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एमपी को मिलेगा 10वां टाइगर रिजर्व! सीएम के दौरे से पहले सरभंगा अभयारण्य को लेकर उठी मांग

new tiger reserve: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चित्रकूट प्रवास के बीच सरभंगा वन क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की मांग ने फिर जोर पकड़ा है। वन विभाग की टालमटोल से यह प्रस्ताव अभी भी अटका हुआ है।

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सतना

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Akash Dewani

Apr 06, 2025

Demand raised to make Sarabhanga sanctuary into new tiger reserve before CM Dr. Mohan Yadav visit to Chitrakoot of satna mp

new tiger reserve: सीएम मोहन यादव के चित्रकूट प्रवास के बीच सरभंगा वन क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने की मांग ने फिर जोर पकड़ा है। अगर सरकार ने समय रहते सरभंगा को अभयारण्य का दर्जा दे दिया, तो यह पूरा क्षेत्र न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी छलांग लगाएगा, बल्कि सतना और चित्रकूट की आर्थिक-सामाजिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल जाएगी।

गांव-गांव में दौड़ेगी तरक्की की रेल

सरभंगा टाइगर रिजर्व बनने से देश-विदेश के पर्यटक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे। इससे स्थानीय होटलों, रिसॉर्ट्स, गाइड सेवाओं, ट्रांसपोर्ट और खानपान उद्योग को बूस्ट मिलेगा। पर्यटन से कमाई के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वो हैरान करने वाले हैं। एक नए अभयारण्य से हर साल 60 से 80 करोड़ रुपये की आमदनी संभावित है।

हजारों हाथों को मिलेगा काम

वन्य जीव संरण सोसायटी ऑफ इंडिया (WPSI) की रिपोर्टों के मुताबिक, एक अभयारण्य के इर्द-गिर्द कम से कम 3000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होते हैं। स्थानीय लोगों को वन रक्षक, गाइड, ड्राइवर, वेटर, कुक, होटल स्टाफ आदि के रूप में काम मिलेगा। साथ ही, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री भी बढ़ेगी।

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सरकारी निवेश से चमकेगा इंफ्रास्ट्रक्चर

सरभंगा अभयारण्य घोषित होते ही केंद्र और राज्य सरकारों से संरक्षण परियोजनाओं के लिए भारी भरकम निवेश मिलेगा। इससे सड़कों, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास होगा। चित्रकूट जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल के समग्र विकास के लिए यह एक निर्णायक कदम साबित होगा।

वन विभाग ने लगा दी ब्रेक

सरभंगा को अभयारण्य घोषित करने के लिए राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वन विभाग ने चौंकाने वाला जवाब दिया। विभाग का कहना है कि प्रस्तावित क्षेत्र में खनिज खदानें संचालित हैं और अभयारण्य बनने से इन पर रोक लगेगी, जिससे ग्रामीणों को नुकसान होगा। यह तर्क न केवल विभागीय नीति के खिलाफ है, बल्कि खनन माफिया और विभाग की मिलीभगत की बू भी देता है।

सरभंगा में है वन्यजीवों का खजाना

सरभंगा वन क्षेत्र में तकरीबन 25 बाघ, 70 तेंदुए, 60 भेड़िये, 150 लकड़बग्घे, 300 सुनहरे सियार, 50 से ज्यादा भालू, 15 जंगली कुत्ते, 70 चीतल, 60 सांभर, 200 नीलगाय, 300 जंगली सुअर और 50 हिरण जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी है। इसके अलावा पक्षियों की कई प्रजातियां, शाही आदि भी इस क्षेत्र में आम हैं। यह इलाका पहले से ही जैव विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध है।

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केन-बेतवा लिंक परियोजना

केन-बेतवा लिंक परियोजना के चलते पन्ना टाइगर रिजर्व का 25% कोर एरिया डूबने वाला है। ऐसे में पन्ना के बाघों का प्राकृतिक विस्थापन मझगवां होते हुए सरभंगा की ओर हो सकता है। इसलिए सरभंगा को अभयारण्य का दर्जा देना न केवल जरूरी बल्कि समय की मांग है।

चित्रकूट को मिलेगा नया आयाम

चित्रकूट धार्मिक पर्यटन का केंद्र है, लेकिन सरभंगा अभयारण्य इसकी पहचान को और भी विस्तार देगा। अयोध्या से आने वाले श्रद्धालु चित्रकूट के साथ-साथ सरभंगा की जैविक समृद्धि का अनुभव कर सकेंगे। इससे क्षेत्र में बहुआयामी विकास सुनिश्चित होगा।

अब फैसला सीएम के हाथ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास अब यह सुनहरा मौका है कि वे सतना और चित्रकूट को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। सरभंगा अभयारण्य सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं होगा, यह क्षेत्र की सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिकीय तस्वीर बदलने की ताकत रखता है। अब देखना है कि सीएम साहब इस ऐतिहासिक फैसले में कितनी तेजी दिखाते हैं।