
Medical college Demand in Satna Satna big breaking
सतना। जिले में मेडिकल कॉलेज को लेकर अब सकारात्मक माहौल बनता जा रहा है। अकेले जूझ रही संघर्ष समिति को जहां समर्थन मिलने लगा वहीं जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी ताकत जोडऩी शुरू कर दी है। रैगांव विधायक ऊषा चौधरी ने सतना को मेडिकल कालेज देने विधानसभा में सवाल खड़ा किया है। सांसद गणेश सिंह ने जिले के सभी विधायकों का आह्वान किया है कि वे दलगत राजनीति से परे एकजुट होकर विधानसभा में संकल्प पारित कराएं।
पार्षद भगवती पाण्डेय के नेतृत्व में 8 पार्षदों ने कलेक्टर को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है। मेडिकल कॉलेज खोले जाने को लेकर रैगांव विधायक ऊषा चौधरी ने जानना चाहा है कि क्या सतना में मेडिकल कालेज खोले जाने शासन स्तर से प्रक्रिया प्रचलन में है? यदि हां तो शासन द्वारा केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है? यदि भेजा है तो कब इसकी पूरी जानकारी चाही है।
शासन ने अब तक विचार नहीं किया
यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या यह सच है कि सतना में मेडिकल कालेज खोले जाने आम जनता, जनप्रतिनिधि (विधायक-सांसद) एवं समाजसेवी लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं? इस संबंध में कब-कब कितने पत्र ज्ञापन मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा विभाग को सौंपे गए हैं? इन पत्रों पर शासन ने अब तक विचार नहीं किया क्यों? क्या सतना मेडिकल कालेज खोले जाने के सभी मापदंडों में आता है? यदि हां तो कब तक महाविद्यालय खोले जाने की स्वीकृति केन्द्र सरकार से प्राप्त कर ली जाएगी? यह भी सवाल किया है कि क्या पूर्व के सत्रों में भी मेडिकल कालेज खोले जाने का मामला सदन में उठ चुका है यदि हां तो अभी तक चिकित्सा महाविद्यालय न खोले जाने के क्या कारण हैं?
नगर की जनता की ओर से पार्षदों ने सौंपा ज्ञापन
मे डिकल कालेज की लड़ाई में पार्षद भी कूद पड़े हैं। गुरुवार को भगवती पाण्डेय के साथ आधा दर्ज से ज्यादा पार्षदों ने कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री को मेडिकल कालेज के लिए ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जय प्रताप बागरी, पुष्पराज कुशवाहा, रेखा निधि गोपाल गुप्ता, गंगा कुशवाहा, पुष्पा रामबालक रैकवार, राधा श्रीवास्तव, ममता फूलचंद्र सोनी शामिल रहीं। इन्होंने कहा कि वे नगर की ८० हजार की आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी ओर से प्रधानमंत्री से सतना में मेडिकल कालेज स्वीकृत करने की मांग की गई है। चौंकाने वाली बात यह रही कि सोशल मीडिया और तमाम बयान बाजी में आगे रहने वाले अन्य पार्षद अभी तक मेडिकल कालेज को लेकर अपनी चुप्पी नहीं तोड़ सके हैं।
अधिवक्ता संघ ने पीएम सहित सीएम को लिखा पत्र
मे डिकल कॉलेज संघर्ष समिति की पहल अब रंग लाने लगी है। गुरुवार को समिति ने अधिवक्ता संघ से मुलाकात कर समर्थन मांगा। इस पर अधिवक्ता संघ की ओर से न केवल प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिख मेडिकल कॉलेज की मांग की गई बल्कि अधिवक्ताओं ने अपने इसके पोस्टर अपने यहां लगा कर मुहिम को समर्थन दिया। अधिवक्ता संघ ने अपने पत्र में कहा है कि यहां सैकड़ों गंभीर बीमार विशेषज्ञ चिकित्सा नहीं मिल पाने के कारण दम तोड़ देते हैं। कैंसर, हार्ट अटैक, न्यूरो संबंधी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिऐ हर दिन आधा सैकड़ा लोग नागपुर, मुंबई जाते हैं। रीवा मेडिकल कालेज में स्थानाभाव के कारण इलाज में अब सक्षम नहीं है। कई लोग तो इस लिये इलाज नहीं करा पाते क्योंकि उनकी बाहर शहरों में जाने की हैसियत नहीं है। लिहाजा हजारों जिंदगियां बचाने के लिए सतना में मेडिकल कालेज की अनिवार्य जरूरत है। साथ ही जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष नारायण गौतम एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मकसूद अहमद के नेतृत्व में सभी वकीलों ने न्यायालय परिसर में 'सतना को चाहिए मेडिकल कॉलेजÓ का स्टीकर लगाकर मुहिम का समर्थन किया। संघर्ष समिति के संयोजक विवेक अग्रवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता मुरलीधर शर्मा, राजीव खरे, संजय सिंह तोमर, अतुल सिंह परिहार, यशपाल जैन कक्का, अमित सिंह, अधिवक्ता संघ के सदस्य गोविंद द्विवेदी, सुरेन्द्र द्विवेदी, श्रीकान्त शुक्ला, दिनेश दुबे सहित सैकड़ा भर अधिवक्ता व संघर्ष समिति के सदस्य सहभागी रहे।
हनुमानमंदिर में सद्बुद्धि यज्ञ
संताषी माता के हनुमान मंदिर में समाजसेवी कौशलेंद द्विवेदी के नेतृत्व में जनसेवकों ने सद्बुद्धि यज्ञ किया। समाजसेवी द्विवेदी ने कहा कि जिले के जनप्रतिनिधि मेडिकल कॉलेज के मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यदि जल्द मेडिकल कॉलेज बनने की घोषणा नहीं हुई तो सड़कों पर जनसैलाब उमड़ेगा। यज्ञ में नीतू मिश्रा, माया गौतम, एसके त्रिपाठी, अनुपम मिश्रा, बृजेश पाण्डे, ऐके त्रिपाठी, राजबहादुर सिंह, आरबी सिह, राम बाबू सिह, संजीव तिवारी रावेन्द पटेल मनोज कोरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
विधायकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत: गणेश
सांसद गणेश सिंह ने नागौद विधानसभा के उमरिहा और कोडर की जनसभा में कहा, इन दिनों मेडिकल कॉलेज खोलने की जोरों से चर्चा हो रही है। कई राजनीतिक दल, सामाजिक दल रोज समाचार पत्रों में अपना समर्थन दे रहे हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इनका स्वागत है। सांसद ने कहा कि 26 से विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है जिले के सभी विधायकों से मेरी अपील है विशेष रूप से विधानसभा उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह से है कि जिले के सभी विधायकों को साथ लेकर विधानसभा में एक संकल्प सतना में मेडिकल कॉलेज खोले जाने पारित कराने में मदद करें।
लोकसभा अनुपूरक प्रश्न पर मेडिकल कॉलेज देने का आश्वासन
कहा, मैंने लोकसभा में बजट पर भाषण करते हुए सतना में मेडिकल कॉलेज देने का मामला उठाया था। इसके पूर्व प्रधानमंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तथा अनेको बार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को मिलकर ज्ञापन भी दिया है। जब फग्गन सिंह कुलस्ते केंद्रीय राज्य मंत्री थे तब मेरे लोकसभा अनुपूरक प्रश्न पर सतना को मेडिकल कॉलेज देने का आश्वासन दिया था। जिसे मैंने लोकसभा की आश्वासन समिति को भेजा था। सांसद ने कहा है कि विधानसभा से संकल्प पारित होने के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का काम मेरे द्वारा पुन: किया जाएगा। अभी भोपाल में मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री से भी सतना में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए सहयोग मांगा है।
ओपीडी के आंकड़े बयां कर रहे 'मेडिकल कॉलेज जरूरीÓ
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन पहुंचने वाले मरीजों की संख्या मेडिकल कॉलेज की आवश्यकता को बयां कर रही है। अस्पताल रिकॉर्ड की मानें तो ओपीडी में रोजाना ड़ेढ से दो हजार मरीज पहुंचते हैं। मरीजों की भीड़ होने से चिकित्सक कक्ष के सामने मुसीबत की कतार लगी रहती है। सभी मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है। निराश होकर लौटना पड़ता है। जिले में मेडिकल कॉलेज हो तो मरीजों को आसानी से और बेहतर चिकित्सा उपलब्ध हो सकती है। जिला अस्पताल में सतना के अलावा आसपास के जिलों (पन्ना, छतरपुर, चित्रकूट, बांदा, मानिकपुर सहित अन्य) से भी मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। सभी पीडि़त बेहतर चिकित्सा की आस में जिला अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में मरीजों का भार होने के कारण बेहतर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा मुहैया करा पाना संभव नहीं हो पाता है। मेडिकल कॉलेज हो जाने से जिले के अलावा आसपास के आधा दर्जन जिलों के लोगों को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
700 से अधिक मरीज रहते हैं भर्ती
जिला अस्पताल पांच सौ बिस्तरों का है, लेकिन यहां प्रतिदिन सात सैकड़ा से अधिक मरीज भर्ती रहते हैं। आलम यह रहता है कि वार्डों में मरीजों को पलंग, बेड तक उपलब्ध नहीं हो पाता है। प्रबंधन पर भी सभी को सुविधाएं मुहैया कराने की चुनौती रहती है। अस्पताल की यह स्थिति वर्षभर बनी रहती है। चिकित्सकों पर भर्ती सभी मरीजों को इलाज, परामर्श देने का दबाव रहता है।
गरीब तबके के लोगों को परेशानी
सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब तबके के पीडि़तों को उठानी पड़ रही है। आर्थिक तंगी के चलते निजी हॉस्पिटल या क्लीनिक में शुल्क देकर इलाज कराना मुश्किल होता है।
Published on:
23 Feb 2018 11:28 am
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