
सतना। जिले में समर्थन मूल्य खरीदी में बड़े फर्जीवाड़े की नींव एक बार फिर से तैयार कर दी गई है। जिले के खाद्य विभाग के अफसरों ने प्रावधान के विपरीत उन समितियों को पंजीयन केन्द्र बना दिया है जिनका पुरानी देनदारी बकाया है। शार्टेज की राशि जमा नहीं होने के बाद भी इन समितियों को काम देने के लिए उपार्जन नीति के लूपहोल का फायदा उठाया गया है। मामला संज्ञान में आने पर कलेक्टर ने डीएम नान और डीएसओ से जवाब तलब किया है।
देखा जाता है शार्टेज
दरअसल उपार्जन नीति के अनुसार किसी समिति को पंजीयन केन्द्र या खरीदी केन्द्र बनाने से पहले यह देखा जाता है कि संबंधित समितियों का कोई शार्टेज तो नहीं है। शार्टेज का आशय यह है कि समितियों ने जितने अनाज की खरीदी किसानों से की है और उसमें से जितना कम आनाज गोदाम में जमा होता है वह शार्टेज कहलाता है। इस अनाज की पूर्ति समितियों को उसकी कीमत के रूप में जमा करनी पड़ी है। उपार्जन नीति के अनुसार यह देखा जाता है कि समितियों का पिछले दो साल का कोई शार्टेज तो नहीं है। इसके लिये जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी (जो कि खरीदी के नोडल अधिकारी होते हैं) द्वारा खरीदी एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम से दो साल के शार्टेज की जानकारी लेते हैं। यहां पर नान ने आधा दर्जन के लगभग उन समितियों को शार्टेज की दो साल की एनओसी दे दी जो इसके पहले शार्टेज होने पर डिफाल्टर हो गई थी और उन्हें काम नही मिला था। इधर इसी दो साल की एनओसी के आधार पर डिफाल्टर समितियों को पंजीयन केन्द्र दे दिया गया।
यह किया खेल
डिफाल्टर समितियां जो दो साल पहले शार्टेज जमा नहीं करने के कारण पंजीयन केन्द्र और खरीदी केन्द्र नहीं पा सकने के कारण उन्होंने दो साल कोई काम ही नहीं किया। स्पष्ट है जब दो साल कोई समिति काम नहीं करेगी तो नान के रिकार्ड में उसकी कोई शार्टेज नहीं बनेगी। इसी लूपहोल का फायदा खाद्य विभाग के अफसरों ने उठाया। समितियों की मिली भगत से उन्होंने नान की एनओसी के आधार पर दो साल शार्टेज नहीं मिलने पर इन्हें काम दे दिया। लेकिन अपने यहां रखी पुरानी रिपोर्ट और डिफाल्टर समितियों की नस्ती को हाशिए पर कर दिया। जबकि नियमानुसार इन्हें अपने अभिलेखों में पुरानी डिफाल्टर समितियों की रिपोर्ट देखनी चाहिए थी और यह कन्फर्म करना था कि उन्होंने अपना बकाया जमा किया या नहीं। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इन डिफाल्टर समितियों को दिया काम
जानकारी के अनुसार सेवा सहकारी समिति प्रतापपुर पर 1,67,051 रुपये की शार्टेज है, सेवा सहकारी समिति बिरसिंहपुर पर 6,27,219 रुपए की शार्टेज है, सेवा सहकारी समिति बैरहना पर 8,29,540 रुपए की शार्टेज है। यह शार्टेज 2019-20 और 2020-21 की है। लिहाजा इन्हें 2021-22 और 2022-23 में काम नहीं मिला। लेकिन इस अवधि में काम नहीं मिलने पर शार्टेज शून्य दिखाते हुए इ्न्हें अब पंजीयन केन्द्र दे दिया गया। इसी तरह से सेवा सहकारी समिति नयागांव खुटहा पर बकाया 15,24,910 रुपए और सेवा सहकारी समिति मेहुती पर 15,52,494 रुपए की शार्टेज है लेकिन इन्हें भी एनओसी दे दी गई है। इनके पुराने बकाये को क्लीन चिट दे दिया गया है और इन्हें पंजीयन केन्द्र देने की तैयारी है। यह पूरा खेल उपार्जन प्रभारी द्वारा किया जा रहा है।
'' मामला गंभीर है। इस मामले में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी और डीएम नान से जवाब तलब किया गया है। अगर इनका पुराना शार्टेज बकाया होगा तो इन समितियों को दिया गया पंजीयन केन्द्र निरस्त किया जाएगा '' - अनुराग वर्मा, कलेक्टर
Published on:
13 Oct 2023 10:04 am
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