
खदीजा मसूद, अपनी जिंदगी का पहला चुनाव लड़ रही हैं।
सहारनपुर से मेयर सीट के लिए बहुजन समाज पार्टी की कैंडिडेट खदीजा मसूद ने इस चुनाव में सबसे ज्यादा चौंकाया है। उनका टिकट होना कई लोगों को चौंका गया तो उनकी शाजान मसूद से मुहब्बत और फिर गरिमा से खदीजा बनने का सफर की कम दिलचस्प नहीं है।
मसूद परिवार की बहू और जाट परिवार की बेटी हैं खदीजा
खदीजा मसूद का परिवार सहारनपुर का काफी प्रभावशाली परिवार है। मसूद परिवार के लोग आजादी से पहले से राजनीति में हैं और तमाम पदों पर रह चुके हैं। उनके ससुर रशीद मसूद मंत्री रहे तो जेठ इमरान मसूद पूर्व विधायक हैं।
लखीमपुर खीरी में है मायका
40 साल की खदीजा का परिवार लखीमपुरखीरी के गोला से आता है। वो जाट हैं। उनके माता-पिता इस समय लखनऊ में रहते हैं। खदीजा का नाम भी पहले गरिमा था। शादी के बाद उन्होंने इस्लाम अपनाते हुए नाम बदल लिया।
बीएससी तक पढ़ी हैं खदीजा
खदीजा मसूद ने बायोटेक्नोलॉजी में BSc की है। हालांकि शाजान मसूद से शादी होने के बाद वो ज्यादातर घर के कामों तक ही सीमित थीं। वहीं उनके पति शाजान मसूद भी बीते कुछ समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। सहारनपुर सीट ओबीसी में गई तो अचानक से उनका नाम प्रत्याशी के तौर पर घोषित कर दिया गया।
शाजान ने खदीजा से की दूसरी शादी
शाजान मसूद की पहली शादी चल नहीं सकी थी और उनका तलाक हो गया था। इसके बाद उनकी मुलाकात लखनऊ में गरिमा से हुई। गरिमा और शाजान ने शादी का फैसला किया। शादी के बाद गरिमा ने अपना नाम बदलकर खदीजा मसूद कर लिया।
जाट होने के चलते मिल गया टिकट
सहारनपुर मेयर सीट महिला के लिए आरक्षित थी और बसपा ने इमरान मसूद की पत्नी सायमा को कैंडिडेट बनाया था। आरृक्षण में बदलाव के बाद सहारनपुर सीट ओबीसी के लिए आरक्षित कर दी गई। ऐसे में मसूद परिवार चुनाव की दौड़ से बाहर हो गया। इसके बाद बसपा ने जाट परिवार से आने वाली खदीजा को कैंडिडेट बना दिया। क्योंकि जाट यूपी में ओबीसी कोटे में हैं।
Updated on:
25 Apr 2023 12:06 pm
Published on:
25 Apr 2023 10:57 am
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