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बैंक में लोन दिलाने के नाम पर आदिवासी की जमीन की करवा ली रजिस्ट्री

बाद में भू माफिया ने ये जमीन सीमेंट फैक्ट्री को बेच दी

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सतना। मैहर जिले में आदिवासियों की जमीन भूमाफिया द्वारा हड़पने का मामला सामने आया है। आदिवासियों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनकी जमीनों की रजिस्ट्री करवा ली गई। इसके बाद इन जमीनों को सीमेंट फैक्ट्री को बेच दिया गया। मामले का खुलासा भू-स्वामियों को तब हुआ जब उन्होंने वारसाना उतरवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की। इससे परेशान भू-स्वामियों ने पूरी जानकारी कलेक्टर मैहर को दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने इसकी विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि इसी तरह का मामला सतना जिले के नयागांव पटवारी हल्के में सामने आया है। यहां अब सुधारात्मक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

अमगार गांव के आदिवासी हुए भूमिहीन

मैहर तहसील के बदेरा थाना अंतर्गत अमगार निवासी सुखेन्द्र सिंह गोड़, राजेन्द्र सिंह गोड़, कुसुम बाई, बेनी बाई और रब्बी बाई ने कलेक्टर को बताया कि अमगार में उनके पिता रामलाल सिंह की पुस्तैनी जमीन है। अलग-अलग आराजी नंबर पर लगभग 8.5 एकड़ जमीन पिता के नाम पर थी। लेकिन वर्ष 2012-13 में कम्प्यूटर खसरे में ये जमीन राजेन्द्र सिंह के नाम पर बिना किसी सक्षम आदेश के दर्ज कर दी गईं। इसकी जानकारी राजेन्द्र सिंह को भी नहीं थी। जबकि वारसाना के अनुसार यह जमीनें दो भाई और तीन बहनों के नाम आना चाहिए था। अब ये आदिवासी भूमि हीन हो चुके हैं।

इस तरह किया गया खेल

कलेक्टर को बताया गया कि दीपक लालवानी व रामप्रकाश जायसवाल राजेन्द्र सिंह के पास पहुंचे। उसे बैंक से लोन दिलाने का झांसा दिया। लोन दिलाने की आड़ में इन लोगों ने फर्जी तरीके से राजेन्द्र के नाम करवाई गई जमीन की शोभा कोल के नाम पर रजिस्ट्री करवा दी। इस दौरान राजेन्द्र को नहीं बताया गया कि जमीन की रजिस्ट्री करवाई जा रही है। रजिस्ट्री के वक्त दीपक लालवानी, रामप्रकाश जायसवाल, अज्जू सिंधी, गोपाल सिंधी और कमला सेन मौजूद रहे।

अल्ट्राटेक के नाम करवा दी जमीन

जैसे ही यह जमीन शोभा कोल के नाम पर हुई तो इन्हीं लोगों ने बाद में यह जमीन अल्ट्राटेक सीमेंट लिमि. इकाई वर्क्स सरलानगर मैहर के नाम रजिस्ट्री करवा दी। इस जमीन के इन लोगों ने करोड़ों रुपए ले लिए और इसकी न तो राजेन्द्र को जानकारी मिली और न ही उसे एक भी रुपए दिए गए।

इस तरह हुआ खुलासा

राजेन्द्र के भाई सुखेन्द्र ने जब वारसाना करवाने के लिए अपने पिता के नाम दर्ज जमीनों का खसरा निकलवाया तो उनके होश फाख्ता हो गए। यह जमीनें अब अल्ट्र्राटेक सीमेंट फैक्ट्री के नाम हो चुकी थीं। इसके बाद जब 2011-12 से खसरा की नकल प्राप्त की तो पूरी कहानी खुल कर सामने आ गई। इसके बाद सुखेन्द्र ने जब अपने भाई राजेन्द्र से पिता की मौत के बाद जमीन का वारसाना अपने नाम करवाने और शोभा कोल को बेचने की जानकारी ली तो राजेन्द्र ने इस संबंध में कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया। यह जरूर बताया कि रामप्रकाश और दीपक उसे लोन दिलाने के नाम पर ले गए थे।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

कलेक्टर ने इनके खसरे देखे। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। यह भी जांच की जा रही है कि बिना कलेक्टर की अनुमति के आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई।

"प्रारंभिक तौर पर शिकायत सही लग रही है। इसकी विस्तृत जांच करवाई जा रही है।" - रानी बाटड, कलेक्टर मैहर