
navratri 2017- maa durga unique make up by soil
सागर. शहर में जगह-जगह नवरात्रि की तैयारियां तेज हो गई हैं। मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम आकार देने में लगे हैं। 21 सितंबर से शुरू हो रहे नवरात्र के लिए कुछ स्थानीय मूर्तिकार प्रतिमाएं बना रहे हैं तो कोलकाता, यूपी से भी कलाकार आए हैं। काली बाड़ी में विराजमान होने वाली प्रतिमाओं और पंडाल को बंगाली कलाकार तैयार कर रहे हैं। कोलकाता के मूर्तिकार एससी पाल 36 साल से यहां मूर्ति बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी प्रतिमा 8 से 9 फीट की है। सागर शहर में तीनबत्ती पर इस वर्ष अजंता आर्ट के तहत मैया की स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसमें खास यह है कि पूरा शृंगार हाथ से किया जा रहा है। इसमें मशीन आदि का कोई रोल नहीं है। इससे प्रतिमा मानो सजीव दिखेगी। माता के वस्त्रों को भी मिट्टी से ही आकार दिया जा रहा है। मिट्टी के ही तरह-तरह के आभूषण भी हैं। इनमें स्वर्ण, मोती, माणिक्य, रत्नों आदि का समावेश करने के लिए प्राकृतिक रंगों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रतिमा लगभग आकार ले चुकी है।
कोलकाता से आया सामान
प्रतिमा बनाने वाले कलाकार मां के शृंगार का सामान कोलकाता से बुलाते हैं। यही नहीं मां के स्वरूप को सुंदर बनाने के लिए कलर भी कोलकाता से ही खासतौर पर मंगाए गए हैं।
जबलपुर तक जा रहीं प्रतिमाएं
सागर से तैयार होकर प्रतिमाएं जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा दमोह, जबलपुर, अशोकनगर, गुना, टीकमगढ़, छतरपुर आदि स्थानों पर भी जा रही हैं। कलाकार अंकित विश्वकर्मा ने बताया कि प्रतिमा पर बारीकी से किए गए काम को लोग पसंद करते हैं। हम जून से तैयारी करने लगते हैं, क्योंकि विशेष प्रकार की मिट्टी तैयार करने में मेहनत करनी पड़ती है। शहर के अलावा विभिन्न स्थानों पर जाने वाली प्रतिमाएं पहले से ही बुक करा ली जाती हंै। 16 फीट की प्रतिमा यहां से जबलपुर जा रही है।
Published on:
11 Sept 2017 10:58 pm
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