
CM Yogi Adityanath
सहारनपुर. शासन के निर्देश पर कराई गई जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि सहारनपुर में बड़ी संख्या में फर्जी मदरसे चल रहे थे। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद इन मदरसों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और रिकवरी की तैयारी शुरू हो गई है। अभी अन्य मदरसों की जांच होनी बाकी है। इससे पहले ही जिले में एक कथित मेडिकल कॉलेज से फर्जी डिग्री और डिप्लोमा दिए जाने का मामला सामने आ गया है। देहरादून रोड स्थित इस मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली छात्रा ने राज्य सरकार से शिकायत की थी कि उसे मेडिकल कॉलेज से फर्जी डिग्री दी गई है। इस शिकायत को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अब देखना यह है कि जांच के दौरान छात्रा की शिकायत कितनी सही निकलती है। यदि छात्रा की शिकायत सही पाई गई और मेडिकल कॉलेज से फर्जी डिप्लोमा और डिग्री छात्रों को दी गई है तो इस मेडिकल कॉलेज की मान्यता को भी रद्द किया जा सकता है।
जांच में देरी पर भी उठ रहे सवाल
दरअसल छात्रा की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से जारी निर्देशों में सहारनपुर जिला अधिकारी को कहा गया था कि जांच जल्द कराई जाए। इस पर जिलाधिकारी पीके पांडेय ने जिला विद्यालय निरीक्षक को 20 अक्टूबर तक इस पूरे मामले की जांच कर आख्या भेजने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके अभी तक यह जांच पूरी नहीं हो पाई है। जांच में हो रही इस देरी से आशंका जताई जा रही है कि जांच में जान-बूझकर देरी की जा रही है, अगर इसी तरह से इस मामले को लटकाया जाता रहा तो इस जांच की प्रमाणिकता पर भी उंगलियां उठ सकती हैं।
यह है पूरा मामला
दरअसल देहरादून रोड स्थित नेशनल मेडिकल कॉलेज में आयुर्वेदिक होम्योपैथिक यूनानी डीसीएच, डीएचसी और एचडी समेत 26 डिग्री व डिप्लोमा कोर्स चलाए जा रहे हैं। यहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं, जिनको यह मालूम ही नहीं था कि जो डिप्लोमा और डिग्री उनको मिलेगी वह मान्य नहीं होगी। इसका खुलासा पिछले दिनों सहारनपुर जिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन पद पर भर्ती निकलने पर हुआ। शिकायत करने वाली छात्रा श्वेता ने बताया है कि उसने लैब टेक्नीशियन पद पर आवेदन किया था और जब वह अपनी डिग्री और डिप्लोमा लेकर इस पद के दावे के लिए पहुंची तो सीएमओ ऑफिस से उसे बताया गया कि जो डिप्लोमा उसको मिला है वह फर्जी है और जिस संस्थान से उसे डिप्लोमा मिला है। उस संस्थान का उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण नहीं है।
क्या कहते हैं डीआईओएस
डीआईओएस आरके तिवारी का कहना है कि निकाय चुनाव में व्यस्तता के कारण वह इस मामले की जांच पूरी नहीं कर पाए हैं। अब उनका कहना है कि जल्द जांच पूरी कर के शासन को भेज दी जाएगी।
Published on:
09 Dec 2017 11:24 am
बड़ी खबरें
View Allसहारनपुर
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
