
सहारनपुर में अखिलेश की नई रणनीति photo- x DrRana777)
Imran Masood vs Akhilesh Yadav: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी पश्चिमी यूपी में अपने सामाजिक समीकरण को मजबूत करने में जुटी है। इसी कड़ी में अखिलेश यादव का सहारनपुर दौरा खास चर्चा में है। वजह यह रही कि उन्होंने जिले में अलग-अलग समुदायों और खासकर मुस्लिम समाज से जुड़े कई नेताओं के घर पहुंचकर मुलाकात की। इसे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की सियासी पकड़ के बीच सपा की अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर फिलहाल साथ चलने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन सहारनपुर में दोनों दलों के स्थानीय नेताओं के बीच तल्खी कई बार सामने आ चुकी है। इमरान मसूद लगातार सीट बंटवारे में कांग्रेस को ज्यादा हिस्सेदारी देने की बात उठाते रहे हैं। वह सपा नेतृत्व और अखिलेश यादव पर मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सवाल खड़े करते रहे हैं। हाल ही में सहारनपुर की दिशा बैठक में उनकी सपा विधायक आशु मलिक से तीखी बहस भी सुर्खियों में रही थी। हालांकि दोनों नेताओं ने बाद में इसे सामान्य बहस बताया।
ऐसे माहौल के बीच अखिलेश यादव जब सहारनपुर पहुंचे तो उनका कार्यक्रम केवल पार्टी कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अलग-अलग प्रभाव रखने वाले नेताओं से मुलाकात की। अखिलेश यादव सपा नेता चौधरी रुद्रसैन के आवास पहुंचे और वहां भोजन किया। इसके बाद वह पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के घर चाय पीने पहुंचे। इन मुलाकातों को पश्चिमी यूपी में सपा के सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यानी एक तरफ उन्होंने हिंदू, किसान और पिछड़े वर्ग के प्रभावशाली चेहरे से संपर्क साधा तो दूसरी तरफ मुस्लिम समाज के प्रमुख नेताओं के घर जाकर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। सपा की राजनीति में यह सामाजिक संतुलन 2027 के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू इमरान मसूद के परिवार से जुड़ा है। उनके दामाद शायान मसूद हाल ही में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए हैं। उन्हें अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलाई गई थी। इस घटनाक्रम को लेकर भी सहारनपुर की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं हुईं। इसके बाद सहारनपुर दौरे में अखिलेश यादव का शायान मसूद को अपने साथ रखना और दूसरे स्थानीय मुस्लिम नेताओं को भी महत्व देना सपा की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सहारनपुर की राजनीति में इमरान मसूद लंबे समय से मुस्लिम समाज के बड़े राजनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का अलग-अलग मुस्लिम नेताओं से सीधे संपर्क बढ़ाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सपा किसी एक चेहरे के भरोसे अपना मुस्लिम राजनीतिक आधार नहीं छोड़ना चाहती। इसी क्रम में सपा विधायक आशु मलिक भी अखिलेश के साथ नजर आए। दिलचस्प बात यह है कि हाल में इन्हीं आशु मलिक और इमरान मसूद के बीच दिशा बैठक में बहस हुई थी। अब दोनों के बीच सियासी दूरी की चर्चा के बीच अखिलेश का आशु मलिक के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आना भी अलग संदेश देता है।
अखिलेश यादव के इस दौरे को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं है। सहारनपुर में सात विधानसभा सीटें हैं और यहां सपा अपने संगठन के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों को भी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अखिलेश का एक ही दौरे में अलग-अलग जातीय और सामाजिक प्रभाव वाले नेताओं के घर पहुंचना महज शिष्टाचार मुलाकात नहीं माना जा रहा। इसे 2027 के लिए सपा के अपने नेतृत्व और वोट आधार को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, इमरान मसूद लगातार कांग्रेस के लिए उचित सीट हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर का यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में सपा-कांग्रेस गठबंधन के भीतर स्थानीय स्तर पर रिश्तों और सीटों के समीकरण को और दिलचस्प बना सकता है।
Updated on:
03 Sept 2026 04:47 pm
Published on:
03 Sept 2026 04:47 pm
