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satna: विधानसभा को अधूरी और भ्रामक जानकारी देने पर संचालक ने जताई नाराजगी, मांगा सही और स्पष्ट जवाब

सही और पूर्ण उत्तर सहित जानकारी की तलब

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satna: विधानसभा को अधूरी और भ्रामक जानकारी देने पर संचालक ने जताई नाराजगी, मांगा सही और स्पष्ट जवाब

Director angry on giving misleading information to Vidhansabha

सतना। जिला पंचायत सतना द्वारा विधानसभा को गलत और भ्रामक जानकारी देने का मामला सामने आया है। मामला पकड़ में आने पर संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नाराजगी जाहिर करते हुए जिला पंचायत सीईओ से सही और पूर्ण उत्तर भेजने कहा है।दरअसल जिला पंचायत सतना में मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत मुद्रण कार्य में वर्ष 2012-13 एवं 2015-16 में बड़े पैमाने पर अनियमितता सामने आई थी। मामला तत्कालीन विधायक शंकरलाल तिवारी ने विधानसभा में उठाया था। जिसके बाद हुई जांच मे दो अधिकारी दोषी पाए गए थे। इन पर कार्रवाई के निर्देश के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर इस बार मामला फिर से विधानसभा के पटल पर पहुंचा है। लेकिन जिला पंचायत से इस संबंध में अधूरी और भ्रामक जानकारी दी गई है। जिसे लेकर संचालनालय ने सख्त आपत्ति जताई है। पंचायत राज संचालनालय के संचालक सह आयुक्त अमरपाल सिंह ने मामले में जिला पंचायत सीईओ को इसकी जानकारी देते हुए नाराजगी जाहिर करते हुए सही और स्पष्ट जानकारी देने कहा है।

IMAGE CREDIT: patrika

लगातार बोले जाने के बाद भी छिपा रहे तथ्य

जानकारी के अनुसार जिला पंचायत सतना में हुई अनियमितता को लेकर विधायक प्रदीप पटेल द्वारा पूछे गये सवाल पर सतना जिला पंचायत से भेजी गई जानकारी को संचालनालय ने अधूरी और भ्रामक पाया है। इसके बाद जिपं सीईओ को बताया गया है कि संचालनालय से लगातार दूरभाष पर परियोजना अधिकारी गौरव शर्मा से जानकारी चाही जा रही है लेकिन स्पष्ट एवं सटीक जानकारी नहीं दी जा रही है। जिससे विधानसभा का उत्तर देने में विलंब हो रहा है। बताया गया है कि आदेश का क्रमांक तो दे दिया गया है लेकिन उसकी प्रति नहीं दी गई है। इतना ही नहीं शिकायत की प्रति भी नहीं दी गई है। कई अन्य जानकारियां भी गलत दिए जाने का उल्लेख किया गया है।

ये है मामला

मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम के तहत जिला पंचायत मे मुद्रण कार्य मे अनियमितता की जांच सहायक संचालक वित्त बीएल चंदेल ने की थी। इस जांच में वित्तीय अनियमितता में गौरव शर्मा परियोजना अधिकारी व प्रभारी अधिकारी एमडीएम तथा अवधेश सिंह सहायक परियोजना अधिकारी व प्रभारी अधिकारी स्टोर शाखा की संलिप्तता पाई गई थी। ये दोनों संविदा कर्मचारी रहे हैं। 8 जनवरी 2018 को दोनों पर संविदा नीति के तहत कार्रवाई करने के निर्देश तत्कालीन अवर सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास ने कलेक्टर को दिए थे। लेकिन कलेक्टर ने कोई कार्रवाई नही की थी। इसी संबंध में विधायक प्रदीप पटेल ने जानकारी चाही है।

यह पूछा है विधायक ने सवाल

विधायक ने सवाल किया है कि जिला पंचायत में कई जांच लंबित है और इनकी समय सीमा क्या थी? विभिन्न जांचों में दोषी पाए जाने पर भी संंबंधितों पर वरिष्ठ कार्यालय के निर्देश के बाद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? कार्रवाई नहीं किये जाने के लिये दोषी कौन है? दोषियों पर कब तक कार्रवाई की जाएगी?