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SATNA: 1135 करोड़ की योजना से 17 लाख आबादी की बुझेगी प्यास, कलेक्टर ने लिया जायजा

कहा, इस वृहद परियोजना में विलंब स्वीकार्य नहीं, सभी बाधाओं को शीघ्रता से दूर किया जाएगायोजना के सभी हालातों को समझा, देखा ब्लू प्रिंट, बाणसागर जलाशय के मार्कण्डेय घाट भी पहुंचे अब तक हो चुके कामों की ली जानकारी, प्रगति की स्थिति जानी

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SATNA: 17 lk population will be quenched by thirst for 1135 crore scheme

SATNA: 17 lk population will be quenched by thirst for 1135 crore scheme

सतना. कलेक्टर अजय कटेसरिया ने रविवार को प्रदेश की अपनी तरह की पहली 1135 करोड़ की वृहद जल प्रदाय योजना का निरीक्षण किया। रामनगर तहसील के मार्कण्डेय घाट पहुंचकर बाणसागर ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना के प्रगति की स्थिति देखी। इस दौरान इस परियोजना को अपनी प्राथमिकता में बताते हुए इसमें आ रही बाधाओं को विस्तार से समझा साथ ही अब तक किए गए कामों की जानकारी ली। कहा, 5 ब्लाकों के 17 लाख लोगों की प्यास बुझाने वाली इस परियोजना में मुझे किसी भी तरह की लेटलतीफी स्वीकार नहीं होगी। इसमें जिस भी स्तर पर रुकावट है उससे तत्काल अवगत कराया जाए। साथ ही अगर कहीं स्थानीय तत्व बाधक हैं तो उन पर भी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन प्रोजेक्ट की गति नहीं रुकनी चाहिए। कलेक्टर निर्माण एजेंसी मेसर्स लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड चेन्नई के कैम्प एरिया भी पहुंचे। यहां उन्होंने प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी ली। साथ ही आ रही बाधाओं और समन्वय के बारे में समझा।

30 माह में पूरा करना है काम

मध्यप्रदेश जल निगम की परियोजना के संबंध में कलेक्टर को बताया गया कि बाणसागर बांध के मार्कण्डेय घाट रामनगर से सतना जिले के 5 विकास खंड रामनगर, मैहर, उचेहरा, अमरपाटन एवं रामपुर बाघेलान के 1019 गांवों की 17.48 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध कराना है। इस प्रोजेक्ट की निर्माण एजेंसी मे. लार्सन एण्ड टुब्रो है तथा सुपरवीजन और गुणवत्ता नियंत्रण का जिम्मा थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज के पास है। परियोजना का अनुबंध इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कन्सट्रक्शन सहित 10 वर्षों तक संचालन व संधारण का है। कार्य पूरा करने की अवधि 30 माह बारिश के मौसम सहित है।

यह बताई गई समस्याएं

बताया गया कि काम तेजी से शुरू किया जा चुका है, लेकिन अभी प्रोजेक्ट में कई समस्याएं सामने आ रही हैं। जिसमें वन भूमि में निर्माण के लिये भूमि चयन हो चुका है जिसमें 127 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हो रही है। जमीन अदला बदली के सिद्धांत के तहत अभी तक 29 हेक्टेयर भूमि की तलाश की जा सकी है। 98 हेक्टेयर की तलाश है। राजस्व विभाग अगर अपेक्षित गति से सहयोग कर दे तो यह मामला निपट जाएगा। जिस पर कलेक्टर ने इस मामले को शीघ्र दिखवाने के लिये आश्वस्त किया।

अफसरों की लालफीताशाही
बताया गया कि परियोजना के तहत पाइप लाइन प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की कई सड़कों से गुजरनी है। इसके लिये तय मापदण्डों के तहत बैंक गारंटी भी जमा की जा चुकी है, लेकिन विभागीय अफसर अभी तक अनुमति नहीं दे रहे हैं। जिससे इन क्षेत्रों में काम नहीं हो पा रहा है। यह भी बताया गया कि परियोजना के तहत कुल 298 टंकियां बनाई जानी हैं। राजस्व भूमि में निर्माण कार्य के लिये 77 टंकियों का निर्माण की अनुमति मिल चुकी है। शेष में तहसील और एसडीएम कार्यालय स्तर पर मामला लंबित है। इसके अलावा कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने जमीनों पर कब्जा कर खेती कर रखी है तो कुछ स्थानों पर अवैध निर्माण की वजह से पाइप लाइन नहीं बिछाने दी जा रही है। कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित अधिकारियों को कहा है कि इस प्रोजेक्ट की सभी बाधाओं को दूर करें। साथ ही जल्द ही मामले की समीक्षा किये जाने की बात कही।

यह है वर्तमान स्थिति
कलेक्टर को बताया गया कि पांच ब्लाकों के 1019 गांवों को पेयजल की उपलब्धता कराई जाएगी। परियोजना के तहत कुल 298 टंकियां बनाई जानी हैं, जिसमें 35 में निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है। कुल 4182 किलोमीटर लंबाई में पाइपलाइन बिछाई जानी है। जिसमें से 1442 किलोमीटर तक की पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है।

अब तक कलेक्ट्रेट में धूल खा रही थी नस्तियां
बताया गया कि परियोजना के तहत जमीन हस्तांतरण की कई फाइलें काफी समय से कलेक्टर कार्यालय में लंबित हैं, लेकिन वहां से अनुमति नहीं मिल पा रही है। जिसमें इंटकवेल कम पंप हाउस, पाइप लाइन, जल शोधन संयंत्र व टंकियों के लिये 30 हेक्टेयर राजस्व भूमि वन विभाग को हस्तांतरित करने की फाइलें कलेक्टर कार्यालय में लंबित हैं। इसी तरह से इन कामों के लिये वन विभाग, नेशनल हाइवे, एमपीआरडीसी, जलसंसाधन और रेलवे से अनुमतियां भी लंबित हैं।