
‘चवन्नी’ पर चारू का पलटवार (photo- x @BhagsinghKanbar)
Charu Chaudhary Biography: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों चवन्नी बनाम चौधराहट की चर्चा तेज है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के जयंत चौधरी पर किए गए ‘चवन्नी से रुपया’ वाले तंज के बाद अब राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की ओर से जवाबी हमला देखने को मिल रहा है। इस बार मोर्चा खुद जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी ने संभाला।
सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में गुरुवार को हुई RLD की स्वाभिमान रैली में चारू चौधरी ने मंच से कहा, “चौधराहट में मेरा ब्याह हुआ है और इस परिवार पर मुझे गर्व है, जयंत पर गर्व है।” उन्होंने कहा कि किसी को भी किसी का अपमान करने का अधिकार नहीं है। चारू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिमी यूपी में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच जुबानी जंग ने सियासी रंग पकड़ लिया है।
चारू चौधरी का भाषण भले ही छोटा रहा, लेकिन उसका राजनीतिक संदेश काफी बड़ा माना जा रहा है। उन्होंने अपने बयान को सिर्फ जयंत चौधरी के सम्मान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ‘स्वाभिमान’ और ‘चौधराहट’ जैसे शब्दों के जरिए RLD के पारंपरिक सामाजिक आधार को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आते-जाते रहते हैं और जीत-हार से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन उनका परिवार हमेशा समाज के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने लोगों से अपने मंच को मजबूत रखने की अपील भी की। दरअसल, अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया’ वाले बयान को लेकर जयंत चौधरी पहले ही आपत्ति जता चुके हैं। मायावती भी इस बयान को लेकर अखिलेश पर निशाना साध चुकी हैं। ऐसे में चारू की रैली में हुई एंट्री ने इस विवाद को एक नया पारिवारिक और सामाजिक रंग दे दिया।
चारू चौधरी की पहचान सिर्फ RLD अध्यक्ष जयंत चौधरी की पत्नी के तौर पर नहीं है। वह पेशे से फैशन डिजाइनर हैं और राजनीति में भी उनकी दिलचस्पी रही है। जयंत और चारू की शादी वर्ष 2003 में हुई थी। उन्होंने दिल्ली के Jewellery Product Development Centre से पढ़ाई की और Gemological Institute of America से भी शिक्षा हासिल की है। चारू लंबे समय तक राजनीति में पर्दे के पीछे से भूमिका निभाती रही हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर वह RLD के चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आती रही हैं। उनके ससुर और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत चौधरी अजीत सिंह ने भी उन्हें पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल किया था।
चारू चौधरी RLD के चुनावी अभियानों में जयंत के साथ दिखाई देती रही हैं। वह पार्टी की रैलियों और कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं, लेकिन आमतौर पर उनकी भूमिका ज्यादा मुखर राजनीतिक बयानबाजी वाली नहीं रही है। यही वजह है कि सहारनपुर की रैली में उनका खुलकर बोलना खास चर्चा में आया। इस बार वह अकेली नहीं थीं। रैली में उनकी बेटियां साहिरा और एलिशा भी मौजूद थीं। परिवार की इस मौजूदगी को RLD के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा गया।
चारू चौधरी की दिलचस्पी राजनीति के साथ-साथ शेयर बाजार में भी बताई जाती है। वर्ष 2014 के जयंत चौधरी के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके नाम पर शेयर बाजार में करीब 85 लाख रुपये का निवेश, करीब 95 लाख रुपये की कृषि भूमि, 1.85 करोड़ रुपये की कमर्शियल बिल्डिंग और लगभग 27 लाख रुपये की ज्वेलरी दर्ज थी।
सहारनपुर की रैली ऐसे समय हुई है जब UP Election 2027 की तैयारी तेज हो चुकी है। पश्चिमी यूपी में RLD अपना प्रभाव मजबूत करने की कोशिश कर रही है और जाट राजनीति के साथ दूसरे सामाजिक समीकरणों पर भी फोकस कर रही है। ‘चवन्नी’ विवाद के बाद ‘स्वाभिमान’ को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर सामने रखना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यानी चारू चौधरी का मंच से उतरना महज पति के समर्थन का बयान नहीं था। इसे जयंत चौधरी के राजनीतिक सम्मान, चौधरी परिवार की विरासत और पश्चिमी यूपी के सामाजिक समीकरणों को एक साथ साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, रैली में जयंत चौधरी ने भी अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि वह किसी को दुश्मन नहीं बनाना चाहते, लेकिन सामने से बार-बार बयान आने पर जवाब देना पड़ता है।
Updated on:
04 Sept 2026 01:06 pm
Published on:
04 Sept 2026 01:06 pm
