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Saharanpur News: किसानों ने प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा, बोले नहीं देंगे अपनी खेती की जमीन

Saharanpur News किसानों का साफ कहना है कि जमीन हमारे पूर्वजों की है। पुस्तैनी जमीन को हम जेल के लिए नहीं देंगे।
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सहारनपुर

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Shivmani Tyagi

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Updated: 4 Sep 2026, 2:25 PM IST

Farmer

जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर खड़े ग्रामीण ( फोटो श्रोत पत्रिका )

Saharanpur News जिला जेल को शहर से बाहर ले जाने की योजना के खिलाफ सहारनपुर के किसानों ने आस्तीनें चढ़ा ली हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे किसानों ने साफ कह दिया कि किसी भी कीमत पर हम अपनी जमीन नहीं देंगे। प्रशासन अपना कोई अन्य इंतजाम कर लें। जिला जेल को किसी दूसरे स्थान पर ले जाए। किसानों का यह भी कहना है कि अगर उनकी खेती की जमीन ले ली गई तो वह क्या करेंगे?

ये है पूरा मामला

दरअसल पिछले लंबे समय से सहारनपुर प्रशासन देहरादून रोड स्थित जिला कारागार को शहर से बाहर ले जाने की योजना बना रहा है। पिछले कई वर्षों से इसके लिए जमीन की तलाश की जा रही थी लेकिन जमीन नहीं मिल रही थी। पहले बेहट रोड और दिल्ली रोड पर जिला कारागार को ले जाने के प्रस्ताव भेजे गए थे लेकिन अब जिला कारागार को नागल थाना क्षेत्र गांव दंघेड़ा के पास ले जाने का प्रस्ताव बना है। जेल के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण होना है। इसी को विरोध में किसान गुरुवार को जिलाधिकारी के कार्यालय पर पहुंचे और अपनी मांगे उठाते हुए कहा कि हम अपनी जमीनें नहीं देना चाहते।

ग्रामीणों ने कहा हमारे पास कोई सूचना तक नहीं

जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे किसानों ने कहा कि उनके पास कोई सूचना नहीं है। इधर-उधर से उन्हे पता चल रहा है कि उनकी जमीन ली जा रही है। किसान आनंद प्रकाश त्यागी ने कहा कि किसी किसान की जमीन बिना उसकी सूचना के आखिर प्रशासन कैसे ले सकता है। इसके बाद किसानों ने एक स्वर में कहा कि वह अपनी जमीन नहीं देना चाहते। जो जमीनें उनके पास हैं वह खेती की हैं और उनके पूर्वजों से उन्हे खेती करने के लिए मिली हैं। ऐसे में वह अपनी जमीनों को देना नहीं चाहते हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन जेल को किसी अन्य स्थान पर ले जाए। दंघेड़ा के किसान अपनी जमीनें देने के लिए तैयार नहीं है। साफ कहा कि इसके लिए अगर हमें आंदोलन या धरना देना पड़ा तो उसके लिए भी तैयार हैं लेकिन अपनी जमीनें नहीं देंगे।

ग्रामीणों में भी दो फाड़

हैरान कर देने वाली बात यह है कि दंघेड़ा गांव में ही इस मामले को लेकर किसान दो फाड़ हैं। गांव के ही कुछ परिवारों को इस बात पर एतराज नहीं है उनकी जमीन ली जा रही है। यानि साफ है कि कुछ परिवार अपनी जमीन प्रशासन को देने को तैयार हैं लेकिन कुछ परिवार इससे सहमत नहीं है। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे किसानों से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि जो किसान अपनी जमीनें देने के लिए तैयार हैं वो अपनी जमीनें दे सकते हैं लेकिन जो विरोध कर रहे हैं वह किसी भी कीमत पर अपनी जमीनें नहीं देंगे।

अब धरना देंगे किसान

अपनी मांगो के लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे किसानों ने कहा कि अभी तो वह अपनी बात कहने के लिए लिखित में शिकायत लाए हैं। यदि उनकी बात को प्रशासन गंभीरता से नहीं लेता और उन्हे कोई सटीक आश्वासन नहीं मिलता तो वह धरना देंगे। यह भी कहा कि इसके लिए उन्हे किसी संगठन या भीड़ की आवश्यकता नहीं है। जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं वह मिलकर जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर या धरनास्थल पर धरना देकर बैठेंगे और शांति पूर्ण तरीके से तब तक धरना देंगे जब तक कि उन्हे प्रशासन से कोई सटीक आश्वासन नहीं मिल जाता।