
In the stadium, the illegal swimming pool was operating DSO
सतना. दादा सुखेंद्र सिंह स्टेडियम स्थित स्वीमिंग पूल में हुई किशोर की मौत के बाद अब व्यवस्था का स्याह चेहरा सामने आता जा रहा। मौजूद दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो चुका कि जिला खेल अधिकारी (डीएसओ) अवैधानिक रूप से स्वीमिंग पूल का संचालन कर रहे थे। पूल संचालन के लिए उन्होंने म.प्र. नगर पालिका तरण तालों का विनियमन आदर्श उपविधियां 2011 के तहत नगर निगम से स्वीमिंग पूल संचालन के लिए कोई अनुमति नहीं ली थी। दूसरी ओर डीएसओ ने अपने नियंत्रणकर्ता अधिकारी जिपं सीइओ को शोकॉज नोटिस का जवाब दे दिया है। लेकिन, जिस तरीके से जवाब दिया गया वह न केवल बचकाना है बल्कि गैर जिम्मेदाराना भी है। जिपं सीइओ ने जो वांछित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे वे भी नहीं लगाए गए हैं। डीएसओ ने जिपं सीइओ को भ्रामक जानकारी देते हुए बताया कि तरणताल (स्वीमिंग पूल) के लिए शासन से कोई दिशा निर्देश नहीं हैं । जबकि यह दिशा निर्देश मध्यप्रदेश शासन ने बकायदा राजपत्र में 29 जून 2011 को जारी किए हैं।
दरअसल, दादा सुखेन्द्र सिंह स्टेडियम स्थित स्वीमिंग पूल में 24 मई को डूबने से 17 वर्षीय अभिषेक नारंग की मौत हो गई थी। प्रथम दृष्ट्या मौत की वजह स्पष्ट तौर पर पूल संचालन में लापरवाही और अव्यवस्था नजर आ रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए नियंत्रणकर्ता अधिकारी जिपं सीईओ साकेत मालवीय ने डीएसओ अनवर खान को शोकॉज जारी किया था। इसका जवाब समक्ष में उपस्थित होकर प्रस्तुत करने कहा गया था। लेकिन डीएसओ ने अपने किसी मातहत से जवाब भिजवा कर खानापूर्ति कर दी।
अपने ही जवाब में उलझे डीएसओ
डीएसओ ने जिपं सीइओ को जो जवाब दिया है उसी में उनकी गड़बडिय़ां उजागर हो गई हैं।डीएसओ ने बताया कि 23 मई को मतगणना के कारण पूल बंद था। हवा के कारण धूल पूल के पानी में गिरने के कारण पानी गंदा दिख रहा था। फिल्टर चलाने के बाद धूल निकल गई थी। उधर, उनके द्वारा जो बिजली का बिल प्रस्तुत किया गया है, वह 1273 और 1650 रुपए बताया गया। जानकारों का कहना है कि अगर फिल्टर प्लांट नियमित चलाया जाता तो बिजली का न्यूनतम बिल ही 10 हजार से कम नहीं हो सकता है। इसका कभी भी परीक्षण किया जा सकता है। स्वीमिंग पूल में सबसे बड़ा व्यय फिल्टर प्लांट के बिजली बिल का ही है।
जवाब में बोला सफेद झूठ
डीएसओ ने जवाब में जिपं सीइओ को बताया कि तरणताल संचालन के लिए शासन से कोई दिशा निर्देश नहीं हैं, जबकि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 29 जून 2011 में म.प्र. नगर पालिका तरण तालों का विनियमन आदर्श उपविधियां 2011 जारी करते हुए पूल संचालक के पूरे नियम जारी किए थे। इसके नियमानुसार किसी भी सार्वजनिक तरणताल का संचालन बिना अनुज्ञा प्राप्त किए नहीं किया जा सकता है और बिना अनुज्ञा के संचालन दंडनीय है।
मौजूद लाइफ गार्ड नहीं कूदे थे पूल में
24 मई को पूल में अपने भाई आदित्य के साथ ही अभिषेक पहुंचा था। यहां जब अभिषेक पूल में डूब गया और नजर नहीं आया तो उसके भाई आदित्य ने यहां मौजूद लाइफ गार्ड को इसकी जानकारी दी। आदित्य ने पत्रिका को बताया कि उसके बताने के बाद भी लाइफ गार्ड पूल में नहीं कूदे बल्कि उसे परिसर में अन्य स्थानों पर ढूंढऩे की सलाह देते रहे। जबकि वहां मौजूद अन्य स्वीमर मामले की जानकारी मिलने पर तत्काल पूल में कूदे। लेकिन पानी काफी गंदा होने से अभिषेक को ढूढ़ने में काफी समय लग गया। इधर डीएसओ ने अपने जवाब में झूठी जानकारी दी है कि पूल में अभिषेक को ढूढ़ने के लिए लाइफ गार्ड कूदे थे।
स्वीमिंग पूल संचालन पर कार्रवाई हो
नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शैलेंद्र सिंह गुड्डू ने कहा कि बिना अनुज्ञा के अगर स्वीमिंग पूल का संचालन हो रहा था तो मामले में संचालक डीएसओ पर प्रकरण दर्ज होना चाहिए। अवैध संचालन पर अगर मौत हुई है तो यह हत्या का मामला है।
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यह है स्वीमिंग पूल संचालन नियम
1/ लाइसेंस
तरणताल बनाने के लिए आयुक्त नगर निगम या मुख्य नगर पालिका अधिकारी या नगर परिषद को आवेदन देना होता है। इस पर स्वास्थ्य अधिकारी पूल का तय मापदण्डों के अनुसार निरीक्षण कर अनुज्ञा जारी करता है। यह अनुज्ञा एक साल तक ही वैध होती है।
2/ डिजाइन
ताल का आंतरिक रंग, पैटर्न या फिनिशिंग, ताल के भीतर की वस्तुओं या सतह के अस्तित्व को अंधकारमय या विवधमानता को अस्पष्ट नहीं करेगा। अर्थात पूल की तलहटी स्पष्ट तौर पर नजर आनी चाहिए। सतह में कटने, चुभने, चोट लगने या जोखिम का खतरा नहीं होना चाहिए।
3/ परिसर की आवश्यकता
पुरुष और महिलाओं के लिए कपड़े बदलने के अलग-अलग कमरे हों। फव्वारा, प्रसाधन सुविधाएं हों। स्नान करने वालों की संख्या निश्चित की जाए। गहरे किनारों तक पहुंचने के लिए समुचित सीढिय़ां हों। हाथ से पकडऩे, पैर रखने की जगह या अन्य साधन हों, जिससे छोटे बच्चे चढ़ सकें।
4/ स्वास्थ्य
पानी का पीएच मान 7 से कम तथा 8 से अधिक नहीं होना चाहिए। समुचित जल गुणवत्ता परीक्षण उपकरण होने चाहिए। पानी रोगाणुमुक्त हो। तरणताल में मूत्र त्याग, मल त्याग, थूकना और नाक साफ नहीं किए जाएं।
5/ सुरक्षा
ताल के आसपास जीवन रक्षा बॉय ज्यादा संख्या में होने चाहिए। बच्चों के ताल 40 सेंटीमीटर से अधिक गहरे नहीं होने चाहिए। झुकाव या ढलान भी 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। बच्चों के ताल पूर्णत: स्वतंत्र होने चाहिए। इसके अलावा विशेषित लाइफ गार्ड हर 200 से 500 वर्ग मीटर के बीच होना चाहिए। 500 से 1 हजार वर्ग मीटर के बीच का कुल पानी की सतह क्षेत्र वाले ताल के लिए न्यूनतम दो लाइफ गार्ड होना चाहिए।
Published on:
28 May 2019 11:35 pm
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