
Indore gifted Corona to Satna
सतना. शुक्रवार 10 अप्रैल को जब इंदौर के पत्थरबाज कैदी सतना पहुंचे थे उसी के साथ ही यह आशंका गहराने लगी थी कि कहीं इनमें कोई कोरोना पॉजीटिव न हो और रविवार को जैसे ही आईसीएमआर की फाइनल रिपोर्ट में दोनो कैदी कोरोना पॉजीटिव निकले उसके साथ ही सतना जिले में नाराजगी के स्वर गूंजने लगे। हालांकि सतना प्रशासन की सक्रियता और समझदारी के कारण इन कैदियों का न तो सतना जेल में और न ही जेल के बाहर कोई सामुदायिक संपर्क हो सका। प्रोटोकॉल के अनुसार जो चिन्हित लोग संपर्क में आए भी वे क्वारंटीन कर दिए गए हैं। लेकिन इंदौर जिला प्रशासन पर सबका गुस्सा साफ देखा गया। आमजन हो या नेता या फिर जनप्रतिनिधि सभी ने इंदौर कलेक्टर के निर्णय पर नाराजगी जाहिर की है। सभी का कहना है कि अब तक कोरोना मुक्त रहे सतना जिले में इंदौर से कोरोना पार्सल कर दिया गया। बहरहाल इन कैदियों को विशिष्ट इलाज के लिये रीवा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है, जो कि सतना के लिये राहत की बात मानी जा रही है।
सोशल मीडिया में व्यापक विरोध
इंदौर से कैदियों को सतना केन्द्रीय जेल भेजने का सोशल मीडिया में तो व्यापक विरोध हो रहा है। आमजन जहां इंदौर कलेक्टर के निर्णय की जमकर भर्त्सना कर रहे हैं वहीं राजनीतिक दलों से इस निर्णय पर प्रतिक्रिया काफी नकारात्मक आ रही हैं। विपक्ष इस मामले में जहां सरकार को घेर रहा है वहीं सत्ताधारी भी संयमित विरोध कर रहे हैं।
अजय सिंह ने किया ट्वीट
सतना में कोरोना पॉजीटिव केस मिलने के बाद पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री को घेरने की कोशिश की है। कहा है कि वे कोरोना की रोकथाम कर रहे हैं या उसे प्रदेश व्यापी बनाने में लगे हैं। विन्ध्य क्षेत्र जो इस महामारी से अछूता है वहां रासुका के कोरोना पॉजीटिव भेजकर पूरी विन्ध्य की जनता की जान को खतरा पैदा कर दिया। कोरोना पॉजीटिव को सतना भेजे जाने से लोग दहशत में हैं। नागरिकों में गुस्सा बढ़े उससे पहले वहां से संक्रमित को विन्ध्य से बाहर भेज देना चाहिए।
पूर्व विधायक ने जताई नाराजगी
नागौद के पूर्व विधायक यादवेन्द्र सिंह ने कहा है कि वे इंदौर जिला प्रशासन के निर्णय की घोर निंदा करते हैं। सतना के लोग निश्चिंत होकर चैन की रोटी खा रहे हैं थे लेकिन बिना जांच पड़ताल किए कोरोना पीडि़त को सतना भेज कर यहां के लोगों को भी आशंकित कर दिया है। ऐसे कलेक्टर पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिन्हें सतना भेजा गया वे कोई आतंकी नहीं थे जो उन्हें इंदौर जेल में नहीं रखा जा सकता था। यह इंदौर कलेक्टर की अदूरदर्शिता का परिणाम है। युकां लोस अध्यक्ष राजदीप सिंह मोनू ने कहा है कि इंदौर कलेक्टर का अविवेकपूर्ण निर्णय सतना सहित पूरे विन्ध्य को संक्रमण की सौगात भेज दिया। जिसका विरोध पूरी विन्ध्य की जनता करती है।
कदम कदम पर चूक
इस पूरे घटनाक्रम को देखा जाए तो कैदियों को इंदौर से सतना केन्द्रीय जेल भेजने के मामले में कदम कदम पर चूक हुई है। इंदौर पुलिस और प्रशासन अब पूरी तरह से सवालों में घिरा नजर आ रहा है।
1/ कैदियों की जिला स्तर पर सैम्पल लेने और प्रारंभिक जांच करने वालों की माने तो इन्हें चंद्रपुर थाने से सीधे सतना जिले के लिये रवाना कर दिया गया था। इनका वहां तापमान तक नहीं लिया गया था। जबकि इंदौर कोरोना संभावित और संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण इन कैदियों का पूरा चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना चाहिए था उसके बाद इन्हें यहां भेजना था।
2/ इंदौर कलेक्टर ने कैदियों को सतना केन्द्रीय जेल भेजने का जो आदेश दिया है उसकी प्रति अधीक्षक केन्द्रीय जेल सतना को तो दी गई। लेकिन इंदौर कलेक्टर ने इस मामले की जानकारी या प्रतिलिपि न तो कलेक्टर सतना न ही सीएमएचओ सतना को दी। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इंदौर जैसे संभावित क्षेत्र से इन हालातों में कैदी को भेजा जा रहा था तो चिकित्सकीय जांच या अन्य व्यवस्था के लिहाज से कम से कम इन अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था। दूसरा अगर इंदौर जेल में उन्हें नहीं रखा गया मतलब सुरक्षा का मामला रहा होगा तो उस स्थिति में एसपी सतना को सूचित करना था जो नहीं किया गया। लिहाजा कैदियों के सतना जेल पहुंचने तक सतना जिला प्रशासन को इन कैदियों के आने की कोई जानकारी नहीं थी।
3/ इन कैदियों को लेकर आने वाले 8 पुलिस कर्मियों को किसी प्रकार की सुरक्षा किट नहीं दी गई थी। जबकि संक्रमित क्षेत्र से इतनी लंबी दूरी तक अगर किसी कैदी को भेजा जा रहा था तो सुरक्षा के लिहाज से उन्हें सुरक्षा किट या व्यवस्था के हिसाब से भेजा जाना चाहिए था।
इस तरह हुआ इंदौर से सतना का सफर
पत्थरबाज रासुका आरोपी इमरान पिता भुरू और समीर पिता अनवर सहित कुल चार कैदियों को को इंदौर चंद्रपुर थाने से 9 अप्रैल की तड़के इंदौर पुलिस के आठ जवान एक वाहन में लेकर चलते हैं। वे सभी 9 अप्रैल की शाम 6 बजे जबलपुर पहुंचते हैं। यहां कैदियों को जबलपुर जेल प्रबंधन के हवाले करने के बाद ये सतना केन्द्रीय जेल के लिये रवाना होते हैं। 10 अप्रैल को तड़के 5 बजे ये सतना केन्द्रीय जेल पहुंचते हैं। यहां कैदी को सतना केन्द्रीय जेल प्रबंधन के हवाले करने के बाद ये लोग 7 बजे इंदौर के लिये वापस रवाना होते हैं। सतना से ये सभी नागौद, अमानगंज, दमोह होते हुए इंदौर पहुंचते हैं। नागौद में ये सभी कुछ देर रुक कर चाय पीते हैं। इसके बाद दमोह में इनके द्वारा खाना खाने की जानकारी सामने आई है।
कैदियों के संपर्क में आने वाले कुल 20लोग किये गए क्वारंटीन
बताया गया है कि सतना केन्द्रीय जेल लाए गए दो कोरोना पॉजीटिव कैदियों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संपर्क में आने वाले कुल 20 लोगों को क्वारंटीन किया गया है। इनमें से कुछ को इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन किया गया है तो कुछ को होम क्वारंटीन कराया गया है। कैदियों के प्रत्यक्ष और परोक्ष संपर्क में केन्द्रीय जेल के 10 स्टाफ आए थे। इन सभी को शनिवार को ही जीएनएम हॉस्टल स्थित क्वारंटीन सेंटर में भेजा जा चुका है। इसके अलावा इन कैदियों के लिये खाना लेकर जाने वाले और गेट खोलने वाले 4 कैदियों की भी जानकारी सामने आई है। लिहजा उन्हें भी केन्द्रीय जेल में अलग सेल में रख कर क्वारंटीन कर दिया गया है। कैदियों की जांच करने वाले एक कम्पाउंडर और इनका सैम्पल लेने वाले जिला अस्पताल के दो कर्मचारियों को भी होम क्वारंटीन किया गया है। इंदौर की टीम जब वापस इंदौर जा रही थी तो सतना से एक पुलिस कर्मी इनसे लिफ्ट लेकर नागौद गया था उसे भी होम क्वारंटीन कर दिया गया है। इन लोगों ने नागौद में सिंहपुर चौराहे में रुककर जिस गुमटी वाले के यहां चाय पी थी उस गुमटी वाले को नागौद में संस्थागत क्वारंटीन किया गया है। इस दौरान नागौद थाने का एक पुलिस कर्मी भी वहां पहुंच गया था और वो भी इनके साथ कुछ देर रहा लिहाजा उसे भी होम क्वारंटीन किया गया है। इसके अलावा यह जानकारी भी मिली है कि 10 अप्रैल को सभी जेल स्टाफ अपने अपने घर भी गया था लिहाजा इनके परिवार वालों को भी होम क्वारंटीन किया गया है। ऐसे परिवारों की संख्या तीन बताई गई है। शेष सभी अकेले रहते हैं। जानकारी के अनुसार एक जेल कर्मी इस घटना के बाद रीवा अपने घर चला गया था। लिहाजा रीवा प्रशासन को भी सूचित किया गया है उसके परिवार को भी होम क्वारंटीन किया जाए।
ट्रेवल हिस्ट्री के लिहाज से पांच जिलों को सूचना
इंदौर से सतना भेजे गए दो कैदियों की कोरोना पॉजीटिव रिपोर्ट आने के बाद जिला प्रशासन ने इनकी ट्रेवल हिस्ट्री पता करवाई। जिस रास्ते से आए और जिससे वापस लौटे और इस दौरान कहां-कहां रुके इसकी पड़ताल की गई। ऐसे में पाया गया कि कैदियों के साथ लगभग 8 पुलिस कर्मी भी थे। माना गया है कि रास्ते में चाय भोजन के दौरान ये सभी विभिन्न लोगों के संपर्क में भी आए होंगे। ऐसे में इन सभी की पहचान कर क्वारंटीन करने सतना कलेक्टर ने इंदौर सहित पांच जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख कर सूचित किया है। जिन जिलों को सूचना दी गई है उनमें इंदौर, कटनी, पन्ना, दमोह और रीवा शामिल हैं।
कैदी सेल सील, शेष जेल सेनेटाइज
इंदौर से लाए गए कैदियों के कोरोना पॉजीटिव पाये जाने के बाद नगर निगम की प्रशिक्षित टीम ने जेल के अन्दर के प्रथम द्वार, द्वितीय द्वार, अंदर खाली मैदान, कैदियों की बैरक, प्रशाधन कक्ष सहित अन्य सभी क्षेत्र को पूरी तरह से सेनेटाइज कर दिया है। कैदियों को जिन सेल (गुनाह खाना) में रखा गया था उसे निगम की टीम ने सेनेटाइज नहीं किया है। तकनीकि रूप से इसे सेनेटाइज करने का काम मेडिकल टीम करेगी। यह काम सोमवार को किया जाएगा। तब तक इन सेल को पूरी तरह से सील कर दिया गया है और इस क्षेत्र में किसी के भी आने जाने में प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि यह पहले से ही पूरी तरह से अलग हिस्सा है। इस सेल और हिस्से को विशेषज्ञ टीम द्वारा सेनेटाइज किया जाएगा।
भयभीत होने की जरूरत नहीं
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने कहा है कि दोनों कोरोना पॉजीटिव पाए गए कैदियों को विशिष्ट इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज रीवा भेजा गया है। चूंकि ये दोनों कैदी सुरक्षा इंतजामों के बीच बिना सामुदायिक संपर्क के सीधे जेल पहुंचाए गए थे। लिहाजा समुदाय से इनका कोई संपर्क नहीं रहा। ऐसे में सतना वासियों को इससे भयभीत होने की जरूरत नहीं है। साथ ही प्रोटोकॉल के अनुसार इनकी पूरी ट्रेवल हिस्ट्री चेक कर जितने भी संपर्क में लोग थे सभी को क्वारंटीन कर दिया गया है। चूंकि जिले में कोरोना पॉजीटिव पाया गया मामला जिले के समुदाय या रिहायश या स्थानीय के बीच से नहीं आया है ऐसे में किसी प्रकार का पेनिक होने की भी जरूरत नहीं है। लेकिन लोगों से सजग रहने, सामाजिक दूरी अपनाने और लॉक डाउन अवधि में घरों में रहने की अपील है। क्योंकि सामाजिक दूरी से ही कोरोना के विरुद्ध जंग जीती जा सकती है।
बेहतर रहा जिला प्रशासन का निर्णय
इंदौर से केन्द्रीय जेल सतना भेजे गए कैदियों को जिला अस्पताल न लाकर उन्हें जेल में ही सीधे अलग सेल में रखने और जेल में ही उनकी सैम्पलिंग का निर्णय बेहतर माना जा रहा है। बताया गया है कि अगर उन कैदियों को जिला अस्पताल परीक्षण के लिये लाया जाता तो ऐसे में उनके संपर्क में आने वालों की संख्या में काफी इजाफा होता और अस्पताल का समुदाय से सीधा संपर्क रहता है ऐसे में मामला कुछ भी हो सकता था। लिहाजा प्रशासन का यह निर्णय सराहनीय माना जा रहा है। इधर कोरोना पॉजीटिव केस आने के बाद अब जिला अस्पताल को भारत सरकार की नई गाइड लाइन के अनुसार यहां भी आइसोलेशन की व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। चूंकि पहले का जो प्रोटोकॉल था उसके अनुसार कोरोना पॉजीटिव को मेडिकल कॉलेज भेजा जाना था। दो दिन पहले जो नई गाइड लाइन आई है उसके अनुसार अब कम संक्रमित कोरोना पीडि़त को जिले में ही रखना होगा। लिहाजा अस्पताल प्रबंधन को इसके लिये स्टाफ को बेहतर प्रशिक्षण के साथ ही पूरी व्यवस्था के निर्देश दे दिए गए हैं।
वज्र की सुरक्षा में रीवा भेजे गए कैदी
कोरोना पॉजीटिव कैदियों को रीवा मेडिकल कॉलेज भेजना भी बड़ी चुनौती था। लेकिन इसे पुलिस अधीक्षक रियाज इकबाल ने बखूबी निभाया। वे अपनी कोरोना फाइटर्स टीम के साथ कोलगवां थाने पहुंचे। यहां टीम को मोटीवेट करने के साथ ही उन्हें सुरक्षात्मक उपाय बताए। किस तरह से कैदियों को एंबुलेंस में लेना है, उन्हें किस तरह से ले जाना है और वहां इन्हें किस तरह से उतारा जाना है। इस दौरान सुरक्षा के कौन से प्रोटोकॉल अपनाने है आदि की जानकारी दी गई। इसके साथ ही कैदियों की सुरक्षा का भी मामला था। लिहाजा स्पष्ट चेताया गया कि किसी भी स्थिति में कैदियों को छूना नहीं है। अगर इस दौरान कोई विपरीत स्थिति बनती है तो साथ जा रही टीम को यथानुसार निर्णय लेने की छूट दी गई थी। कैदियों के एम्बुलेंस को वज्र सहित अन्य वाहनों की सुरक्षा के बीच मेडिकल कॉलेज छोड़ा गया।
आज से शुरू होगी डोर टू डोर स्क्रीनिंग
नगर निगम क्षेत्र में सोमवार से डोर टू डोर स्क्रीनिंग का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। पहले यह काम धवारी से होना था लेकिन कोरोना पॉजीटिव केस सामने आने के बाद अब यह शुरुआत जेल कॉलोनी से होगी। इसके बाद अन्य इलाके में स्क्रीनिंग का काम किया जाएगा।
जेल के चारों ओर पुलिस
जब यह अंदेशा हुआ कि इंदौर से आए बंदियों में कोरोना संक्रमण के लक्षण हो सकते हैं तो शनिवार को ही एसपी रियाज इकबाल के निर्देश पर पुलिस ने इस इलाके को कंटेनमेंट करते हुए सुरक्षा बढ़ा दी थी। केन्द्रीय जेल को जाने वाले चारों दिशाओं के पांच रास्तों पर कोलगवां थाना पुलिस ने फिक्स प्वाइंट बना दिए हैं। इनमें करीब 45 पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों की ड्यूटी तय की गई है। थाना और पुलिस लाइन से मिला रिजर्व बल इन पांच प्वाइंट पर 6- 6 घंटे की राउण्ड द क्लॉक ड्यूटी करेगा।
Updated on:
13 Apr 2020 02:12 am
Published on:
13 Apr 2020 01:23 am
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