
Netaji went underground after the Jassa connection surfaced
सतना। चार राज्यों में गांजा और शराब की तस्करी का नेटवर्क ऑपरेट करने वाले कुख्यात तस्कर अनूप जायसवाल उर्फ जस्सा की प्रापर्टी को प्रशासन के बुल्डोजरों ने धराशायी कर दिया। उसके अपने गांव पोड़ी में पांच मकान जमींदोज कर दिये गए। जस्सा का रसूख खत्म करने कॉनपुर मॉडल अपना कर शासकीय जमीनों पर बनी इमारतों को ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई में जस्सा को लगभग 1 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया है। एसडीएम दिव्यांक सिंह के नेतृत्व में सुबह 10 बजे से यह कार्रवाई शुरू की गई। जस्सा ने यहां राजस्व और वन भूमि में अपने अवैध निर्माण कर रखे थे। इतना ही नहीं यहां आलीशान भवन बना कर बकायदे लोगों को किराये पर दे रखा था। हद तो यह थी कि जिस वन भूमि पर कब्जा कर जस्सा अपना आलीशान मकान बना रहा था उसके ठीक बगल में ही वन चौकी भी है लेकिन आज तक इसके विरुद्ध न तो कोई शिकायत की गई थी और न ही कोई प्रकरण कायम किया गया था। इसके अलावा जस्सा का पूरा परिवार जिस घर में रहता है वह भी सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इसे भी 10 दिन में खाली करने का नोटिस दिया गया है। इधर पता चला है कि राजस्व विभाग की नौकरी छोड़ राजनीति में हाथ आजमाने वाला एक नेता जस्सा से अपने संबंधों के सामने आने के बाद भूमिगत हो गया है।
ये है जस्सा का नेता कनेक्शन
पुलिस महकमे से छन कर आ रही जानकारी को अगर सही माने तो जस्सा के काले कारोबार के राजदारों में एक नेता भी शामिल हैं। बताया गया है कि यह नेता राजस्व विभाग में किये गड़बड़झाले पर अपनी गर्दन फंसती देख नौकरी छोड़ दी थी फिर राजनीति को अपना कैरियर बना लिया। बताया जा रहा है कि जस्सा के कनेक्शन इन नेता जी के अच्छे खासे थे। रामपुर और चित्रकूट के जस्सा के कारोबार में साझीदार भी रहे हैं। जैसे ही जस्सा पर पुलिस की पकड़ हुई और उसके नेटवर्क तलाशे जाने लगे हैं उसके साथ ही ये नेताजी भी भूमिगत हो गए हैं। जिले के आला पुलिस अधिकारी भी यह कह रहे की अभी वो नेताजी भूमिगत हैं। चर्चा है कि ये नेताजी अब अपने आका की ड्यौढ़ी पर मदद की अपील लगा चुके हैं तो उनके गुर्गे भी मामले को ठंडा करने में जुट गये बताए जा रहे हैं।
सरकारी अमला बना रहा मूक दर्शक
कुख्यात गांजा और शराब तस्कर अनूप जायसवाल उर्फ जस्सा का उसके अपने गांव में रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके आगे सरकारी सिस्टम पानी भरता था। पोड़ी में सभी के लिये कानून राज भले रहा हो लेकिन जस्सा की अपनी सल्तनत थी जहां सरकार के कायदे कानून ज्यादा मायने नहीं रखते थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जस्सा ने पोड़ी में जितने भी भवन बनाए सभी सरकारी जमीनों पर बने थे और इनमें से कुछ तो सरकारी भवन गिराकर जस्सा ने अपने मकान तान दिए थे। हद तो यह थी कि वन चौकी के ठीक बगल में वन भूमि पर जस्सा ने घर बना लिया और इस पर वन अमला और अधिकारी चुप्पी साधे बैठे रहे। बहरहाल बुधवार को प्रशासन ने लगभग 12000 वर्ग फीट पर बने पांच मकानों को जमींदोज कर एक एकड़ के लगभग सरकारी जमीन उसके कब्जे से मुक्त करवा लिया। इस कार्रवाई में लगभग एक करोड़ के 5 अवैध निर्माण धराशायी कर दिए गए।
सर्वसुविधायुक्त बना रहा था बंगला
पोड़ी में इन दिनों जस्सा खुद का बंगला वन विभाग की भूमि पर बना रहा था। पोड़ी से परमनिया जाने वाले मार्ग के किनारे जहां से वन भूमि शुरू होती है वहां पर वन विभाग की चौकी बनी हुई है। जिसमें स्पष्ट रूप से वन रक्षक नाका डुड़हा (पोड़ी) लिखा हुआ है। यहां पर 24 घंटे वन विभाग का कर्मचारी तैनात रहता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इस चौकी से पांच फीट की ही दूरी पर वन विभाग की जमीन पर जस्सा अपना आलीशान बंगला तैयार करता रहा और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तैनात कर्मचारी ने कहा कि मौखिक तौर पर सभी को बताया जा चुका था। लेकिन जब अफसर ध्यान नहीं देते तो हम क्या करते। हमें तो लगातार यहां रहना है। बताया कि इस जमीन पर पहले किसी कोरी का कब्जा था जिसे किसी ब्राह्मण ने खरीदा था और जस्सा उस पर कब्जा करके अपना निर्माण शुरू कर दिया। उसकी ताकत के आगे कोई कुछ नहीं बोलता था।
कृषि विभाग का भवन गिराकर खड़ी कर ली अपनी इमारत
वन विभाग की जमीन से लगी राजस्व भूमि है जहां पहले कृषि विभाग का ग्राम सेवक भवन बना हुआ था। लेकिन किसी कारण इस भवन को कृषि विभाग ने खाली कर दिया तो फिर जस्सा ने इस भवन को ढहा कर इस पूरी जमीन पर अपना कब्जा कर लिया। नागौद उचेहरा मार्ग से लगी इस जमीन पर रोड के किनारे दुकानें बना दी और बीच में रास्ता पीछे जाने का छोड़ दिया। इसके पीछे भी गोदाम नुमा भवन बना रखा था। लोग बताते हैं कि यहां कभी जस्सा अपने अवैध धंधे संचालित करता था। चौंकने वाली बात यह है कि यह भवन पुलिस चौकी से लगा हुआ था।
वर्मा की कब्जे पर अपना कब्जा
जस्सा अपने निवास के ठीक बगल में एक भवन बना रखा था। जिस पर आबकारी विभाग के रंग से पुताई करा रखी थी। बताते हैं कि जस्सा यहां से शराब दुकान का संचालन करता था। यह जमीन पहले किसी वर्मा ने अपने कब्जे में कर रखी थी। बाद में जस्सा ने इस पर जबरिया अपना कब्जा कर लिया। इस भवन को जब गिराया गया तो इसके पीछे काफी बड़ा भूभाग सामने आया जिस पर जस्सा ने कब्जा कर रखा था।
अवैध कब्जे की इमारत पर किरायानामा
नागौद उचेहरा रोड से ही लगकर जस्सा ने एक जमीन जो जगभग तीन हजार वर्ग फीट की थी पर कब्जा कर दो मंजिला भवन बना रखा था। बताते हैं कि इस जमीन पर पहले बसोर रहते थे। लेकिन इन्हें मारपीट कर जस्सा ने यहां से भगा दिया और अपना मकान तान दिया। बताते हैं कि इस विवाद के बाद से एक बसोर आजतक लापता है इसके पीछे भी लोगों ने जस्सा का ही हाथ बताया। अब इस भवन को 6 हजार रुपये में एक स्कूल को किराये पर दिया गया था। जिसका बकायदा किराया नामा जस्सा के भाई प्रदीप जायसवाल और स्कूल संचालक राम सुरेन्द्र सिंह के बीच का बना हुआ है। हालांकि यहां मौजूद लोगों ने बताया कि यह स्कूल जिपं उपाध्यक्ष द्वारा संचालित किया जाना बताया गया। यह भी कहा गया कि वे अक्सर इस स्कूल आती रहती थी।
सरकारी जमीन पर कब्जा कर राशन दुकान को किराये पर दिया
इसी तरह से जस्सा ने पोड़ी तिराहे से लगी सतना रोड की एक सरकारी जमीन पर अपना कब्जा कर दुकाने बना लिया था। इसमें से एक दुकान उसने राशन दुकान के लिये किराए पर दे रखी थी। इन दुकानों के कब्जे के पीछे की कहानी जो सामने आई वह यह है कि इसका सीधा जुड़ाव पीछे जस्सा के मूल घर से है जिसका सामना दूसरी रोड पर खुलता है। बताते हैं कि फायरिंग करने पर जस्सा के छोटे भाई को पकड़ने पुलिस जब घर में दबिश दी थी तो पिंटू घर के पिछवाड़े से होकर इन्ही दुकानों से कूद कर फरार हो गया था।
आनन फानन में खाली कराई गई स्कूल
प्रशासन ने जस्सा का रसूख तोडऩे जिस तेजी से उसके अवैध निर्माण तोडऩे का निर्णय लिया था उसकी सूचना बहुतों को नहीं थी। लिहाजा स्कूल संचालक को भी कोई जानकारी नहीं थी। जब बुधवार को दल कार्रवाई करने पहुंचा तो आनन फानन में स्कूल का समान बाहर निकाला गया। इस दौरान कई बार यह भी स्थिति रही कि बीच में कार्रवाई रोक कर समान बाहर निकाला जाता रहा।
जब जवाब दे गई जेसीबी
जस्सा की सभी इमारतें काफी मजबूत रही। उसका नया निर्माणाधीन बंगला तो इतना मजबूत रहा कि इसे तोडऩे का काम रही जेसीबी का जबड़ा ही क्षतिग्रस्त हो गया। इससे कुछ घंटे के लिये काम रुका रहा। इसी तरह से स्कूल भवन तोड़ने के दौरान एक जेसीबी का शीशा ही टूट गया।
गिड़गिड़ाती रही जस्सा की मां
कभी पोड़ी पंचायत की निर्विरोध और ठसक वाली सरपंच रह चुकी तो कभी शराब दुकान संचालन कर चुकी जस्सा की मां मीरा आज गिड़गिड़ाती और पुलिस के सामने हाथ जोड़े खड़ी नजर आई। जब जस्सा की दुकाने खाली कराई जा रही थी तो एक दुकान में अनाज रखे होने और उसे निकालने का अवसर चाहने जस्सा की मां गिड़गिड़ा रही थी।
भारी मात्रा में निकली लकड़ियां
जस्सा के मकान से भारी मात्रा में चिरी हुई लकिड़ियां निकली। लोगों ने कहा कि यह जंगल से चुरा कर लाई गई लकड़ियां है। इन लकड़ियों को निकालने और सुरक्षित रखने के लिये पुलिस ने जस्सा की मां को पूरा मौका भी दिया। लेकिन वन विभाग से कोई भी आदमी सूचना के बाद भी नहीं पहुंचा।
10 दिन की मोहलत
बताया गया है कि जस्सा की मां और उसका पूरा परिवार जिस घर में रहता है वह भी सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बना हुआ है। यह शासकीय जमीन आबादी भी घोषित नहीं है। लिहाजा जस्सा के परिवार को 10 दिन में यह घर खाली करने कहा गया है। बताया गया है कि 10 दिन बाद दो मंजिला इस घर को भी गिराने का काम किया जाएगा। यह घर जस्सा का सबसे बड़ा रसूख माना जाता है।
हर चीज सीसीटीवी की निगरानी में
जस्सा के घर और उससे लगे भवन पूरी तरह से सीसीटीवी के निगरानी में है। स्थानीय लोगों ने बताया और यहां दिख भी रहा था कि जस्सा ने न केवल अपने घर में बल्कि अलग बगल के घरों के सामने भी सीसीटीवी लगा रखे थे। बताया गया कि इसके माध्यम से वह बाहर की हर गतिविधि पर नजर रखता था।
कबाड़ खड़ा था लग्जरी वाहन
वन विभाग की कब्जे वाली जमीन में जस्सा के कबाड़ होते वाहन खड़े थे। जिसमें एक लग्जरी कार थी तो एक जीप। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तरह के लग्जरी वाहनों से जस्सा गांजे का कारोबार करता था। न जाने कितने ऐसे वाहन जस्सा के कारोबार में उपयोग होते थे। यही वजह थी कि थोड़ा भी संदिग्ध होने पर वह वाहनों का इस्तेमाल बंद कर देता था। फिर वह वाहन खड़े खड़े कबाड़ हो जाता था। रसूख पर चल रही कार्रवाई को देखने यहां काफी संख्या में लोग खड़े थे। इस दौरान तमाम चर्चा भी रही। लोगों ने कहा कि जस्सा के उड़ीसा और दिल्ली में भी मकान बने है। इस कार्रवाई से उसे बहुंत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।

Published on:
30 Jul 2020 10:14 am
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