
साहब... वो मुझे सिर्फ लोवर में मिली थी। लोवर भी फटा था। पूरा लोवर ब्लड में भींगा हुआ था। लोवर के अलावा कोई भी कपड़ा पूरे शरीर में नहीं था। अधो वस्त्र भी नहीं थे। उसके गाल काटे हुए थे। ओंठ काटे हुए थे। पूरे शरीर में डंडों के निशान थे। पीठ पर घसीटने के निशान थे। पूरा शरीर फूला हुआ था। वो तो बस चल रही थी... मां शारदा की कृपा थी... वरना इतने में तो कोई जिंदा नहीं बचता.... यह कथन हैं अंजू वर्मा के जिसने मैहर अंधरा टोला निवासी 11 वर्षीय मासूम रेप पीड़िता को सबसे पहले न सिर्फ देखा बल्कि उसे गोद में उठा कर घर तक लाई, फिर पुलिस चौकी ले गई और वहां से अस्पताल तक पहुचाने में मदद की।
दुल्हा देव जंगल में हुई घटना
मां शारदा देवी पहाड़ी के ठीक नीचे एक दलित बस्ती है जिसे अंधरा टोला के नाम से जाना जाता है। इस बस्ती से एक रास्ता पहाड़ी के जंगल की ओर जाता है। जिसे स्थानीय लोग दूल्हा देव जंगल के नाम से जानते हैं। कुछ दूसरी पर यहां पानी की एक बड़ी टंकी निर्माणाधीन है। जिसके किनारे कुछ दूरी पर कंटूर नुमा गड्ढे खुदे हुए हैं। माना जाता है कि इसी स्थल पर मासूम के साथ रेप की घटना को अंजाम दिया गया था। और इसी स्थल से उतर कर आते हुए मासूम को अंजू ने सबसे पहले देखा था। अंजू बताती है कि जिस हालत में बच्ची चलते हुए आ रही थी उसे देख कर मैं सिहर गई थी। दौड़ कर उसके पास पहुंची और गोद में लेकर घर तक पहुंची। पाया कि उसके प्राइवेट पार्ट मेंं लकड़ी घुसी हुई है। बिना देर किए पुलिस चौकी ले गए। वहां से अस्पताल भेजा गया। बाद में जब डाक्टर ने यह लकड़ी निकाली तो बताया कि एक फीट 2 इंच लंबी लकड़ी अंदर घुसी हुई थी। अंजू कहती है कि यह तो मां शारदा की कृपा थी कि इस अवस्था में भी मासूम घटना स्थल से चल कर जंगल के बाहर तक आ गई। वरना इस हालत में जंगल से बाहर आना तो असंभव था।
मासूम ने पहचाना है आरोपियों को
इस गंभीर स्थिति में भी मासूम ने आरोपियों के नाम बताए हैं। दरअसल यह बच्ची मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से भीख मांगने का काम करती थी। अंधरा टोला बस्ती शारदा मंदिर पहाड़ी के प्रवेश द्वार से लगी हुई है। थाना पुलिस बताती है कि यहां के ज्यादातर बच्चे मंदिर परिक्षेत्र में भीख मांगने का काम करते हैं। यह बच्ची भी वहां भीख मांगती थी। मां शारदा देवी मंदिर प्रबंध समिति यहां आने वाले श्रद्धालुओं को भिखारियों द्वारा परेशान किये जाने से बचाने के लिए समय समय पर कर्मचारियों को ड्यूटी लगाती है। इन आरोपियों में से एक की इस कार्य में ड्यूटी रह चुकी थी। लिहाजा पीड़ित उसे पहचानती थी। घटना के बाद बच्ची ने इन आरोपियों का न केवल नाम लिया बल्कि फोटो से भी पहचाना है।
मेरा पति निर्दोष है
उधर इस मामले में दोषी माने गए एक आरोपी अतुल बढोलिया की पत्नी हैरान हैं। वह यह मानने को तैयार नहीं है कि उसके पति ऐसी हैवानियत कर सकते हैं। वह बताती है कि जिस रात की घटना बताई जा रही है उस रात तो उसके पति उनके साथ थे। वह कहती हैं कि उनके पति निर्दोष हैं। इस घटना की गंभीरता से जांच करने की मांग कर रही हैं।
ढहाए गए आरोपियों के घर
इस मामले में प्रथम दृष्टया दोषी माने जा रहे आरोपी अतुल बढोलिया और रवीन्द्र कुमार रवि के घर जांच में अवैध निर्माण पाए जाने पर प्रशासन ने ढहा दिए हैं। आरोपियों का परिवार अब सड़क पर आ गया है। इसको लेकर जनता का आक्रोश जहां कुछ कम हुआ है वहीं कुछ लोग इसे सही नहीं मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि आरोपियों ने घटना काे अंजाम दिया है लेकिन परिवार का क्या दोष है। फिर जो घर गिराए गए वे आरोपियों के नहीं है। उधर आम जनों का कहना है कि यदि परिवार पहले ही इन्हें संस्कार देता तो यह स्थिति नहीं बनती।
लड़की की स्थिति नाजुक
उधर रीवा मेडिकल कॉलेज में बच्ची का इलाज चल रहा है। डाक्टरों की टीम ने बच्ची का आपरेशन किया है। लकड़ी की वजह से उसकी बच्चेदानी गंभीर क्षतिग्रस्त हुई है। अन्य अंगों को भी क्षति पहुंची है। इन अंदरूनी चोटों से ब्लीडिंग काफी होने से उसकी स्थिति काफी कमजोर हैं। संक्रमण का खतरा बना हुआ है। सघन निगरानी में बच्ची को रखा गया है।
Updated on:
30 Jul 2023 01:57 pm
Published on:
30 Jul 2023 01:38 pm
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