
Forests decreased in 38 districts of Madhya Pradesh including Satna, decrease in forest cover
सतना. पेड़ों और वनों को लेकर मध्यप्रदेश के लिए बुरी खबर सामने आई है। आईएसएफआर (इंडिया स्टेट ऑफ फारेस्ट रिपोर्ट 2021) की रिपोर्ट के अनुसार सतना सहित मध्यप्रदेश के 38 जिलों में जंगल घट रहे हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से मध्यप्रदेश की जिलेवार जारी की गई द्विवार्षिक रिपोर्ट में वन विभाग की लापरवाहियों का चिट्ठा खुल गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि मध्यम सघन वन के क्षेत्रफल में सबसे ज्यादा कमी आई है जो इशारा कर रही है कि इन जंगलों में पेड़ पौधे कट रहे हैं। उधर प्रदेश स्तर पर देखें तो भिण्ड जिले में वनाच्छादन सबसे ज्यादा बढ़ा है तो बड़वानी में सबसे ज्यादा नुकसान जंगलों को हुआ है। विन्ध्य में रीवा, सीधी जिले में वनाच्छादन बढ़ा है तो सिंगरौली में जंगलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
प्रदेश में यह है स्थिति
जिलेवार स्थिति देखें तो 38 जिलों में वनाच्छादन घटा है। इसमें सबसे ज्यादा वन क्षेत्र में कमी वाले पांच जिलों में 23.63 फीसदी कमी बड़वानी, 21.34 उमरिया, 17.27 सिंगरौली, 16.95 हरदा तथा 16.09 फीसदी वनाच्छादन में कमी श्योपुर जिले में दर्ज की गई है। इसी तरह से सिर्फ 12 जिले ऐसे रहे हैं जहां वनाच्छादन बढ़ा है। सर्वाधिक बढ़ोत्तरी वाले 5 जिलों में भिण्ड में 119.81 फीसदी वनाच्छादन बढ़ा है तो सीधी 33.36, मुरैना 21.50, छिंदवाड़ा 20.12 तथा रीवा में 20.05 फीसदी वन क्षेत्र बढ़ा है।
यह है सतना की स्थिति
सतना जिले का भौगोलिक क्षेत्रफल 7502 वर्ग किलोमीटर है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 की स्थिति अगर देखे तो यहां सघन वन 12 वर्ग किलोमीटर है। मध्यम सघन वन का क्षेत्रफल 904.19 वर्ग किलोमीटर है। खुला वन 835.33 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में है। इस तरह जिले में कुल वन क्षेत्र 1751.52 वर्ग किलोमीटर है जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 23.35 फीसदी है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019 की तुलना में सतना जिले का वन क्षेत्र 1.38 फीसदी घटा है। जिले में 165.39 वर्ग किलोमीटर में झाड़ियां पाई गई हैं। रिपोर्ट बताती है कि 2019 में मध्यम सघन वन क्षेत्र जिले में 909.70 वर्ग किलोमीटर था अर्थात 5.51 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल जंगल का घटा है। जिले के लिये इज्जत बचाने वाली बात यह रही कि खुले वन का दायरा 4.13 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है।
ये है वनों का प्रकार
अत्यंत सघन वन क्षेत्र वह होता है जहां पौधों का घनत्व 70 फीसदी से ज्यादा होता है। मध्यम सघन वन क्षेत्र वह होता है जहां जंगल में पौधों का घनत्व 40 से 70 फीसदी तक होता है। 10 से 40 फीसदी तक घनत्व वाले वन क्षेत्र को खुला वन कहा जाता है। जहां 10 फीसदी से कम पौधों का घनत्व होता है उसे झाड़ी की संज्ञा दी जाती है। यह वन में नहीं गिना जाता है।
इसलिये घट रहे वन
वन विभाग के जानकारों का कहना है कि वन क्षेत्र घटने की मुख्य वजह जंगलों में होने वाली पौधों की कटाई है। लोग या तो खेती के लिये या फिर खनन के लिये जंगल में पेड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसके पीछे एक तथ्य यह भी बताया गया है कि जिस तरीके से वनाधिकार पट्टे बांटे जा रहे हैं उससे जंगलों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। लोग पट्टा पाने की लालच में भी वनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो जिन्हें पट्टा मिल गया है वे जंगल में अपनी खेती का रकवा जंगल के पेड़ों को काट कर बढ़ा रहे हैं। इसके बाद जंगलों में सक्रिय खनिज माफिया भी खदानों के लिये जंगल में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई कर रहा है।
यह है मध्यप्रदेश में वनों की स्थिति
भौगोलिक क्षेत्रफल - 3,08,252
अत्यंत सघन वन - 6,664.95
मध्यम सघन वन - 34,209.02
खुला वन - 36,618.63
कुल वन क्षेत्र - 77,492.60
प्रदेश में वनाच्छादन - 25.14%
2019 की तुलना में वनाच्छादन - 10.11 फीसदी बढ़ा
Published on:
16 Mar 2022 10:36 am
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