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मध्य प्रदेश में हाइवे पर पांच रुपए दो और बॉटल लेकर खुले में जाओ शौच

स्वच्छता की हकीकत...शर्मशार हो रहे शौचालय नहीं होने से परेशान यात्री, ‘खुले में शौच’ की खुली छूट

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रीवा

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Rajesh Patel

Oct 08, 2017

rewa

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रीवा. अरे...भइया शौचालय किधर है? यहां शौचालय नहीं है। टंकी के पास बाटल में पानी भरा है, मेरे पास पांच रुपए जमा करिए और शौच के लिए पीछे चले जाइए...। हम बात कर रहे हैं रीवा-इलाहाबाद हाइवे पर स्थित सोहागी पहाड़ के आस-पास बने ढाबों की। जहां ढाबा संचालक खुले में शौच के लिए पांच रुपए वसूल रहे हंै। हाइवे पर बने ज्यादातर ढाबे शौचालय विहीन हंै।

शर्मशार हो रहे शौचालय नहीं होने से परेशान यात्री

सुबह 7.15 बजे नागपुर से इलाहाबाद जा रही बस सोहागी पहाड़ के निकट रुकी। कई यात्री ढाबे पर पहुंचे और ढाबा संचालक से शौचालय के बारे में पूछा। जवाब मिला शौचालय नहीं बना है। मेरे पास पांच रुपए जमा करो और टंकी के पास बाटल में पानी भरकर चले जाओ, चारो ओर खुला है। हाइवे पर शौचालय नहीं, यात्री परेशान सौ से अधिक यात्रियों को खुले में शौच करने के लिए पांच रुपए कीमत चुकानी पड़ी।

नागपुर से इलाहाबाद घर लौट रहे यात्री पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि ज्यादातर ढाबे पर शौचालय की व्यवस्था नहीं है। दो माह में तीन बार इलाहाबाद-नागपुर आना जाना होता है, लेकिन खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। जिले के हाइवे से उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित अन्य राज्यों के यात्रियों का रोज आना जाना रहता है। शौचालय के लिए हर रोज यात्री हाइवे पर भटक रहे हैं।

रीवा से छिंदवाड़ा तक 174 ढाबा, 129 में शौचालय नहीं
समाजसेवी विजय मिश्र रीवा से छिंदवाड़ा तक बाइक से भ्रमण किया। इस दौरान १७५ ढाबे मिले। ज्यादातर पर शौचालय नहीं मिला। समाजसेवी ने कलेक्टर सहित पुलिस महानिदेशक को भेजे पत्र में बताया है कि रीवा से छिंदवाड़ा तक 129 ढाबों पर शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है।

46 ढाबों पर शौचालय बने हैं, लेकिन गंदगी का अंबार है। रीवा से मैहर तक कुल ३५ ढाबे हैं, २७ में शौचालय नहीं है। मैहर से कटनी तक ४४ ढाबों में ३२में शौचालय नहीं हैं। कटनी से जबलपुर 46 में 39 ढाबों पर शौचालय नहीं हैं। जबलपुर से लखनादौन तक 24 ढाबों में से 16 में शौचालय नहीं। लखनादौन से छिंदवाड़ा तक 24 ढाबों में 13 में शौचालय नहीं है।

200 करोड़ खर्च फिर भी खुले में शौच
जिले को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ)बनाने के लिए दो साल में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा की प्रोत्साहन राशि खर्च हो चुकी है। इसके बावजूद ओडीएफ नहीं हो सका। घर-घर शौचालय निर्माण के लिए प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। जागरुकता के लिए गांव-मोहल्ले में प्रेरक नियुक्त किए गए हैं। अभी २६ हजार शौचालय का निर्माण अधूरा है।