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111 अपात्र लोगों को जारी हुए फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र, मैहर में 6 अधिकारियों के खिलाफ FIR

Fake BPL Certificate Scam: मैहर जनपद पंचायत में हुए बीपीएल फर्जीवाड़े में EOW ने तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों पर दर्ज की FIR।
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MAIHAR

bpl certificate fraud case eow fir against officers, प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Patrika File)

Maihar BPL Scam: मध्यप्रदेश में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) रीवा ने मैहर जनपद पंचायत में बीपीएल फर्जीवाड़े में बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अपात्र व्यक्तियों के नाम बीपीएल सूची में जोड़े गए और फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी कर शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया।

बीपीएल प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जनपद पंचायत मैहर द्वारा तहसीलदार की लिखित अनुशंसा एवं पटवारी सर्वे रिपोर्ट के बिना ही अपात्र व्यक्तियों को गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी में शामिल कर लिया गया। इतना ही नहीं, एक ही बीपीएल क्रमांक पर दो हितग्राहियों के नाम दर्ज किए जाने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। सत्यापन के दौरान प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।

इन पर दर्ज हुई FIR

तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी वेदमणि मिश्रा, आरएन शर्मा, सहायक विकास विस्तार अधिकारी प्रेमलाल गौतम, तत्कालीन विकासखंड अधिकारी सुदामा प्रसाद चौरसिया, तत्कालीन बीपीएल प्रभारी दीपक मिश्रा तथा वर्तमान बीपीएल प्रभारी रामसुंदर मिश्रा सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) एवं 13(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा मामले में अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी अब आर्थिक नुकसान का आंकलन करने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

आठ वर्ष से अपात्र हितग्राही ले रहे लाभ

जांच में अब तक 111 अपात्र हितग्राहियों के नाम पर फर्जी बीपीएल प्रमाण पत्र जारी होने की पुष्टि हुई है। इन प्रमाण पत्रों के आधार पर वर्ष 2018 से लेकर वर्तमान तक विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त किया गया, जिससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंची। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों के अनुरूप बीपीएल सूची का विधिवत संधारण नहीं किया गया और शासन के नियमों की अनदेखी कर अपात्र लोगों को लाभार्थी बनाया गया। इससे वास्तविक पात्र और गरीब हितग्राही योजनाओं से वंचित रह गए, जबकि शासन को आर्थिक नुकसान भी पहुंचा। EOW रीवा के एसपी अरविंद सिंह ठाकुर ने बताया कि मैहर में अपात्र लोगों को बीपीएल का हितग्राही बनाकर शासन की योजनाओं का लाभ दिलाए जाने संबंधी मामले में प्रारंभिक जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है। इसकी अभी विस्तार से जांच की जाएगी और अन्य जिम्मेदारों की भूमिका यदि पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।