
संभल कोर्ट ने हत्यारे को सुनाई उम्रकैद की सजा..
Sambhal Crime News: संभल की जिला अदालत ने छह वर्ष पुराने चर्चित हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर कुल 27 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी जुर्माना जमा नहीं करता है तो उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इस फैसले के बाद मृतक के परिजनों को लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में न्याय मिलने की उम्मीद पूरी हुई है।
यह मामला चंदौसी तहसील के बहजोई थाना क्षेत्र के गांव नगलिया कठेर का है। अभियोजन के अनुसार 20 मई 2020 को गांव निवासी श्यौराज पुत्र नन्नू सिंह गोलगप्पे खाने के लिए तेजपाल पुत्र गंगाचरन की रेहड़ी पर पहुंचा था। आरोप है कि गोलगप्पे खाने के बाद जब तेजपाल ने उससे पैसे मांगे तो दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। मामूली विवाद देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा और आरोपी ने गुस्से में आकर वारदात को अंजाम दे दिया।
मृतक के भाई जोगेंद्र द्वारा दर्ज कराई गई तहरीर के अनुसार आरोपी पहले भी कई बार गोलगप्पे खाने के बाद बिना पैसे दिए चला जाता था। घटना वाले दिन भी जब तेजपाल ने अपने पैसे मांगे तो आरोपी ने पहले गाली-गलौज की। इसके बाद वह अपने घर गया और अवैध तमंचा लेकर वापस लौटा। आरोप है कि उसने तेजपाल के सिर में गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
हत्या की घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 तथा आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्र कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई जिला अदालत में लगातार चलती रही, जहां अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद शुक्रवार को जिला न्यायालय की न्यायाधीश डॉ. विदुषी सिंह ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत तीन वर्ष का कारावास तथा 2 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय ने दोनों अपराधों को गंभीर मानते हुए कड़ा रुख अपनाया।
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आरोपी द्वारा न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि उसकी सजा में समायोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि मुकदमे के दौरान जेल में बिताया गया समय कुल सजा की अवधि में जोड़ा जाएगा।
सरकारी अधिवक्ता राहुल दीक्षित ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर दोष सिद्ध हुआ। उन्होंने बताया कि मुकदमे की प्रभावी पैरवी में कोर्ट मोहर्रिर कांस्टेबल रोबिन सिंह और कोर्ट पैरोकार महिला कांस्टेबल अनीता की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनकी सक्रियता और समन्वय से अभियोजन पक्ष अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखने में सफल रहा।
इस फैसले को कानून व्यवस्था और न्याय व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मामूली विवाद में किसी की जान लेना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं मृतक के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि लंबे इंतजार के बाद उन्हें न्याय मिला है।
Updated on:
01 Aug 2026 11:57 am
Published on:
01 Aug 2026 11:57 am
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