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सहारनपुर . अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन के स्थान पर अब लोगों को सहारनपुर के कारीगरों का हुनर पसंद आ रहा है। इसका सहज अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वुड कार्विंग उद्योग के निर्यात में 25 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है। निर्यात बढ़ने से जहां एक्सपोर्टर के चेहरे खिल गए हैं वहीं नक्काशी से जुड़े कारीगरों का भी हौंसला बढ़ा है। लंबे लॉक डाउन के बाद एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सहारनपुर के उत्पादों की डिमांड बढ़ रही है।
सहारनपुर के वुड कार्विंग उद्योग से जुड़े कारीगर अपने हुनर के बल पर लकड़ी के बेजान टुकड़ों में भी जान फूंक देते हैं। सहारनपुर का वुड कार्विंग उद्योग दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखता है और इसी कारण सहारनपुर को काष्ठ नगरी भी कहा जाता है। पिछले लंबे समय से
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन, भारत के वुड कार्विंग उद्योग को चुनौती दे रहा था लेकिन अब हालात बदले हैं और एक बार फिर से वुड कार्विंग उद्योग का निर्यात बढा है। सहारनपुर वुड कार्विंग एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि यूरोप और अमेरिका से लेकर दुनिया के अन्य देशों में भी एक बार फिर से सहारनपुर के कारीगरों की नक्काशी को पसंद किया जा रहा है। लोग अब चाइना से किनारा करते दिख रहे हैं और यही कारण है कि 25% तक की बढ़ोतरी निर्यात में हुई है।
20 हजार से अधिक कार्य कारीगर जुड़े हैं इस कारोबार से
अकेले सहारनपुर में वुड कार्विंग उद्योग से 20 हजार से अधिक कारीगर जुड़े हुए हैं। इनके पीछे इनके परिवार जुड़े हुए हैं और यही कारण है कि सहारनपुर का वुड कार्विंग उद्योग लाखों लोगों को प्रभावित करता है।
सहारनपुर में वुड कार्विंग उद्योग का वार्षिक कारोबार करीब 1500 करोड़ है। पूरे जिले में करीब 150 एक्सपोर्टर हैं और दो लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं इस उद्योग में काम करते हैं अकेले सहारनपुर में करीब वुड कार्विंग उद्योग की 400 इकाइयां हैं।
Published on:
20 Dec 2021 09:45 pm
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