
This action of yoga takes 24 hours fresh, know about it
रीवा। कैंसर की बीमारी से हताश होकर योग का सहारा लिया, जिसने नया जीवन दिया तो अब उसी योग विद्या को दुनिया भर में फैलाने का संकल्प लेकर साध्वी यमुनापुरी निकल पड़ी हैं। इटली में जन्मी रेनाटा सेटिना कोरेन जो अब साध्वी यमुनापुरी बन चुकी हैं। वह योग की ऐसी क्रिया लोगों को सिखा रही हैं, जिससे बिना नींद के भी हर समय मन और शरीर तरोताजा रहता है।
'पत्रिका से चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि 22 की उम्र में कैंसर हो गया था। उस दौरान जीवन हताशा से भरा था। युनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में किताब पढऩे गई तो पहली किताब योगा की हाथ लगी। उस दौरान सोचा की अस्पताल में मरने से बेहतर है प्राकृतिक मौत मिले। छह महीने तक लगातार योगा किया, धीरे-धीरे कैंसर से राहत मिलने लगी और स्थिति ऐसी बनी कि पूरी तरह से निरोगी हो गई। तब से योगा की शिक्षा देने लगी।
महेश्वरानंद ने जोड़ा योग से
आस्ट्रिया में भारत से गए स्वामी महेश्वरानंद पुरी से दीक्षा ली और उन्होंने नया नाम यमुनापुरी दिया। तब से योगा इन डेली लाइफ के नाम से दुनिया भर के देशों में 10 हजार योग सेंटर खोल दिया है। साध्वी यमुनापुरी का कहना है कि योग आत्मा का विज्ञान है, इसे समझने के लिए पूरा जीवन समाप्त हो सकता है लेकिन इसका अंत नहीं मिल सकता। उन्होंने कहा कि भारत में शदियों पहले योग का अस्तित्व था। दुनिया के दूसरे हिस्सों में 40 साल पहले तक योग का अधिक प्रभाव नहीं था। अब यह तेजी के साथ बढ़ रहा है। स्पेन और क्यूबा से आए दल ने पर्यटन विभाग के फूडक्राफ्ट इंस्टीट्यूट का भी निरीक्षण किया। यहां के व्यंजनों के बारे में जानकारी ली।
निद्रा योग दूर करता है शरीर की थकान
साध्वी यमुनापुरी का दावा है कि वह महज डेढ़ से दो घंटे ही सोती हैं लेकिन निद्रा योग के चलते आठ से दस घंटे तक सोने के बाद मिलने वाले आराम की अनुभूति करती हैं। उनका कहना है कि पूरा जीवन अब योग के लिए ही समर्पित कर दिया है।
ताजमहल भारत की पहचान नहीं
साध्वी का कहना है कि भारत की पहचान कुछ स्थानों पर ताजमहल के नाम पर होती है लेकिन मैं ऐसा नहीं मानती। यह केवल किसी की याद में बनाई गई खूबसूरत बिल्डिंग है। भारत की पहचान योगा, यहां की संस्कृति से होती है।
ह्वाइट टाइगर सफारी देख कहा और संसाधनों की जरूरत
यमुना पुरी सहित उनकी टीम दुनिया के अकेले ह्वाइट टाइगर सफारी मुकुंदपुर में रखे गए सफेद बाघों को देखने भी पहुंची। स्पेन और क्यूबा से आए पर्यटकों ने चिडिय़ाघर और ह्वाइट टाइगर सफारी में जानवरों को देखा। यहां का प्राकृतिक वातावरण देख पर्यटक आकर्षित हुए। साथ ही कहा है कि जो संसाधन उपलब्ध हैं अभी उसके आगे भी जाकर काम करने की जरूरत है। स्पेन के पर्यटक रफेल जोसेफ, रेनाटा सेटिना, ईटलबोस, मिरेआ लोपेज राफेल, हर्नांडेज परेज, बेरिको पेरेज, क्यूबा की मोंटसेर्राइ, सीइउरा फोंट, हेनरी गुजमान, सर्मिएंटो रोजा आदि ने कहा कि उन्हें पता चला है कि ह्वाइट टाइगर इसी क्षेत्र में सबसे पहले पाया गया था। बाघ को उसके मूल स्थान पर देखने का अच्छा अनुभव रहा है। चिडिय़ाघर के विजिटर बुक में भी पर्यटकों ने इस बात का उल्लेख किया है। साथ ही कहा है कि जानवरों के रखरखाव में कमियों के चलते बाघिन के मौत की खबर भी मिली जो दु:खद है। आगे से और भी व्यवस्थाएं की जाएं।

Published on:
17 Feb 2018 05:15 am
