरापन ज्यादा होता है।

गोविंदगढ़ की मिट्टी में है कुछ खास
कलम के जरिए अब तक कई पौधों का रोपण करा चुके उद्यानिकी विभाग के अधिकारी व कृषि वैज्ञानिक भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि उनकी ओर से कलम व बीज के जरिए तैयार किए गए सुंदरजा किस्म के आमों में वह गुणवत्ता नहीं मिल रहा है, जो गोविंदगढ़ के बाग के आमों में है। अधिकारी व वैज्ञानिक दोनों इसे गोविंदगढ़ की मिट्टी का कमाल मान रहे हैं, क्योंकि दूसरे क्षेत्रों में तैयार पौधों के फलों में न ही वह सुंगध व स्वाद है और न ही वह साइज है।

patrika IMAGE CREDIT: Patrika

लगातार जारी है प्रयोग और प्रयास
सुंदरजा किस्म के प्रसार को लेकर उद्यानिकी विभाग की ओर से प्रयास लगातार जारी है। विभाग की ओर से सुंदरजा के कलम और बीज के जरिए पौधे तैयार करने के लिए विशेष रूप से कोशिश की जा रही है। गोविंदगढ़ व कुठुलिया के अलावा जिले के दूसरे क्षेत्रों में सुंदरजा के पौधे रोपे जा रहे हैं लेकिन उन्हें तैयार कर पाना चुनौतीभरा साबित हो रहा है। वजह जो भी हो, हकीकत यही है कि प्रतिवर्ष सैकड़ों पौधों का रोपण किया जाता है लेकिन तैयार होने वाले पौधे गिनती हैं।

पहले थी महाराजाओं की पसंद, अब विदेशों तक पहुंच
गोविंदगढ़ के किला परिसर में तैयार आम का बाग व सुंदरजा के पौधे राजघराने की देन है। सुंदरजा किस्म का आम महाराजाओं की खास पसंद में शामिल रहा है। अब इसकी मांग विदेशों तक में है। सुंदरजा के थोक विक्रेता संतोष कुमार गुप्ता की माने तो आम की सप्लाई फ्रांस जैसे कई दूसरे देशों तक होती है। इसके अलावा दिल्ली, छत्तीसगढ़ व गुजरात के कई व्यापारी एडवांक बुकिंग करा लेते हैं।

400 रुपए किलो तक बिका सुंदरजा
विक्रेता के मुताबिक, इस बार सुंदरजा का उत्पादन गोविंदगढ़ बाग से 250 क्विंटल हुआ है, जो गत वर्षों की तुलना में कम है। रही बात बिक्री की तो अंत में यह आम 400 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिका है। हालांकि सुंदरजा के अलावा गोविंदगढ़ के फजली, आम्रपाल, राजदरबार, कोहिनूर व मल्लिका जैसे दूसरे किस्म के आमों की जबरदस्त मांग है।

फैक्ट फाइल
400 ग्राम से अधिक वजन का होता है एक फल
400 रुपए प्रति किलोग्राम तक अब की बिका सुंदरजा
250 क्विंटल अब की बार का रहा है उत्पादन

वर्जन-
सुंदरजा के पौधे तैयार तो हो रहे हैं। लेकिन स्थान बदलने के बाद स्वाद, सुगंध व साइज में अंतर आ जा रहा है। दूसरे स्थानों पर रोग भी बहुत लग रहे हैं। कुठुलिया में स्थापित अनुसंधान केंद्र में इस लगातार कार्य हो रहा है कि कारणों को समझ कर दूसरे स्थानों में भी सुंदरजा की उसी गुणवत्ता के साथ उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
गिरीश तिवारी, सहायक संचालक उद्यानिकी रीवा।