
Police do not know who was operating the swimming pool
सतना. दादा सुखेन्द्र सिंह स्टेडियम स्थित स्वीमिंग पूल में गत 24 मई को डूबने से एक किशोर की मौत को लेकर जांच कर रही एजेंसियों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 7 दिन बाद भी जिम्मेदार किसी भी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं। मामले की जांच में तीन विभाग शामिल हैं लेकिन अभी भी स्थिति बेनतीजा ही है। सात दिन से जांच कर रही पुलिस को अभी तक यह पता नहीं चल सका कि पूल का संचालन कौन कर रहा था जबकि यह बात पूरा शहर जान रहा है। नगर निगम भी एक सरकारी परिसर में किशोर की मौत जैसे गंभीर मामले में भी चाही गई जानकारी पुलिस को नहीं दे पा रहा है। जिला पंचायत भी डीएसओ के जवाब के बाद अभी तक कार्रवाई की स्थिति में नहीं पहुंच सकी है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट हो रहा है कि सभी एक दूसरे पर दोषारोपण करके जांच को जबरिया लंबा खींच रहे हैं।
स्वीमिंग पूल मामले में सिटी कोतवाली टीआई विद्याधर पाण्डेय ने जांच को लेकर कहा कि हमने जांच के संबंध में नगर निगम के कुछ जानकारियां चाही हैं, इस संबंध में दो बार पत्र दे चुके हैं लेकिन अभी तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कहा, स्वीमिंग पूल का संचालन संधारण नगर निगम की अनुमति से होता है इसको लेकर बाईलाज सहित अन्य जानकारी चाही गई है। लेकिन अभी तक नहीं दी गई है।
छोटे भाई पर ठीकरा
सिटी कोतवली टीआई ने कहा कि जिस पूल में घटना हुई है उसका सरकारी इन्फ्रॉस्ट्रक्चर तो नियमों के अनुसार ही बना है। यह सही है कि घटना हुई है, लेकिन जब सगा छोटा भाई साथ में है तो और किसके ऊपर जिम्मेदारी दी जा सकती है कि वो सतर्कता बरतता। सगे छोटे भाई को पता नहीं चला...। पत्रिका ने छोटे भाई के बयान पर टीआई के सामने सवाल रखा कि छोटे भाई को ही तो पता चला तब उसने चिल्लाया लेकिन वहां मौजूद लाइफ गार्ड तत्काल एक्टिव नहीं हुए। इस पर टीआई ने कहा कि लाइफ गार्ड कौन-कौन था, कौन ड्यूटी पर था ये नगर निगम से जानकारी आती है तो फिर देखते हैं। इस पर टीआई से कहा गया कि यह जानकारी तो खेल अधिकारी देगें। जिस पर टीआई का जवाब रहा कि खेल अधिकारी कौन नियुक्त रहा यह तो निगम बताए। टीआई ने कहा कि खेल अधिकारी कौन है यह भी तो हमें जानकारी नहीं है। जब उन्हें बताया गया कि अहमद खान है तो टीआई ने कहा कि साक्ष्य लिखा पढ़ी में चाहिए होते हैं, कोर्ट मे पेश करना होता है। ऐसे बोलने से थोड़ी होता है। टीआई ने घटना दिनांक को लिये गए पानी के सेंपल को सागर प्रयोगशाला भेजे जाने की जानकारी दी है।
उधर, जिला पंचायत में चुप्पी
दूसरी ओर जिला पंचायत में भी डीएसओ के जवाब के बाद सुगबुगाहट नहीं दिख रही है। हालांकि जिपं सीइओ ने सख्ती के संकेत दिए थे लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग को जिला पंचायत में देखने वाले अधिकारी बीमार होने पर अवकाश में हैं।
निगम के अधिकारियों को भी जांच की फुरसत नहीं
नगर निगम आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से स्वीमिंग पूल के संबंध में जांच और अनुज्ञा के लिये ईई नागेन्द्र सिंह और स्वास्थ्य अधिकारी बृजेश मिश्रा को प्राधिकृत अधिकारी बनाया है। लेकिन उन्हें यह जिम्मेदारी मिले दो दिन हो चुके हैं इसके बाद भी किशोर की मौत जैसे गंभीर मामले में संबंधित पूल तक जाकर देखने का समय नहीं मिल पाया है। स्पष्ट है कि संबंधित जन मामले को किस गंभीरता से ले रहे हैं।
Published on:
01 Jun 2019 12:05 am
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