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‘अनाथ’ बेटी नहीं बन सकी ‘अनाया’, दुबई के दंपति का गोद लेने से इंकार

खुशियों पर ग्रहणः कोरोना की वजह से देरी होने पर नहीं मिल सका मां का आंचल, पिता का प्यार

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सतना। कोरोना ने लोगों का बहुत कुछ छीन लिया यह तो सभी ने सुना होगा लेकिन कोरोना ने एक अनाथ बच्ची को मां-बाप का प्यार मिलने नहीं दिया यह कम ही सुनने को मिलेगा। अपनी मां द्वारा परित्यक्त की गई बालिका की भविष्य की खुशियों पर कोरोना का ऐसा ग्रहण लगा कि उसे गोद लेने को तैयार मां-बाप अब उसे स्वीकार करने से इंकार कर चुके हैं। जबकि कोरोना के पहले दुबई निवासी इस दंपति ने इस बालिका को नए नाम 'अनाया' के साथ स्वीकार करने सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कर चुके थे।

ये है अनाया न बन सकी बेटी की कहानी

'अनाया' नाम की कहानी सेवा भारती के प्रदीप सक्सेना बताते हैं कि एक नवजात बालिका जिसे उसकी मां ने परित्यक्त कर दिया था। इसके बाद पुलिस अस्पताल का सफर पूरा कर वह सेवा भारती की संस्था मातृछाया परिवार का सदस्य बनी। यहां उसे एक नाम दिया गया। इस नाम के साथ नवजात बच्ची की दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। कारा (सेन्ट्रल एडॉप्शन कमेटी दिल्ली) के पोर्टल पर इस बच्ची का ब्यौरा आनलाइन किया गया। नवंबर 2019 में इसकी प्रक्रिया शुरू हुई और इसी दौरान दुबई निवासी दंपति ने इसे गोद लेने की इच्छा जाहिर की। इन्होंने इस बच्ची को अपने द्वारा सोचे गए 'अनाया' नाम से स्वीकार करने की बात कही। दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई ही थी कोरोना लॉक डाउन लागू हो गया। इस दौरान तक न्यायालय की प्रक्रिया में भी विलंब होने लगा। फिर दो साल तक दुबई से कोई फ्लाइट प्रारंभ नहीं की गई। जब तक दुबई से नियमित फ्लाइट सेवा शुरू हुई और इधर न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ी और बच्ची का पासपोर्ट बना तब तक बच्ची की उम्र ढाई साल हो चुकी थी। अब बच्ची बड़ी हो चुकी थी। उधर दुबई के दंंपति की इच्छा थी कि वे छोटी बच्ची ही गोद लेंगे। लिहाजा उन्होंने बाद में इस ढाई साल की बच्ची को गोद लेने से मना कर दिया।

नया दत्तक ग्रहण भी उलझता गया

इस बच्ची के दत्तक ग्रहण में फिर विलंब का साया सामने आ गया। दुबई के दंपति द्वारा इंकार के बाद नियमत: अब न्यायालय से दत्तक ग्रहण विखंडन की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। जो जज इस मामले को देख रहे थे उनका तबादला हो गया। जो नए जज आए वे अवकाश में चले गए। जब तक वे अवकाश से आए तो केन्द्र सरकार ने व्यवस्था बदल कर कलेक्टर कोर्ट को अधिकार दे दिए। इधर कलेक्टर को यह तय करने में वक्त लग गया कि हाईकोर्ट का आदेश वे निरस्त कर सकते हैं या नहीं। जब यह तय हुआ कि निरस्त हो सकता है तब उन्होंने इसे निरस्त किया। इस तरह अब वह बच्ची लगभग चार साल की हो गई है।

अब नई प्रक्रिया प्रारंभ

सेवा भारती के प्रदीप सक्सेना बताते हैं कि अब नए सिरे से दत्तक मिलान की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। सेवा भारती की ओर से संभी संबधित दस्तावेज जिला बाल संरक्षण अधिकारी को प्रस्तुत कर दिए गए हैं। इधर जिला बाल संरक्षण अधिकारी ने 17 जुलाई को आयुक्त महिला बाल विकास को संबंधित बच्ची के दत्तक ग्रहण मिलान की प्रक्रिया प्रारंभ करने पत्र लिखा है। जल्द ही संभावना है कि बच्ची का प्रोफाइल आनलाइन होगा और नये सिरे से दत्तक ग्रहण प्रारंभ होगा। इधर 'अनाया' मातृछाया परिवार में खुश है।