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कैराना उपचुनाव से पहले जेल से बाहर आने का भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर का सपना हुआ चकनाचूर

भीम आर्मी सेना के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की रासुका की अवधि 3 माह और बढ़ाई गई

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Saharanpur

सहारनपुर. सहारनपुर में भड़की जातीय हिंसा के मुख्य आरोपी और भीम आर्मी सेना के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण पर लगी रासुका की अवधि को 3 माह के लिए और बढ़ा दिया गया है। बता दें कि चंद्रशेखर उर्फ रावण कैराना उपचुनाव से पहले जेल से बाहर निकलने की सोच रहा था। उसे उम्मीद थी कि इस बार रासुका की जमानत वाली सुनवाई पर उसकी अर्जी स्वीकृत हो जाएगी और अदालत से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। रासुका अवधि की सुनवाई के दौरान रासुका को 3 माह के लिए और बढ़ा दिया गया। अदालत की इस कार्रवाई से एक बार फिर भीम आर्मी को तगड़ा झटका लगा है।

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सहारनपुर में जातीय हिंसा की आग में जलने के बाद सहारनपुर पुलिस प्रशासन की ओर से 4 नवंबर को चन्द्रशेखर पर रासुका की कार्रवाई की गई थी। इस दिन सहारनपुर पुलिस प्रशासन ने चन्द्रशेखर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्ध कर दिया था। 9 मई 2017 को सहारनपुर में जातीय हिंसा की आग भड़क उठी थी और इस घटना को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से भीम आर्मी के कई पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे। इसके बाद चंद्रशेखर उर्फ रावण फरार हो गया था और 8 जून को सहारनपुर पुलिस और एसटीएफ की टीम ने हिमाचल के डलहौजी से चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया था। 8 जून से ही चंद्रशेखर सहारनपुर जिला जेल में बंद है।

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ज्ञात हो कि नवंबर में रावण को सभी मामलों में कोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन पुलिस ने इसके खिलाफ रासुका की कार्रवाई कर दी थी। यही कारण है कि सभी मामलों में जमानत मिल जाने के बाद भी आज तक भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण जेल से बाहर नहीं आ सका है। बता दें कि रासुका पर प्रत्येक 3 माह बाद न्यायालय में सुनवाई होती है, पिछली 12 जनवरी माह में रासुका पर सुनवाई हुई थी और उस दौरान अदालत ने 3 माह के लिए फिर से रासुका को बढ़ाते हुए जमानत की याचिका खारिज कर दी थी। अब एक मई को एक बार फिर से रासुका पर सुनवाई थी और जमानत की याचिका चंद्रशेखर उर्फ रावण के वकील की ओर से दाखिल की गई थी, लेकिन अदालत ने फिर से जमानत की याचिका को रद्द करते हुए चंद्रशेखर उर्फ रावण की रासुका अवधि को 3 माह के लिए बढ़ा दिया है।

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