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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का दो माह से रुका वेतन मिलेगा

राज्य शासन ने अपनी चूक सुधारी 36 जिलों में नहीं बंट रहा था वेतन बजट का किया गया पुनर्विनियोजन

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सतना। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए अच्छी खबर है। इनका दो माह से रुका वेतन जारी करने की राह खुल गई है। राज्य शासन ने वेतन भुगतान के लिए बजट का पुनर्विनियोजन किया है। उल्लेखनीय है इस मामले को पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। प्रदेश के 36 जिलों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नवंबर और दिसंबर महीने के मानदेय का भुगतान नहीं हो सका था। इतना ही नहीं इनके साथ ही विभाग के अन्य अधिकारियों का भी वेतन नहीं मिल रहा था। वेतन न मिलने की मुख्य वजह इनके मानदेय के बजट हेड में राशि उपलब्ध नहीं थी।

पकड़ में आई गड़बड़ी

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय भुगतान नहीं होने के मामले का जब परीक्षण किया गया तो एक चूक सामने आई। दरअसल मानदेय का भुगतान जिलेवार की गई मैपिंग के आधार पर होता है। जिलों की मैपिंग सामान्य श्रेणी, अनुसूचित जनजाति श्रेणी और अनुसूचित जाति श्रेणी में होती है। इन सभी श्रेणियों के मद अलग-अलग होते हैं। शुरुआती दौर में सभी श्रेणियों के जिलों में सामान्य श्रेणी के मद से मानदेय का भुगतान करते चले गए। लिहाजा सामान्य श्रेणी के मद की राशि खत्म हो गई। इस श्रेणी में प्रदेश में 36 जिले थे। लिहाजा इन 36 जिलों में मानदेय का भुगतान बजट न होने के कारण बंद हो गया। जबकि अन्य एससी-एसटी श्रेणी के मैप्ड जिलों में मद होने के कारण वेतन मिलता रहा।

वित्त विभाग की अनुमति के बाद किया पुनर्विनियोजन

गलती पकड़ में आने के बाद यह तो पता चल गया कि सामान्य श्रेणी मद में राशि खर्च हो गई है जबकि एससी-एसटी मद में राशि है। लेकिन इस मद से राशि लेने के लिए वित्त विभाग की अनुमति लेना जरूरी था। लिहाजा राज्य शासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के (सामान्य श्रेणी) लंबित मानदेय के भुगतान को विशेष प्रकरण मानते हुए पुनर्विनियोजन की वित्त विभाग से अनुमति ली। इसके बाद अनुसूचित जनजाति उपयोजना (बजट हेड 0658-0708-31-004) में उपलब्ध 207 करोड़ रुपए को सामान्य योजना (बजट हेड 0658-0707-31-004) में पुनर्विनियोजित किया गया। इसके बाद अब सामान्य हेड में राशि आ गई है। जिससे 36 जिलों के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मानदेय का भुगतान हो सकेगा।