
saharanpur family
सहारनपुर। बेटियां किसी भी तरह बेटाें कम नहीं हैं। अगर बेटियाें काे अवसर दिया जाए ताे वह भी माता-पिता के सपनाें काे साकार कर सकती हैं और हर मुश्किल से मुश्किल हालातों का मुकाबला कर सकती हैं। सहारनपुर के एक छाेटे से गांव की रहने वाली बेटी ने एक बार फिर यह बात साबित कर दिखाई है।
motivational story में आज हम बात कर रहे हैं, सहारनपुर के पिंजाैरा गांव के रहने वाले मंसूर अली की बेटी जमशीर की। जमशीर ने यूक्रेन से MBBS की पढ़ाई की। जब उन्हे विदेश में पढ़ाई के लिए भेजा जा रहा था ताे रिश्तेदाराें और परिवार के लाेगाें ने साफ इंकार कर दिया था। लड़की काे पढ़ाई के लिए विदेश भेजने के लिए काेई भी राजी नहीं था। ऐसे में लग रहा था कि जमशीर कभी भी MBBS की पढ़ाई नहीं कर पाएंगी, लेकिन जमशीर के पिता ने ठान लिया था कि वह अपनी बेटी के रास्ते नहीं रुकने देंगे। रिश्तेदारों के मना करने पर भी पिता ने बेटी काे विदेश में पढ़ाई के लिए भेज दिया और कहा कि अपने पिता के सिर कभी झुकने मत देना।
जमशीर के पिता ने अपनी हैसियत से अधिक पैसा खर्च करते हुए जमशीर की पढाई ताे पूरी करा दी लेकिन बड़ी कठिनाई उस वक्त आन खड़ी हुई जब भारत लाैटने के बाद दाे बार के प्रयास के बाद भी जब जमशीर का FMG (MCI) EXAM CLEAR क्लियर नहीं हुआ। दरअसल विदेश से MBBS की पढ़ाई करके भारत लाैटने वाले सभी छात्र-छात्राओं काे एक कॉमन परीक्षा पास करनी हाेती है। इस परीक्षा का नाम अभी तक MCI था अब इसका नाम FMG हाे गया है। विदेश से MBBS करने वाले छात्र-छात्राएं इस परीक्षा काे पास करने के बाद ही भारत में अपना करियर शुरु कर पाते हैं।
दाे प्रयास के बाद भी यह परीक्षा पास नहीं हाेने पर जमशीर के परिवार पर दबाव बढ़ने लगा। रिश्तेदार और अन्य लाेग यह पूछने लगे कि बेटी विदेश से पढ़कर आई है ताे अब क्या रही है ? इन सवालाें के जवाब ना ताे जमशीर के पास ही थे और ना ही उसके माता-पिता के पास थे। अब जमशी काे motivational thoughts की सपाेर्ट की जरूरत थी। जमशीर बताती हैं कि यह समय उनके जीवन का बेहद कठिन समय था। लाेगाें के इस सवाल का वह सामना नहीं कर पा रही थी और जमशीर के ऐसा लगने लगा कि उनके परिवार के लाेगाें पर भी अब दबाव बढ़ रहा है।
Saharanpur की बेटी जमशीर कहती हैं कि यह सवाल अब ताने जैसे लगने लगे थे। इसके बाद जमशीर ने ठान लिया कि वह इस परीक्षा काे हर हालत में पास करेंगी। जमशीर के पिता मंसूर अली बताते हैं कि बेटी ने दाे साल के लिए खुद काे बिल्कुल अकेला कर लिया और सिर्फ पढ़ाई की। इन दाे वर्षाें में वह किसी पारिवारिक समाराेह में वह भी नहीं गई। जमशीर कहती हैं कि इन दाे वर्षाें में उनके साथ डिप्रेशन जैसे हालात हाे गए थे लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
अब जमशीर ने FMG परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करते हुए TOP स्टूडेंट में अपनी जगह बनाई है। इस परीक्षा के पास हाेने के बाद अब जमशीर के घर बधाई देने वालाें की लाईन लगी हुई है। कल तक जाे रिश्तेदार और नाती बेटी काे विदेश पढ़ने भेजने के लिए मना कर रहे थे आज वही बधाईयां लेकर मंसूर अली के घर पहुंच रहे हैं। खुद मंसूर अली बेहद खुश हैं और उनका कहना है कि उनकी बेटी ने उनका मान बढ़ाया है।
Updated on:
16 Aug 2019 05:26 pm
Published on:
16 Aug 2019 10:01 am
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